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जाटों का आंदोलन कह किसान आंदोलन को बदनाम कर रही है सरकार : पूर्व सांसद
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पूर्व सांसद और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता चौधरी बिजेंद्र सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा देश को बताएं कि किसान आंदोलन पर उन्होंने जाट समाज के सांसद और विधायकों की बैठक क्यों की?
बृहस्पतिवार को मैरिस रोड स्थित होटल में पत्रकार वार्ता में चौधरी बिजेंद्र सिंह ने कहा कि आजादी की लड़ाई में समाज के सभी वर्गों ने अपना-अपना योगदान दिया। उस समाज को भाजपा की सरकार बांटना चाहती है। उन्होंने कहा कि किसान के आंदोलन को मात्र जाटों का आंदोलन कहकर यह उसको बदनाम करने की साजिश है।
उन्होंने कहा कि सरकार बताए कि उसके उस बयान का क्या हुआ जिसमें उन्होंने कहा था कि किसान आंदोलन और सरकार के बीच मात्र एक फोन कॉल की दूरी है। क्या वह 15 दिन में भी पूरी नहीं हुई? चौधरी बिजेंद्र सिंह ने कहा कि किसान आंदोलन में सरकार की हठधर्मिता 200 किसान शहीद हो गए हैं, लेकिन उनको श्रद्धांजलि देना तो दूर, किसान आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अपना बयान वापस लें और देश से माफी मांगें। यदि नैतिकता हो तो किसान विरोधी तीनों कानूनों को वापस लें और सम्मान देकर शहीद किसानों को पुष्प अर्पित करें। उनके परिवारों को आर्थिक मुआवजा देकर सरकारी नौकरी दें।
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बृहस्पतिवार को मैरिस रोड स्थित होटल में पत्रकार वार्ता में चौधरी बिजेंद्र सिंह ने कहा कि आजादी की लड़ाई में समाज के सभी वर्गों ने अपना-अपना योगदान दिया। उस समाज को भाजपा की सरकार बांटना चाहती है। उन्होंने कहा कि किसान के आंदोलन को मात्र जाटों का आंदोलन कहकर यह उसको बदनाम करने की साजिश है।
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उन्होंने कहा कि सरकार बताए कि उसके उस बयान का क्या हुआ जिसमें उन्होंने कहा था कि किसान आंदोलन और सरकार के बीच मात्र एक फोन कॉल की दूरी है। क्या वह 15 दिन में भी पूरी नहीं हुई? चौधरी बिजेंद्र सिंह ने कहा कि किसान आंदोलन में सरकार की हठधर्मिता 200 किसान शहीद हो गए हैं, लेकिन उनको श्रद्धांजलि देना तो दूर, किसान आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अपना बयान वापस लें और देश से माफी मांगें। यदि नैतिकता हो तो किसान विरोधी तीनों कानूनों को वापस लें और सम्मान देकर शहीद किसानों को पुष्प अर्पित करें। उनके परिवारों को आर्थिक मुआवजा देकर सरकारी नौकरी दें।
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