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सपा की मजबूती से जिपं सदस्यों का रेट व भाजपा का खर्च बढ़ा
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जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में सपा के सक्रिय होते ही जिला पंचायत सदस्यों का रेट अचानक बढ़ गया है, जिससे भाजपा खेमे का खर्च बढ़ने लगा है। सपा के निष्क्रिय होने पर जो सदस्य पांच लाख रुपये की टोकन मनी लेकर भाजपा के साथ थे, वो अब सपा से ऑफर का हवाला देकर 25 से 30 लाख की मांग कर रहे हैं। कई सदस्य 40 से 50 लाख की मांग कर रहे हैं। अधिकांश सदस्य मतदान से पहले 25 से 30 लाख रुपये की पूरी रकम एक साथ मांग रहे हैं अन्यथा की सूरत में मतदान नहीं करने की बात भी कहने लगे हैं। ऐसा नहीं कि भाजपा खेमे पर ही ये बोझ पड़ रहा है। सपा की ओर से मतदान करने का मन बना रहे सदस्य साइकिल वालों से 30 से 35 लाख रुपये तक की मांग कर रहे है। सपा भाजपा के इस रोचक मुकाबले में जिला पंचायत सदस्यों की चांदी हो गई है।
सपाई खेमा भी इन सदस्यों की मोटी मांग पूरी करने में ताकत लगा रहा है, जिससे भाजपा की परेशानी बढ़ाई जा सके। दोनों खेमों के नेताओं के बीच इसको लेकर तू तू मैं मैं भी हो रही है। दोनों ओर संपर्क रखने वाले एक सदस्य ने बताया कि जल्द ही समर्थन मूल्य को लेकर एक फार्मूला निकाला जा सकता है। जिसमें सदस्यों की सहमति होगी। इसके बाद सभी को एक सामान तवज्जो मिल सकेगी। अन्यथा किसी को कम तो किसी को ज्यादा का लाभ मिलेगा।
इधर, सपा की ओर से सम्मान की रक्षा के लिए हर तरह के ऑफर दिए जा रहे है। जिससे पार्टी इस चुनाव में पूरी मजबूती से भाजपा को टक्कर दे सके। यहां तक कि सपा खेमा क्त्रसस वोटिंग की भी प्लानिंग कर रहा है। ऐसे में भाजपा की गोद में बैठे सदस्य सपा के लिए वोट करें तो कोई अचरज नहीं होगा। ऐसा होने की संभावना तभी है, जब सदस्यों को उनकी मांग के अनुसार समर्थन मूल्य नहीं मिलेगा। इसलिए सपा हर जोड़तोड़ कर अपना बहुमत जुटाने में लगी है।
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सपाई खेमा भी इन सदस्यों की मोटी मांग पूरी करने में ताकत लगा रहा है, जिससे भाजपा की परेशानी बढ़ाई जा सके। दोनों खेमों के नेताओं के बीच इसको लेकर तू तू मैं मैं भी हो रही है। दोनों ओर संपर्क रखने वाले एक सदस्य ने बताया कि जल्द ही समर्थन मूल्य को लेकर एक फार्मूला निकाला जा सकता है। जिसमें सदस्यों की सहमति होगी। इसके बाद सभी को एक सामान तवज्जो मिल सकेगी। अन्यथा किसी को कम तो किसी को ज्यादा का लाभ मिलेगा।
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इधर, सपा की ओर से सम्मान की रक्षा के लिए हर तरह के ऑफर दिए जा रहे है। जिससे पार्टी इस चुनाव में पूरी मजबूती से भाजपा को टक्कर दे सके। यहां तक कि सपा खेमा क्त्रसस वोटिंग की भी प्लानिंग कर रहा है। ऐसे में भाजपा की गोद में बैठे सदस्य सपा के लिए वोट करें तो कोई अचरज नहीं होगा। ऐसा होने की संभावना तभी है, जब सदस्यों को उनकी मांग के अनुसार समर्थन मूल्य नहीं मिलेगा। इसलिए सपा हर जोड़तोड़ कर अपना बहुमत जुटाने में लगी है।
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