आंख के पर्दे में आ गई जान, धन्यवाद आयुष्मान
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थाना देहली गेट के सराय मियां में रहने वाले बाबूलाल माहौर के सभी बच्चे उनसे अलग रहते हैं। बाबूलाल कहते हैं कि पर्दे की खराबी के चलते उन्हें बिल्कुल भी दिखाई नहीं देता था। घर में पत्नी के अलावा कोई नहीं है इसलिए पूरी दुनिया अंधेरी रहती और घर से बाहर दो कदम रखने के लिए भी किसी का सहारा चाहिए होता था। एक वर्ष पहले उनका गोल्ड कार्ड जारी हो गया, जिसके बाद उन्होंने इसी वर्ष 17 अप्रैल को पहला और उसके बाद उनका दूसरा आपरेशन हुआ। यह पूरा उपचार उन्हें नि:शुल्क हासिल हुआ है।
इस तरह बनता है गोल्ड कार्ड
‘आयुष्मान भारत योजना का लाभ लेने के लिए गोल्डन कार्ड को बनाने के लिए विभाग शिविर लगा रहा है। जब भी आप योजना में रजिस्टर्ड हास्पिटल जाएंगे वहां पर आपको आयुष्मान मित्र मिलेंगे। यह आपकी सहायता करेंगे। गोल्डन कार्ड को पाने के लिए आपको आधिकारिक वेबसाइट पर लाग इन करना होगा और कोड चुनना होगा। जिसे कामन सर्विस सेंटर में आयुष्मान मित्र को देना होगा। आयुष्मान मित्रा सीएससी में बाकी प्रक्रिया पूरी कर देंगे। गोल्ड कार्ड के लिए आवेदकों को सिर्फ 30 रुपये का भुगतान करना होगा’विज्ञापन विज्ञापन
- डॉ. खान चंद, नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत योजना।
इस तरह होता है योजना के तहत इलाज
- सबसे पहले एक सॉफ्टवेयर के जरिए इस बात की पुष्टि करेंगे कि आप योजना के लिए पात्र हैं या नहीं।
- इसके लिए आपसे आधार कार्ड या आपकी पहचान का दूसरा कार्ड मांगा जाएगा।
- इसके बाद आपकी बीमारी के हिसाब से हास्पिटल पैकेज का चयन करेगा। आपकी जांच और इलाज होगा।
- इलाज के दौरान सभी जरूरी दस्तावेज अस्पताल इकट्ठा करेगा, मरीज भर्ती होगा।
- इलाज के दौरान उसका पूरा विवरण रखा जाएगा। इसके बाद मरीज डिस्चार्ज होगा, डिस्चार्ज समरी जारी होगी।
- इसके बाद हास्पिटल को पेमेंट हो जाएगा।
‘गांधी आई हास्पिटल 16 अक्तूूबर 2018 को आयुष्मान योजना में दर्ज हुआ था। अस्पताल की सीएमओ डॉ. रजिया खान और आयुष्मान योजना के प्रभारी अधिकारी एसीएमओ डॉ. अजय सक्सेना की देखरेख में आयुष्मान योजना के पात्र मरीजों का इलाज हो रहा है।’
- मधुप लहरी, चिकित्सालय अधीक्षक, गांधी आई हास्पिटल