दिव्य है शिव का धाम: खेरेश्वर-अचलेश्वर धाम, जहां भक्तों के बनते बिगड़े सारे काम
शहर के एकदम मध्य में स्थित बाबा भोलेनाथ का अचलेश्वर धाम मंदिर सिद्ध पीठ के रूप में प्रसिद्ध है। भगवान शिव यहां शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। आज से 500 वर्ष पूर्व जमीन के अंदर से शिवलिंग प्रगट हुई थी।
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खेरेश्वर धाम मंदिर
सावन मास में अलीगढ़ मे लोधा क्षेत्र के हरिदासपुर स्थित खेरेश्वर धाम मंदिर, भक्तों की आस्था एवं भक्ति का प्रमुख केंद्र बन जाता है। भगवान भोलेनाथ यहां शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं और यह मंदिर सिद्ध पीठ के रूप में प्रसिद्ध है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु शिवलिंग पर जल एवं दूध अर्पित करने के लिए आते हैं। वैसे तो सावन के सोमवार को अधिकांश शिव मंदिरों में भक्तों का सैलाब उमड़ता है, मगर खेरेश्वर धाम में पूरे सावन भर आस्था उमड़ती हुई दिखाई देती है और हर-हर बम-बम के जयकारों से पूरा मंदिर गूंजता रहता है। सावन मेले को देखते हुए इस बार भी भक्तों के लिए ग्राम पंचायत स्तर से खास व्यवस्था की गई है। सेवादार भक्तों की सेवा के लिए मौजूद रहेंगे।
पौराणिक इतिहास
सिद्धपीठ खेरेश्वर धाम भगवान श्री कृष्ण अपने बड़े भाई बलराम के साथ आए हुए थे। साथ ही पांडव के साथ उन्होंने खेरेश्वर धाम स्थित शिव मंदिर पर हवन भी किया था, इसलिए पश्चिमी यूपी में खेरेश्वर धाम की मान्यता है। यहां आस-पास के अलावा कई प्रांतों के श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ और श्री बांके बिहारी के स्वरूप का दर्शन करने के लिए आते हैं। स्वामी हरिदास जी की कर्म स्थली के रूप में भी खेरेश्वर धाम जाना जाता है। अलीगढ़- पलवल मार्ग पर खेरेश्वर धाम मंदिर स्थित है। रोडवेज बस स्टैंड से रेलवे स्टेशन से खेरेश्वर धाम की दूरी करीब 13 किलोमीटर है। यहां भगवान शिव शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं।
ऐसा बताया जाता है कि द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण अपने बड़े भाई बलराम जी के साथ गंगा स्नान करने जा रहे थे, रास्ते में खेरेश्वरधाम उस समय एक टीले के रूप में था। यहां पर दोनों भाइयों ने कुछ देर विश्राम किया भगवान भोलेनाथ शिवलिंग की उपासना की। तभी गांव वालों ने बताया की यहां उलसूर नामक राक्षस का बहुत बड़ा आतंक है उसे कोलासुर नाम से जाना जाता था। इस पर बलराम जी ने कोलासूर राक्षस को ललकारा। दोनों में भयंकर युद्ध हुआ अंत में बलराम जी ने अपने हल से कोल्हापुर राक्षस का वध कर दिया। हल को लेकर आगे बड़े तो हरदुआगंज में एक तालाब में उस हल को धोया। इससे हरदुआगंज का नाम हल दुआ पड़ गया। यहां हल धुलने के बाद फिर दोनों भाइयों गंगा में जाकर स्नान किया।
भगवान श्री कृष्ण खेरेश्वर धाम में रुके थे इसलिए धीरे धीरे खेरेश्वर धाम की पौराणिक मान्यता पर और वहां भक्तों का आना शुरू हो गया। ऐसा भी बताया जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने पांडवों के साथ आकर उन्होंने शिवलिंग की पूजा की थी और हवन किया था इसीलिए यह मंदिर सिद्ध पीठ के रूप में प्रसिद्ध हो गया। प्रसिद्ध संगीतकार स्वामी हरिदास से खेरेश्वर धाम का जुड़ाव है। खेरेश्वर धाम की एकदम निकट हरिदासपुर गांव की है। स्वामी हरिदास जी महान संगीतकार थे और उनके शिष्य तानसेन अकबर के दरबार में नवरत्नों में से एक थे।
अचलेश्वर धाम
शहर के एकदम मध्य में स्थित बाबा भोलेनाथ का अचलेश्वर धाम मंदिर सिद्ध पीठ के रूप में प्रसिद्ध है। भगवान शिव यहां शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। आज से 500 वर्ष पूर्व जमीन के अंदर से शिवलिंग प्रगट हुई थी। मंदिर के निकट विशाल सरोवर भी है। ऐसा बताया जाता है कि यहां द्वापर युग में युधिष्ठिर के दोनों छोटे भाई नकुल और सहदेव ने स्नान किया था। इसके बाद से इस स्थान की मान्यता बढ़ती चली गई। अचल ताल के चारों ओर धीरे- धीरे मंदिर स्थापित होते गए, इसलिए इस स्थान को मंदिरों का नगर भी कहा जाता है।
जीटी जीटी रोड पर अचल ताल स्थित अचलेश्वर धाम मंदिर शहर के लोगों के लिए आस्था का प्रतीक है। शहर के मध्य में होने के कारण यहां भक्तों का सैलाब उमड़ता है। सावन प्रारंभ होते ही मंदिर हर हर बम-बम के जयकारों से गूंज उठता है मंदिर में भगवान शिव शिवलिंग के रूप में काफी नीचे विराजमान हैं ऐसा बताया जाता है। पहले यह मंदिर एक टीले के रूप में था और यहां खुदाई करने पर यह शिवलिंग निकला था। कई लोगों ने शिवलिंग को निकालकर एक अच्छे स्थान पर स्थापित करने की कोशिश की, मगर जितना खोजते जाते थे। शिवलिंग उतना ही अंदर निकलता जाता था।
अंत में लोग थक हार गए और उन्हें महसूस हुआ कि यह कोई दैवीय शक्ति है इसके बाद वहां पूजा-अर्चना शुरू हो गई। वैसे तो प्रत्येक सोमवार को यहां भक्तों का सैलाब उम्र पड़ता है मगर सावन में तो प्रतिदिन भक्त बाबा अचलेश्वरधाम के दर्शन करने बड़ी संख्या में आते हैं। शिवलिंग पर जलाभिषेक के साथ बेलपत्र, दूब, धतूरा आदि अर्पित करते हैं।
हर- हर, बम -बम से गूंज उठे शिवालय, भक्तों ने किया जलाभिषेक
सावन की शुरुआत होते ही रात 12 बजते ही शहर में स्थित शिवालय हर-हर बम-बम के जयकारों से गूंज उठे। बड़ी संख्या में भक्तों ने पहुंचकर भगवान भोलेनाथ पर जल और दूध अर्पित किया। बेलपत्र धतूरा आदि चढ़ाकर भगवान भोलेनाथ की पूजा की। भक्तों ने शहर के मध्य में स्थित मंदिरों में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर उनका पूजन किया। वैसे सावन मास के पहले सोमवार को भक्तों का अपार जनसैलाव उमड़ेगा।
इसी के साथ शहर के सभी मंदिरों में सावन के सोमवार की भी तैयारियां शुरू हो गई है। इस बार पहला सोमवार 10 जुलाई को पड़ रहा है। इसलिए मंदिरों में विशेष तैयारी की जा रही है। अचलेश्वर धाम मंदिर, खेरेश्वर धाम मंदिर एवं गभाना के श्री सिद्धनाथ भुमियां बाबा आश्रम में बैरिकेडिंग लगाई जा रही है, क्योंकि यहां भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। मंदिरों में सोमवार को देखते हुए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। मंदिरों में साफ- सफाई का काम भी तेजी से शुरू हो गया है। मंदिरों में इस बार खास तैयारी की जा रही है।