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खूब चले पुराने नोट, निपटे 76 हजार मुकदमे
अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Sun, 13 Nov 2016 02:23 AM IST
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खूब चले पुराने नोट, निपटे 76 हजार मुकदमे
- फोटो : अमर उजाला
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मेले सरीखा माहौला था शनिवार को दीवानी न्यायालय में। मौका था राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर आयोजित मेगा राष्ट्रीय लोक अदालत का। इस आयोजन में स्थानीय स्तर पर फिर इतिहास रचा गया। आपसी सुलह-समझौते के आधार पर कुल 76हजार 765 मुकदमे निस्तारित किए गए।
यह आंकड़ा पिछले वर्ष की लोक अदालत से 11 हजार अधिक रहा। पिछले वर्ष दिसंबर में 65 हजार मुकदमे निस्तारित हुए थे। खास बात रही कि नोट बंदी आदेश के बाद यहां 500 व एक हजार के नोट धड़ल्ले से चले और लोगों ने आराम से पुराने नोट जमा किए। इस दौरान जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायाधीश श्रीमती कल्पना मिश्रा ने एडीआर भवन में फीता काटकर आयोजन का शुभारंभ किया।
इस दौरान विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव/एसीजेएम अभिषेक कुमार चतुर्वेदी, नोडल अधिकारी प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय पीएन मिश्र व्यवस्थाओं का जायजा लेते रहे। इस दौरान जिला जज श्रीमती कल्पना मिश्रा ने कहा कि लोक अदालत या जनता की अदालत ऐसी व्यवस्था है जहां पक्षकार स्वयं अपना फैसला करते हैं।
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पीठासीन अधिकारी मात्र सुलह में सहायता करता है। इस फैसले को कानूनी मान्यता होती है। इस दौरान दिन में वादकारियों, अधिवक्ताओं के लिए पूछताछ केंद्र बनाए गए और पुलिस की मोबाइल टीम भी भीड़ को देखते हुए तैनात रहीं।
सचिव अभिषेक कुमार चतुर्वेदी के अनुसार देर रात तक विभिन्न न्यायालयों से मुकदमे निस्तारण के आंकड़े आना जारी है। हमें उम्मीद है कि हम कहीं न कहीं महत्वपूर्ण स्थान पाएंगे। इस दौरान दुपहर में तमाम जिला स्तरीय अधिकारियों ने भी दीवानी का जायजा लिया और न्यायिक अधिकारियों से वार्ता की।
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यह आंकड़ा पिछले वर्ष की लोक अदालत से 11 हजार अधिक रहा। पिछले वर्ष दिसंबर में 65 हजार मुकदमे निस्तारित हुए थे। खास बात रही कि नोट बंदी आदेश के बाद यहां 500 व एक हजार के नोट धड़ल्ले से चले और लोगों ने आराम से पुराने नोट जमा किए। इस दौरान जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायाधीश श्रीमती कल्पना मिश्रा ने एडीआर भवन में फीता काटकर आयोजन का शुभारंभ किया।
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इस दौरान विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव/एसीजेएम अभिषेक कुमार चतुर्वेदी, नोडल अधिकारी प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय पीएन मिश्र व्यवस्थाओं का जायजा लेते रहे। इस दौरान जिला जज श्रीमती कल्पना मिश्रा ने कहा कि लोक अदालत या जनता की अदालत ऐसी व्यवस्था है जहां पक्षकार स्वयं अपना फैसला करते हैं।
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पीठासीन अधिकारी मात्र सुलह में सहायता करता है। इस फैसले को कानूनी मान्यता होती है। इस दौरान दिन में वादकारियों, अधिवक्ताओं के लिए पूछताछ केंद्र बनाए गए और पुलिस की मोबाइल टीम भी भीड़ को देखते हुए तैनात रहीं।
सचिव अभिषेक कुमार चतुर्वेदी के अनुसार देर रात तक विभिन्न न्यायालयों से मुकदमे निस्तारण के आंकड़े आना जारी है। हमें उम्मीद है कि हम कहीं न कहीं महत्वपूर्ण स्थान पाएंगे। इस दौरान दुपहर में तमाम जिला स्तरीय अधिकारियों ने भी दीवानी का जायजा लिया और न्यायिक अधिकारियों से वार्ता की।