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राख के पहाड़ को ऊपर उठाने से जिंदगी बेहाल
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अनूपशहर रोड नगौला गांव के सामने राख का पहाड़।
- फोटो : CITY OFFICE
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आशीष निगम
अलीगढ़ बृजभूमि के पास है। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं में विशालकाय गोवर्धन पर्वत को ऊपर उठाने का प्रसंग भी शामिल है, उसी की तर्ज पर यहां राख के विशालकाय पहाड़ को ऊपर उठाने का काम हो रहा है। कासिमपुर पॉवर हाउस के कोयले की राख के पहाड़ को पांच मीटर ऊपर उठाए जाने से आसपास के गांवों में दो दिन से मटमैली धुंध छा गई है। 10 से 14 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाओं ने इस राख को सात किमी के दायरे में फैला दिया है, जिससे अनूपशहर रोड और आसपास की सड़कों पर चलने वाले राहगीर सबसे ज्यादा परेशान हैं। राख से छाने वाली धुंध से अचानक दिखना बंद हो जाता है तो वाहन सवारों को दिन में लाइट जलानी पड़ रही है। वहीं, बार-बार घर और दुकान की सफाई करनी पड़ रही है तो होटलों में भगोने के ऊपर लकड़ी के पटरे रखे जा रहे हैं, ताकि राख अंदर न घुस जाए। राख का असर बाजार पर भी हुआ, कपड़ा कारोबारी कपड़ों के गंदे होने से परेशान हैं।
हरदुआगंज तापीय परियोजना, कासिमपुर से गांव नगोला की ओर लगभग दो किमी की दूरी पर राख का नया बंधा है, जिसका क्षेत्रफल 6.25 लाख वर्गमीटर है। कोयला जलने के बाद बची हुई राख बड़े-बड़े पाइपों की मदद से पानी की तेज धार के साथ आकर इस बंधे पर जमा हो जाती है। ये सिस्टम इसीलिए बनाया गया है ताकि पावर हाउस और आसपास में राख न उड़े। बंधे के इस राख के पहाड़ को दो कंपार्टमेंट ए और बी में बांटा गया है। ए में राख आ रही है और बी में काम चल रहा है। बी की सतह पर एक तरफ से राख हटा कर मशीनों की मदद से मोटी प्लास्टिक सीट बिछाई जा रही है, ताकि राख के साथ आया पानी भूजल में न मिले। ये काम इनविराड कंपनी कर रही है, जिसे तोशीबा कंपनी द्वारा ठेका दिया गया है।
जब राख के पहाड़ में नीचे की ओर काम होता है तो राख धसकने के साथ उड़ने लगती है। गरमी के मौसम की तेज हवा इसको दूर तक उड़ाकर ले जाती है। काम के दौरान अगर पानी का इस्तेमाल कम हो तो यह समस्या बहुत विकराल हो जाती है। बीते तीन दिनों से ऐसा ही हो रहा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि ठेकेदार खर्च बचाने के लिए राख पर पानी का छिड़काव कम करते हैं, जिससे राख उड़ती है। गरमी के मौसम में हर बार यही होता है। बंधे के चारों ओर मजबूत बाउंड्रीवाल का इंतजाम नहीं है। जबकि बाउंड्रीवाल और पेड़ों से बंधे के चारों तरफ मजबूती होती और राख जल्द नहीं उड़ती।
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राख 55 रुपये प्रति क्विंटल
1- पावर हाउस से कनोडिया सीमेंट और एसट्रैक कंपनी सीमेंट बनाने के लिए राख लेती है, जो बंद कंटेनरों से सिकंदराबाद तक जा रही है। इस सूखी राख की कीमत 551 रुपये प्रति टन है, क्विंटल में 55 रुपये का रेट आता है।
2- पावर हाउस की हैवी ड्यूटी मशीनों में कोयला जलने के बाद उससे निकलने वाली राख को एडवांस टायलो सिस्टम से बंद कंटेनरों में भरा जाता है। टॉयलों सिस्टम पूरी तरह से मशीनों पर आधारित है। दिन भर में ऐसे दर्जनों कंटेनर भरे जाते हैं।
राख फ्री में ले जाओ
1- नए बंधे से राख उठाने का कोई पैसा नहीं लिया जाता है। यहां से मुकेश चौधरी और धनंजय पंडित को राख उठाने की अनुमति मिली है। इन दोनों से कई सीमेंट फैक्टरी वाले, ब्रिक्स फैक्टरी वाले और अन्य लोग राख लेते हैं।
2- पुराने बंधे से राख उठाने का भी पैसा पावर हाउस नहीं लेता है। इसको भी पूरी तरह से फ्री में दिया जा रहा है।
बड़ा सवाल... क्यों कतराते हैं अफसर
इस मामले में अमर उजाला ने कासिमपुर पावर हाउस के सिविल इंजीनियर जबर सिंह, एक्सईएन पुष्पराज सिंह, कंस्ट्रक्शन इंजीनियर आफताब अहमद और इंजीनियर निशीथ शर्मा से बातचीत की। इन अधिकारियों ने बहुत मुश्किल से कुछ ही जानकारी दी। स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बताया। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि अगर सब कुछ पारदर्शी व्यवस्था से हो रहा है तो पर्दादारी कैसी..?
समस्या दूर होगी : आरके वाही
हरदुआगंज तापीय परियोजना कासिमपुर के महाप्रबंधक आरके वाही ने बताया कि बंधे पर काम हो रहा था। तेज हवा से राख उड़ने लगी तो काम रोक दिया गया है। ये समस्या दो दिन से हुई है। शुक्रवार को दमकल की गाड़ियों से वहां पानी का छिड़काव कराया गया है। काम फिलहाल रोका गया है। राख उड़ने की समस्या कम होने पर काम दोबारा शुरू होगा। बंधे को ऐसा कर दिया जाएगा कि राख बिल्कुल नहीं उड़े।
डॉ. जितेंद्र वीर सिंह ने बताया कि राख की वजह से डस्ट पार्टिकल आंख, नाक और मुंह में चले जाते हैं। जिसकी वजह से कई तरह की संक्रामक बीमारियां हो सकती हैं। ऐेसे में मुंह को ढककर रखें और चश्मे का प्रयोग करें। किसी भी तरह की समस्या होने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें।
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अलीगढ़ बृजभूमि के पास है। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं में विशालकाय गोवर्धन पर्वत को ऊपर उठाने का प्रसंग भी शामिल है, उसी की तर्ज पर यहां राख के विशालकाय पहाड़ को ऊपर उठाने का काम हो रहा है। कासिमपुर पॉवर हाउस के कोयले की राख के पहाड़ को पांच मीटर ऊपर उठाए जाने से आसपास के गांवों में दो दिन से मटमैली धुंध छा गई है। 10 से 14 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाओं ने इस राख को सात किमी के दायरे में फैला दिया है, जिससे अनूपशहर रोड और आसपास की सड़कों पर चलने वाले राहगीर सबसे ज्यादा परेशान हैं। राख से छाने वाली धुंध से अचानक दिखना बंद हो जाता है तो वाहन सवारों को दिन में लाइट जलानी पड़ रही है। वहीं, बार-बार घर और दुकान की सफाई करनी पड़ रही है तो होटलों में भगोने के ऊपर लकड़ी के पटरे रखे जा रहे हैं, ताकि राख अंदर न घुस जाए। राख का असर बाजार पर भी हुआ, कपड़ा कारोबारी कपड़ों के गंदे होने से परेशान हैं।
हरदुआगंज तापीय परियोजना, कासिमपुर से गांव नगोला की ओर लगभग दो किमी की दूरी पर राख का नया बंधा है, जिसका क्षेत्रफल 6.25 लाख वर्गमीटर है। कोयला जलने के बाद बची हुई राख बड़े-बड़े पाइपों की मदद से पानी की तेज धार के साथ आकर इस बंधे पर जमा हो जाती है। ये सिस्टम इसीलिए बनाया गया है ताकि पावर हाउस और आसपास में राख न उड़े। बंधे के इस राख के पहाड़ को दो कंपार्टमेंट ए और बी में बांटा गया है। ए में राख आ रही है और बी में काम चल रहा है। बी की सतह पर एक तरफ से राख हटा कर मशीनों की मदद से मोटी प्लास्टिक सीट बिछाई जा रही है, ताकि राख के साथ आया पानी भूजल में न मिले। ये काम इनविराड कंपनी कर रही है, जिसे तोशीबा कंपनी द्वारा ठेका दिया गया है।
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जब राख के पहाड़ में नीचे की ओर काम होता है तो राख धसकने के साथ उड़ने लगती है। गरमी के मौसम की तेज हवा इसको दूर तक उड़ाकर ले जाती है। काम के दौरान अगर पानी का इस्तेमाल कम हो तो यह समस्या बहुत विकराल हो जाती है। बीते तीन दिनों से ऐसा ही हो रहा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि ठेकेदार खर्च बचाने के लिए राख पर पानी का छिड़काव कम करते हैं, जिससे राख उड़ती है। गरमी के मौसम में हर बार यही होता है। बंधे के चारों ओर मजबूत बाउंड्रीवाल का इंतजाम नहीं है। जबकि बाउंड्रीवाल और पेड़ों से बंधे के चारों तरफ मजबूती होती और राख जल्द नहीं उड़ती।
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राख 55 रुपये प्रति क्विंटल
1- पावर हाउस से कनोडिया सीमेंट और एसट्रैक कंपनी सीमेंट बनाने के लिए राख लेती है, जो बंद कंटेनरों से सिकंदराबाद तक जा रही है। इस सूखी राख की कीमत 551 रुपये प्रति टन है, क्विंटल में 55 रुपये का रेट आता है।
2- पावर हाउस की हैवी ड्यूटी मशीनों में कोयला जलने के बाद उससे निकलने वाली राख को एडवांस टायलो सिस्टम से बंद कंटेनरों में भरा जाता है। टॉयलों सिस्टम पूरी तरह से मशीनों पर आधारित है। दिन भर में ऐसे दर्जनों कंटेनर भरे जाते हैं।
राख फ्री में ले जाओ
1- नए बंधे से राख उठाने का कोई पैसा नहीं लिया जाता है। यहां से मुकेश चौधरी और धनंजय पंडित को राख उठाने की अनुमति मिली है। इन दोनों से कई सीमेंट फैक्टरी वाले, ब्रिक्स फैक्टरी वाले और अन्य लोग राख लेते हैं।
2- पुराने बंधे से राख उठाने का भी पैसा पावर हाउस नहीं लेता है। इसको भी पूरी तरह से फ्री में दिया जा रहा है।
बड़ा सवाल... क्यों कतराते हैं अफसर
इस मामले में अमर उजाला ने कासिमपुर पावर हाउस के सिविल इंजीनियर जबर सिंह, एक्सईएन पुष्पराज सिंह, कंस्ट्रक्शन इंजीनियर आफताब अहमद और इंजीनियर निशीथ शर्मा से बातचीत की। इन अधिकारियों ने बहुत मुश्किल से कुछ ही जानकारी दी। स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बताया। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि अगर सब कुछ पारदर्शी व्यवस्था से हो रहा है तो पर्दादारी कैसी..?
समस्या दूर होगी : आरके वाही
हरदुआगंज तापीय परियोजना कासिमपुर के महाप्रबंधक आरके वाही ने बताया कि बंधे पर काम हो रहा था। तेज हवा से राख उड़ने लगी तो काम रोक दिया गया है। ये समस्या दो दिन से हुई है। शुक्रवार को दमकल की गाड़ियों से वहां पानी का छिड़काव कराया गया है। काम फिलहाल रोका गया है। राख उड़ने की समस्या कम होने पर काम दोबारा शुरू होगा। बंधे को ऐसा कर दिया जाएगा कि राख बिल्कुल नहीं उड़े।
डॉ. जितेंद्र वीर सिंह ने बताया कि राख की वजह से डस्ट पार्टिकल आंख, नाक और मुंह में चले जाते हैं। जिसकी वजह से कई तरह की संक्रामक बीमारियां हो सकती हैं। ऐेसे में मुंह को ढककर रखें और चश्मे का प्रयोग करें। किसी भी तरह की समस्या होने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें।