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अलीगढ़ः तीसरे दिन भी हड़ताल पर रहे जूनियर डॉक्टर
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हड़ताल की वजह से इमरजेंसी से वापस किया मरीज।
- फोटो : CITY OFFICE
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जेएन मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टर्स (जूनियर) तीसरे दिन भी हड़ताल पर रहे। वह नीट-2021 पीजी काउंसिलिंग में देरी होने पर नाराज हैं। हड़ताल की वजह से ओपीडी सेवा प्रभावित हो रही है।
सोमवार को दोपहर करीब एक बजे मलखान सिंह जिला अस्पताल से रेफर होकर खैर के बरका गांव निवासिनी प्रेमवती (55) जेएन मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी पहुंचीं। परिजनों ने बताया कि जूनियर डॉक्टर्स ने उन्हें भर्ती करने से इंकार कर दिया। मरीज के फेफड़े में मवाद है। उनकी हालत गंभीर है। वह 23 नवंबर को जिला अस्पताल में भर्ती हुई थीं।
हालत में सुधार न होने पर डॉक्टर ने उन्हें जेएन मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया। इसी तरह कई अन्य मरीज भी लौटाए जा रहे हैं। जूनियर डॉक्टर्स ने ओपीडी सेवा का बहिष्कार कर दिया है। हालांकि, वह ट्रॉमा सेंटर, इमरजेंसी, वार्ड में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जेएन मेडिकल कॉलेज के जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद खलफ सबा ने बताया कि नीट पीजी की काउंसिलिंग नहीं हो रही है, इसलिए ओपीडी सेवा से हटने का एलान 27 नवंबर को लिया गया। एएमयू के प्रॉक्टर प्रो. वसीम अली ने बताया कि यह बात सही है कि जूनियर डॉक्टर्स ने ओपीडी सेवाएं बंद कर दी हैं, लेकिन वह इमरजेंसी, ट्रॉमा, वार्ड में सेवाएं दे रहे हैं। इसलिए परामर्शदाताओं की तादाद बढ़ा दी गई है। सीनियर डॉक्टर्स भी आकर निरीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गंभीर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। किसी भी गंभीर मरीज को लौटाया नहीं जा रहा है।
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सोमवार को दोपहर करीब एक बजे मलखान सिंह जिला अस्पताल से रेफर होकर खैर के बरका गांव निवासिनी प्रेमवती (55) जेएन मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी पहुंचीं। परिजनों ने बताया कि जूनियर डॉक्टर्स ने उन्हें भर्ती करने से इंकार कर दिया। मरीज के फेफड़े में मवाद है। उनकी हालत गंभीर है। वह 23 नवंबर को जिला अस्पताल में भर्ती हुई थीं।
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हालत में सुधार न होने पर डॉक्टर ने उन्हें जेएन मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया। इसी तरह कई अन्य मरीज भी लौटाए जा रहे हैं। जूनियर डॉक्टर्स ने ओपीडी सेवा का बहिष्कार कर दिया है। हालांकि, वह ट्रॉमा सेंटर, इमरजेंसी, वार्ड में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जेएन मेडिकल कॉलेज के जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद खलफ सबा ने बताया कि नीट पीजी की काउंसिलिंग नहीं हो रही है, इसलिए ओपीडी सेवा से हटने का एलान 27 नवंबर को लिया गया। एएमयू के प्रॉक्टर प्रो. वसीम अली ने बताया कि यह बात सही है कि जूनियर डॉक्टर्स ने ओपीडी सेवाएं बंद कर दी हैं, लेकिन वह इमरजेंसी, ट्रॉमा, वार्ड में सेवाएं दे रहे हैं। इसलिए परामर्शदाताओं की तादाद बढ़ा दी गई है। सीनियर डॉक्टर्स भी आकर निरीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गंभीर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। किसी भी गंभीर मरीज को लौटाया नहीं जा रहा है।
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