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अलीगढ़ः मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों ने की हड़ताल, एक मरीज की मौत

Tue, 23 Jul 2019 12:59 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 23 Jul 2019 12:59 AM IST
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Junior doctors of Medical College strike in aligarh one patient dies
हड़ताल से परेशान मरीज - फोटो : Amar Ujala

सातवें वेतनमान को लेकर एक बार फिर गंभीर मरीजों का जीवन संकट में है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर एक बार फिर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इसकी वजह से इमरजेंसी सेवाएं ठप है। एएमयू छात्र एवं कर्मी को छोड़कर नए मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। दुर्घटना एवं विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त छटपटाते मरीज को तीमारदार रोते बिलखते हुए वापस ले जा रहे हैं। कासगंज से देर शाम उपचार के लिए पहुंचे टीबी के मरीज की मौत हो गई। 

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वेतनमान को लेकर 17 जून से 22 जून 2019 तक जूनियर डॉक्टर सामूहिक अवकाश पर रहे थे। एएमयू प्रशासन द्वारा समस्या का समाधान कराने का आश्वासन मिलने के बाद डॉक्टर काम पर लौटे थे। उसी समय चेतावनी दिए थे कि अगर 21 जुलाई तक वेतनमान की दिशा में ठोस कार्यवाही नहीं हुई तो फिर हड़ताल करेंगे। सोमवार सुबह जनरल बॉडी मीटिंग के बाद रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) के पदाधिकारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी। उसके बाद से इमरजेंसी में नए मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है।
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बदायूं के देव सिंह रविवार रात्रि में भर्ती हुए थे। ब्लड क्लाटिंग का केस था। चिकित्सकों ने हड़ताल का हवाला देकर उन्हें भी वापस भेज दिया। पूर्व सैनिक विभूति सिंह उपचार को पहुंचे तो उन्हें भी हड़ताल का हवाला देकर सुरक्षाकर्मियों ने वापस भेज दिया। ऐसे ही दूर-दराज से आए दर्जनों मरीजों को बिना उपचार वापस भेज दिया गया। इमरजेंसी में दोपहर तक मात्र छह मरीजों के पर्चे बने थे। कुछ मरीजों को प्राथमिक उपचार देकर वापस भेज दिया गया। देर शाम कासगंज से पहुंचे करीब 50 वर्षीय टीबी मरीज की मौत हो गई। डॉक्टरों का कहना है कि मरीज की मृत्यु पहले ही हो गई थी।
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय की उदासीनता के कारण सातवें वेतनमान से संबधित लेटर यूजीसी में नहीं भेजा जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा अपना कार्य कर दिया गया है। मानव संसाधन एवं यूजीसी की लापरवाही के कारण जूनियर डॉक्टरों को हड़ताल पर जाना पड़ा है। बीएचयू में भी जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर है। जेआर या एसआर पर दबाव बनाया गया तो हमलोग पुतला फूंकने पर मजबूर होंगे। कंसलटेंट दबाव बनाने के बदले अपना कार्य करें। 
- डॉ. अब्दुल्लाह आजमी, अध्यक्ष, आरडीए 

हड़ताल के बाद जेएन मेडिकल कॉलेज के सभी फैकल्टी मेंबर का ग्रीष्मकालीन अवकाश रद्द कर दिया गया है। हड़ताल के बावजूद ओपीडी सेवाएं ठीक से संचालित हुई। करीब 2500 मरीजों को देखा गया। 8-10 ऑपरेशन भी हुए। इमरजेंसी में भी मरीजों को देखने का निर्देश दिया गया है। जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के कारण नए मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। 

- प्रो. एससी शर्मा, प्रिंसिपल एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जेएन मेडिकल कॉलेज

वार्ड में भी हड़ताल का असर
जेएनएमसी के वार्ड में भी हड़ताल का असर देखने को मिल रहा है। वार्ड नंबर 3 में कई दिनों से भर्ती 27 दिन की बच्ची (नोमिता) को ड्रिप नहीं चढ़ने से तीमारदार परेशान हो गए। बच्ची छह दिन से भर्ती है और श्वांस से संबंधित बीमारी से पीड़ित है। चिकित्सकों ने सोमवार को बच्ची का ऑपरेशन करने को कहा था। तीमारदारों द्वारा ऑपरेशन से संबंधित तमाम सामान मंगा लिया गया है। हड़ताल का हवाला देकर ऑपरेशन बाद में करने को कहा गया है।

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