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World Laughter Day: हास्य धारावाहिक लेखक मनोज संतोषी ने कहा, हंसना ही जिंदगी है, नवरस में शामिल है हंसी
Sun, 07 May 2023 02:06 AM IST
चमन शर्मा
इकराम वारिस, अमर उजाला, अलीगढ़
इकराम वारिस, अमर उजाला, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Sun, 07 May 2023 02:06 AM IST
सार
हास्य धारावाहिक भाबी जी घर पर हैं, मे आई कम इन मैडम, जीजा जी छत पर हैं, यस बॉस, हप्पू की उलटन पलटन के लेखक मनोज संतोषी ने अमर उजाला को बताया कि हंसना ही जिंदगी है। इंसान पैदा हुआ है, तो निश्चित ही उसके साथ हंसी भी पैदा हुई है। हंसी नवरस में भी शामिल है।
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फिल्म अभिनेता व निर्देशक इश्त्यिाक खान, लेखक मनोज संतोषी।
- फोटो : रूपेश कुमार
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विस्तार
हंसाने को इबादत से भी ऊंचा माना गया है। इस पर शायर निदा फाजली ने लिखा है, घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूं कर लें, किसी रोते हुए बच्चे को हंसाया जाए। फाजली के इस शेर को आगे बढ़ाने में अलीगढ़ के हरदुआगंज में जन्मे मनोज संतोषी दिल-ओ-जान से लगे हैं। उन्हें उदास चेहरे पर मुस्कान बिखेरना अच्छा लगता है। वह कहते हैं कि हंसना ही जिंदगी है, क्योंकि नवरस में हंसी भी शामिल है।
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हास्य धारावाहिक भाबी जी घर पर हैं, मे आई कम इन मैडम, जीजा जी छत पर हैं, यस बॉस, हप्पू की उलटन पलटन के लेखक मनोज संतोषी ने अमर उजाला को बताया कि हंसना ही जिंदगी है। इंसान पैदा हुआ है, तो निश्चित ही उसके साथ हंसी भी पैदा हुई है। हंसी नवरस में भी शामिल है। पहले भी कॉमेडी फिल्मों का दौर रहा है। राजकपूर की फिल्मों में रोमांस और कॉमेडी होती थी। महमूद भी कॉमेडी करते थे। फिल्मों में कॉमेडी का ट्रैक होता था। नाटकों में इसका चलन रहा है। 1940 दौर के बाद सिनेमा की प्रगति हुई तो उसी हिसाब से कॉमेडी भी अपनी जगह चलती रही। आज कॉमेडी हावी है, क्योंकि जिंदगी में गम ज्यादा है। कॉमेडी देख-सुनकर लोग थोड़ी राहत महसूस करते हैं।
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उन्होंने कहा कि टीवी स्क्रीन पर भाबी जी घर पर हैं, हप्पू की उलटन पलटन चल रहा है। दो कॉमेडी शो आने वाले हैं। वह जिस तरह से गुदगुदाते हैं, उसी तरह गुदगुदाते रहेंगे। लोग खुश रहे और दुआएं दें कि वाह.. क्या चीज बनाई है। दर्शकों का प्यार मिलता रहा है। अगर पड़ोसन फिल्म देखिए तो बिना अश्लीलता की कॉमेडी होती थी। उस दौर में भी लोग मजे लेते थे, लेकिन जैसे-जैस दौर बदल रहा है। अब कॉमेडी में अश्लीलता और द्विअर्थी संवाद शामिल हो गए हैं। इससे इन्कार भी नहीं कर सकते हैं कुछ फिल्मों और वेब सीरीज में कॉमेडी के नाम पर अश्लीलता पेश की गई है, लेकिन अगर थोड़ा-बहुत द्विअर्थी लेकर दर्शकों को हंसाया जाए और परिवार के लोग एक साथ देख सकें तो उसमें बुरा भी नहीं है।
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पिता की हास्य कविताओं पर पुत्र बनाते हैं हास्य कार्टून
हास्य व्यंग्य के वरिष्ठ कवि प्रेम किशोर पटाखा की हास्य व्यंग्य कविताओं की करीब 20 पुस्तकों में उनेक कार्टूनिस्ट चित्रकार पुत्र शिवाशीष शर्मा ने ही कार्टूंस बनाए हैं। यह पिता पुत्र की अनोखी जोड़ी है, जिसमें पिता कलमकार और पुत्र चित्रकार। पिता ने 80 वर्ष की उम्र तक आते आते 80 पुस्तकें पाठकों को दी हैं, तो उनके शिवाशीष ने भी दर्जनों पुस्तकें चित्रकला सिखने वालों के हाथों में पहुंचा दी हैं। कवि पटाखा की हास्य की कई पुस्तकों के लिए शिवाशीष ने अपने पिता का ही केरीकेचर (हास्य कार्टून) बनाया है, जिन्हें लोगों ने बहुत पसंद किया।
हास्य सम्राट काका हाथरसी
हास्य, व्यंग्य का परचम हास्य सम्राट काका हाथरसी ने देश ही नहीं, बल्कि दुनियाभर फहराया। जब हास्य की बात हो, तो उनका जिक्र किए बिना पूरा नहीं हो सकता। हाथरस के जैन गली मोहल्ला में 18 सितंबर 1906 को जन्मे काका हाथरसी ने हास्य कवि के रूप में ख्याति अर्जित की। अग्रसेन जयंती पर हाथरस के नवयुवक अग्रवाल मंडल की ओर से आयोजित एक नाटक में काका के नाम से एक चौधरी की खलनायक की भूमिका का सफल मंचन किया। इसके बाद से लोग उन्हें काका के नाम से पुकारने लगे। मित्रों की सलाह पर उन्होंने इस नाम के आगे हाथरसी शब्द और जोड़ा। सात फरवरी 2017 को जब संसद में एक बहस के जवाब में पीएम मोदी ने काका की कविता को उद्धत किया। फिल्म पीके में अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने काका की रचना का पाठ किया। काका हाथरसी- नेता अखरोट से बोले किसमिस लाल, हुजूर हल कीजिए मेरा एक सवाल, मेरा एक सवाल, समझ में बात न भरती, मुर्गी अंडे के ऊपर क्यों बैठा करती, नेता ने कहा, प्रबंध शीघ्र ही करवा देंगे, मुर्गी के कमरे में एक कुर्सी डलवा देंगे।
हास्य रस सर्वाधिक कठिन
अशोक अंजुम ने कहा साहित्य के सभी रसों में हास्य रस को वह सर्वाधिक कठिन मानते हैं। विशुद्ध हास्य लिखना और उसके द्वारा श्रोताओं को प्रभावित करना आसान काम नहीं है। उन्हें कवि सम्मेलनों में हास्य कवि के रूप में आमंत्रित किया जाता है। करीब 12 किताबें उन्होंने हास्य पर लिखी है।
हास्य सम्राट काका हाथरसी
हास्य, व्यंग्य का परचम हास्य सम्राट काका हाथरसी ने देश ही नहीं, बल्कि दुनियाभर फहराया। जब हास्य की बात हो, तो उनका जिक्र किए बिना पूरा नहीं हो सकता। हाथरस के जैन गली मोहल्ला में 18 सितंबर 1906 को जन्मे काका हाथरसी ने हास्य कवि के रूप में ख्याति अर्जित की। अग्रसेन जयंती पर हाथरस के नवयुवक अग्रवाल मंडल की ओर से आयोजित एक नाटक में काका के नाम से एक चौधरी की खलनायक की भूमिका का सफल मंचन किया। इसके बाद से लोग उन्हें काका के नाम से पुकारने लगे। मित्रों की सलाह पर उन्होंने इस नाम के आगे हाथरसी शब्द और जोड़ा। सात फरवरी 2017 को जब संसद में एक बहस के जवाब में पीएम मोदी ने काका की कविता को उद्धत किया। फिल्म पीके में अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने काका की रचना का पाठ किया। काका हाथरसी- नेता अखरोट से बोले किसमिस लाल, हुजूर हल कीजिए मेरा एक सवाल, मेरा एक सवाल, समझ में बात न भरती, मुर्गी अंडे के ऊपर क्यों बैठा करती, नेता ने कहा, प्रबंध शीघ्र ही करवा देंगे, मुर्गी के कमरे में एक कुर्सी डलवा देंगे।
हास्य रस सर्वाधिक कठिन
अशोक अंजुम ने कहा साहित्य के सभी रसों में हास्य रस को वह सर्वाधिक कठिन मानते हैं। विशुद्ध हास्य लिखना और उसके द्वारा श्रोताओं को प्रभावित करना आसान काम नहीं है। उन्हें कवि सम्मेलनों में हास्य कवि के रूप में आमंत्रित किया जाता है। करीब 12 किताबें उन्होंने हास्य पर लिखी है।