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समीक्षा बैठक में नेताओं के छूटे पसीने

अमर उजाला, अलीगढ़ Updated Fri, 08 Dec 2017 01:57 AM IST
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leader - फोटो : अमर उजाला
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नगर निगम अलीगढ़ के चुनाव में भाजपा के मेयर प्रत्याशी राजीव अग्रवाल की करारी हार के कारणों की समीक्षा गुरुवार को आगरा में हुई। बैठक में अलीगढ़ से पहुंचे नेताओं को जवाब देते-देते पसीने आ गए। 
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आगरा स्थित भाजपा के क्षेत्रीय कार्यालय में महानगर अध्यक्ष विवेक सारस्वत, अलीगढ़ निकाय चुनाव प्रभारी बाबूराम निषाद, सह प्रभारी रवींद्र बढ़ाना, अलीगढ़ के प्रभारी भानु प्रताप सिंह, निकाय चुनाव के समन्वयक मनीष राय ने हार के कारणों से क्षेत्रीय संगठन मंत्री भवानी सिंह को अवगत कराया। इन्होंने ध्रुवीकरण को हार का कारण बताया। लेकिन महानगर कमेटी के नेताओं के तर्कों से क्षेत्रीय संगठन मंत्री संतुष्ट नहीं हुए। जिले के नगर निकायों में हार को लेकर जिलाध्यक्ष से भी जवाब तलब किया गया। 

बैठक से लौटकर आए महानगर अध्यक्ष विवेक सारस्वत ने बताया कि उनकी तरफ से हार का प्रमुख कारण ध्रुवीकरण को बताया गया था। तर्क था कि विधानसभा चुनाव 2017 में समाजवादी पार्टी को शहर और कोल विधानसभा क्षेत्र में लगभग एक लाख 40 हजार वोट मिले थे, जिनमें से अधिकतर इस बार बहुजन समाज पार्टी के मेयर प्रत्याशी मो. फुरकान की तरफ चले गए। इस पर उनसे पूछा गया कि ध्रुवीकरण हुआ तो हिंदू वोट एकजुट क्यों नहीं हुआ, जबकि इन वोटरों की संख्या ज्यादा है। इस पर सफाई दी गई कि 2012 में भाजपा की मेयर शकुंतला भारती एक लाख 11 हजार वोट लेकर जीती थीं। 2017 में ये वोट एक लाख 15 हजार तक पहुंचे। हजारों वोट वोटर लिस्ट से गायब होना भी हार की वजह रही। इस पर संगठन के नेताओं ने कहा कि ये सब बहाने हैं, हार का कारण संगठन और रणनीति की कमजोरी है, जिसे स्वीकार करना चाहिए। वार्ष्णेय-अग्रवाल विवाद, अग्रवालों में टिकट को लेकर मनमुटाव, हिंदू प्रत्याशियों के वोट काटने के कारणों को भी संगठन के नेताओं ने खारिज कर दिया।

इसी बीच जिला कमेटी की समीक्षा के लिए जिलाध्यक्ष देवराज सिंह, पूर्व विधायक राजवीर सिंह, अरुण शर्मा और राजकुमार चाहर पहुंचे। उनसे भी खैर नगर पालिका, नगर पंचायत जट्टारी, नगर पंचायत कौड़ियागंज, नगर पंचायत इगलास और नगर पंचायत छर्रा में हार के कारण पूछे गए। जिलाध्यक्ष देवराज सिंह ने  अलग अलग जगहों पर हार के अलग-अलग कारण बताए। इस बीच यह बात भी उठी कि खैर नगर पालिका और जट्टारी नगर पंचायत में सांसद सतीश गौतम ने सक्रियता से प्रत्याशी का साथ नहीं दिया। जिला कमेटी के जवाब से भी समीक्षक संतुष्ट नहीं हुए। उनसे भी कहा गया कि संगठन की कमी से चुनाव में हार हुई है।

सूत्रों के मुताबिक क्षेत्रीय संगठन मंत्री सबसे ज्यादा चिंतित अलीगढ़ में मेयर पद हारने को लेकर दिखे। ऐसे समय में जबकि देश और प्रदेश में भाजपा की सरकार है, हर तरह से माहौल अनुकूल है, अलीगढ़ में हार जाना पार्टी को हजम नहीं हो रहा है। चुनाव में कुछ लोगों की निष्क्रियता और कुछ की खास तरह की सक्रियता को लेकर भी पार्टी का प्रदेश नेतृत्व चिंतित है। ऐसे में हार की कीमत किसी न किसी को जरूर चुकानी पड़ेगी। बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष अश्विनी कुमार और क्षेत्रीय अध्यक्ष बीएल वर्मा भी मौजूद रहे।

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