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अलीगढ़ की मूर्तिकला इंडस्ट्री पर लक्ष्मी-गणेश मेहरबान

Sat, 27 Aug 2016 01:22 AM IST
कौशल कुमार ओझा
कौशल कुमार ओझा Updated Sat, 27 Aug 2016 01:22 AM IST
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Lakshmi - Ganesha sculpture of Aligarh industry Clement
अलीगढ़ की मूर्तिकला इंडस्ट्री पर लक्ष्मी-गणेश मेहरबान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
अलीगढ़ की पीतल की मूर्तिकला इंडस्ट्री पर लक्ष्मी-गणेश मेहरबान हैं। साउथ इंडिया के राज्यों में व्यापार में जबर्दस्त वृद्धि से पिछले कई साल से परेशान चल रहे निर्माताओं की चिंता दूर हुई है। दीवाली, दशहरा एवं गणेश चतुर्थी को लेकर बंपर आर्डर से इस इंडस्ट्री पर धन की वर्षा होने की पूरी उम्मीद है।
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी में अलीगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश में मूर्तियों की अच्छी मांग रही। 30 अक्तूबर को दीवाली, जबकि 1 से 10 अक्टूबर को दशहरा का त्यौहार पूरे देश में धूमधाम से मनाने की तैयारी चल रही है। इससे पहले 5 सितंबर को गणेश चतुर्थी है। इन त्यौहार को लेकर लक्ष्मी, गणेश समेत अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियों की जबर्दस्त डिमांड है। सच पूछा जाए तो यहां के मूूर्ति उद्योग के दिग्गजों के पास दीवाली के इतने आर्डर हैं कि उसे पूरा करने में पसीना छूट रहे हैं। खासकर साउथ इंडियन आर्ट का महीन काम करने के लिए बाहर के कारीगरों से ट्रेनिंग दिलाई जा रही है, ताकि मांग की पूर्ति समय से की जा सके।
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दक्षिण के राज्यों में मूर्तियों की मांग में उछाल का एक बड़ा कारण अलीगढ़ में साउथ इंडियन आर्ट के अनुरूप क्वालिटी का मूर्ति निर्माण है, जो अलीगढ़ के लिए नया है। साउथ इंडियन आर्ट में एंटिक पालिस के विभिन्न प्रकार के शेड्स, मीना कारी वर्क, स्टोन एवं नगों से मूर्तियों की सजावट आदि का काम यहां शुरू हो गया है। यह काम पहले सिर्फ दिल्ली में होता था। इस वजह से दक्षिण भारत के व्यापारी दिल्ली के बदले सीधे अलीगढ़ के उद्यमियों से संपर्क कर रहे हैं। मूर्ति निर्माताओं का कहना है कि व्यापार में उछाल का एक सबसे महत्वपूर्ण कारण पिछले साल की तुलना में पीतल के रेट में प्रति किलो करीब 30 रुपये की गिरावट एवं अप्रैल से मूल्य में स्थिरता है।
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जन्माष्टमी शानदार रही। दीवाली एवं दशहरा को लेकर भी जबर्दस्त आर्डर हैं। सबसे बड़ी परेशानी कारीगरों को लेकर है। अच्छे कारीगरों की कमी खल रही है। देश के विभिन्न प्रांतों से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी अच्छे आर्डर हैं। पिछले साल की तुलना में इस वर्ष पीतल के रेट कम हैं।

- अर्पित मित्तल, पार्टनर ब्रास क्लेक्शन,  सेंटर प्वाइंट
साउथ इंडियन आर्ट के अनुसार पीतल की मूर्तियों का निर्माण अलीगढ़ में होने से दक्षिण के राज्यों से कारोबार में जबर्दस्त उछाल है। सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि दिल्ली की भूमिका अब समाप्त होती जा रही है और दक्षिण के व्यापारी सीधे अलीगढ़ के उद्यमियों को आर्डर दे रहे हैं। अप्रैल माह से पीतल के रेट में स्थायित्व से भी कारोबार को नया जीवन मिला है।
- मोहित अग्रवाल,  प्रोपराइटर स्मार्ट इंडिया, जनकपुरी
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