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Aligarh News: प्रापर्टी विवाद में ग्रामीण की हत्या में एक को उम्रकैद
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लोधा क्षेत्र के गांव सलेमपुर माफी में प्रापर्टी विवाद में ग्रामीण की हत्या के मुकदमे में एक दोषी को न्यायालय ने सजा सुनाई है, जबकि तीन को बरी कर दिया है। यह फैसला एडीजे-10 प्रदीप कुमार राम की अदालत से सुनाया गया है। इस मुकदमे में दो नाबालिगों की पत्रावली अलग चल रही है। अभियोजन अधिवक्ता एडीजीसी कुलदीप सिंह तोमर के अनुसार घटना 22 जनवरी 2006 की दोपहर की है।
वादी मुकदमा महेश के अनुसार उनके घर के सामने ग्राम समाज की भूमि पर उनका कब्जा था। इस पर दूसरे पक्ष से शंकरपाल अपना दावा करते थे। इसी क्रम में महेश के पिता लीलाधर व शंकर पाल के बीच सिविल न्यायालय में मुकदमा विचाराधीन था। जिसमें सुनवाई के लिए 27 जनवरी तारीख नियत थी। उससे पहले घटना वाले दिन नामजद हमलावर होकर आए और जमीन पर लगी बाउंड्री गिराने लगे। इस दौरान विरोध करने पर परिजनों पर हमला कर दिया। फायरिंग भी की गई। इस हमले में महेश के पिला लीलाधर गोली लगने से व मां किरन देवी अन्य हथियारों की चोटों से जख्मी हो गए।
ग्रामीणों के एकत्रित होने पर हमलावर भाग गए। बाद में दोनों घायलों को मेडिकल कॉलेज लाया गया। जहां रात में लीलाधर को मृत घोषित कर दिया गया। इस मुकदमे में शंकरपाल, उनके पुत्र संजू, दो नाबालिग पुत्र के अलावा परिवार के जगदीश व रामेश्वर को नामजद किया गया। न्यायालय में सभी के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई। सत्र परीक्षण के दौरान नाबालिगों की पत्रावली अलग कर दी गई, जबकि साक्ष्यों व गवाही के आधार पर सिर्फ शंकर पाल को हत्या का दोषी करार दिया। बाकी संजू, जगदीश व रामेश्वर को बरी कर दिया। अदालत ने शंकर पाल को उम्रकैद व दस हजार रुपये जुर्माने की सजा से दंडित किया है।
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वादी मुकदमा महेश के अनुसार उनके घर के सामने ग्राम समाज की भूमि पर उनका कब्जा था। इस पर दूसरे पक्ष से शंकरपाल अपना दावा करते थे। इसी क्रम में महेश के पिता लीलाधर व शंकर पाल के बीच सिविल न्यायालय में मुकदमा विचाराधीन था। जिसमें सुनवाई के लिए 27 जनवरी तारीख नियत थी। उससे पहले घटना वाले दिन नामजद हमलावर होकर आए और जमीन पर लगी बाउंड्री गिराने लगे। इस दौरान विरोध करने पर परिजनों पर हमला कर दिया। फायरिंग भी की गई। इस हमले में महेश के पिला लीलाधर गोली लगने से व मां किरन देवी अन्य हथियारों की चोटों से जख्मी हो गए।
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ग्रामीणों के एकत्रित होने पर हमलावर भाग गए। बाद में दोनों घायलों को मेडिकल कॉलेज लाया गया। जहां रात में लीलाधर को मृत घोषित कर दिया गया। इस मुकदमे में शंकरपाल, उनके पुत्र संजू, दो नाबालिग पुत्र के अलावा परिवार के जगदीश व रामेश्वर को नामजद किया गया। न्यायालय में सभी के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई। सत्र परीक्षण के दौरान नाबालिगों की पत्रावली अलग कर दी गई, जबकि साक्ष्यों व गवाही के आधार पर सिर्फ शंकर पाल को हत्या का दोषी करार दिया। बाकी संजू, जगदीश व रामेश्वर को बरी कर दिया। अदालत ने शंकर पाल को उम्रकैद व दस हजार रुपये जुर्माने की सजा से दंडित किया है।
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