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संकट में मरीजों का जीवन ःचौथे दिन भी डॉक्टरों की हड़ताल जारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Mon, 02 Apr 2018 01:57 AM IST
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हड़ताल के चलते वापस लौटते मरीज और तीमारदार।
- फोटो : अमर उजाला
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एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज में रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल चौथे दिन भी जारी है। इसकी वजह से जनपद एवं आसपास के मरीजों का जीवन संकट में है। इमरजेंसी में नए मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। अन्य स्वास्थ्य सेवाएं भी बुरी तरह हड़ताल की चपेट में आ गई हैं।
जिला प्रशासन द्वारा भले ही हड़ताल खत्म नहीं होने पर डॉक्टरों पर एस्मा लगाने की चेतावनी दी गई है, लेकिन रेजीडेंट डॉक्टरों पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा है। रविवार को जीबीएम में डॉक्टरों ने सोमवार तक के लिए हड़ताल जारी रखने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि महिला रेजीडेंट डॉक्टर के साथ बदसलूकी करने वाले एएमयू छात्र संघ के कैबिनेट सदस्य जैद शेरवानी के खिलाफ जब तक कार्रवाई नहीं होती एवं उन्हें सुरक्षा का माहौल नहीं मिलता, हड़ताल जारी रहेगी।
इमरजेंसी में उपचार नहीं मिलने के कारण रविवार को प्रीतमढ़ी सराय से पहुंची इसू देवी को निराश होकर बच्ची के साथ वापस लौटना पड़ा।
एटा चुंगी से अपने रिश्तेदार से मिलने पहुंचे रवि को भी वापस जाना पड़ा। हड़ताल के कारण उनके रिश्तेदार कहीं और चले गए हैं। नगला गुमानी के गुलाब सिंह के पिता भर्ती हैं, लेकिन हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। अपने पिता के स्वास्थ्य को लेकर वह बेहद चिंतित है। सोरों से परिजनों को दिखाने आए भगवान सिंह को भी वापस लौटना पड़ा।
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हड़ताल के कारण न सिर्फ इमरजेंसी, बल्कि अन्य तमाम तरह की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। सामाजिक कार्यकर्ता मारिया आलम उमर ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को हड़ताल को गंभीरता से लेना चाहिए और डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ एएमयू प्रशासन से भी जवाब-तलब किया जाना चाहिए। हड़ताल से सर्वाधिक नुकसान गरीब मरीजों को हो रहा है, जिनके पास उपचार कराने के लिए पैसे तक नहीं होते।
डीएम ने जेएन मेडिकल कॉलेज की हड़ताल के मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज में चार दिन से जारी जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल पर जिलाधिकारी ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए हैं। ये जांच अपर नगर मजिस्ट्रेट प्रथम करेंगे। जिलाधिकारी ने अमर उजाला में प्रकाशित खबरों का संज्ञान लेते हुए अपने लिखित आदेश में कहा है कि 28 मार्च की रात छात्रों और जूनियर डॉक्टरों में झड़प के बाद जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल शुरू हो गई है, जो मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। तीन मरीजों के बेड से हाथ पैर बांधे जाने का वीडियो भी संज्ञान में आया है। जिसमें से एक अज्ञात मरीज की मौत 31 मार्च को हो गई। अत: इसकी जांच के लिए अपर नगर मजिस्ट्रेट प्रथम को जांच का आदेश दिया गया है। जांच रिपोर्ट मय आख्या एवं अनुलग्नक पंद्रह दिन में तीन प्रतियों में जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी। जिलाधिकारी ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई नियमानुसार होगी। गौर हो कि शनिवार को इस प्रकरण में जिलाधिकारी ने कहा था कि अगर हड़ताल जल्द समाप्त नहीं हुई तो एस्मा के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश की प्रति एसएसपी, अपर नगर मजिस्ट्रेट को भेजी गई है।
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जिला प्रशासन द्वारा भले ही हड़ताल खत्म नहीं होने पर डॉक्टरों पर एस्मा लगाने की चेतावनी दी गई है, लेकिन रेजीडेंट डॉक्टरों पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा है। रविवार को जीबीएम में डॉक्टरों ने सोमवार तक के लिए हड़ताल जारी रखने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि महिला रेजीडेंट डॉक्टर के साथ बदसलूकी करने वाले एएमयू छात्र संघ के कैबिनेट सदस्य जैद शेरवानी के खिलाफ जब तक कार्रवाई नहीं होती एवं उन्हें सुरक्षा का माहौल नहीं मिलता, हड़ताल जारी रहेगी।
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इमरजेंसी में उपचार नहीं मिलने के कारण रविवार को प्रीतमढ़ी सराय से पहुंची इसू देवी को निराश होकर बच्ची के साथ वापस लौटना पड़ा।
एटा चुंगी से अपने रिश्तेदार से मिलने पहुंचे रवि को भी वापस जाना पड़ा। हड़ताल के कारण उनके रिश्तेदार कहीं और चले गए हैं। नगला गुमानी के गुलाब सिंह के पिता भर्ती हैं, लेकिन हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। अपने पिता के स्वास्थ्य को लेकर वह बेहद चिंतित है। सोरों से परिजनों को दिखाने आए भगवान सिंह को भी वापस लौटना पड़ा।
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हड़ताल के कारण न सिर्फ इमरजेंसी, बल्कि अन्य तमाम तरह की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। सामाजिक कार्यकर्ता मारिया आलम उमर ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को हड़ताल को गंभीरता से लेना चाहिए और डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ एएमयू प्रशासन से भी जवाब-तलब किया जाना चाहिए। हड़ताल से सर्वाधिक नुकसान गरीब मरीजों को हो रहा है, जिनके पास उपचार कराने के लिए पैसे तक नहीं होते।
डीएम ने जेएन मेडिकल कॉलेज की हड़ताल के मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज में चार दिन से जारी जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल पर जिलाधिकारी ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए हैं। ये जांच अपर नगर मजिस्ट्रेट प्रथम करेंगे। जिलाधिकारी ने अमर उजाला में प्रकाशित खबरों का संज्ञान लेते हुए अपने लिखित आदेश में कहा है कि 28 मार्च की रात छात्रों और जूनियर डॉक्टरों में झड़प के बाद जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल शुरू हो गई है, जो मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। तीन मरीजों के बेड से हाथ पैर बांधे जाने का वीडियो भी संज्ञान में आया है। जिसमें से एक अज्ञात मरीज की मौत 31 मार्च को हो गई। अत: इसकी जांच के लिए अपर नगर मजिस्ट्रेट प्रथम को जांच का आदेश दिया गया है। जांच रिपोर्ट मय आख्या एवं अनुलग्नक पंद्रह दिन में तीन प्रतियों में जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी। जिलाधिकारी ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई नियमानुसार होगी। गौर हो कि शनिवार को इस प्रकरण में जिलाधिकारी ने कहा था कि अगर हड़ताल जल्द समाप्त नहीं हुई तो एस्मा के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश की प्रति एसएसपी, अपर नगर मजिस्ट्रेट को भेजी गई है।