{"_id":"5ac3e8c24f1c1bc2618b55b1","slug":"intelligence-intelligence-alert-in-the-district-since-protests","type":"story","status":"publish","title_hn":"विरोध प्रदर्शन के बाद से जिले में खुफिया तंत्र अलर्ट ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विरोध प्रदर्शन के बाद से जिले में खुफिया तंत्र अलर्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला अलीगढ़
Updated Wed, 04 Apr 2018 02:22 AM IST
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सोमवार को रेलवे स्टेशन पर ट्रेन रोकने के लि दौड़ते लोग
- फोटो : फाइल फोटो
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एससी/एसटी एक्ट में संशोधन पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में सोमवार को हुए प्रदर्शन को लेकर खुफिया तंत्र पूरी तरह सक्रिय है। शासन, प्रशासन को आशंका है कि इस मुद्दे पर फिर से प्रदर्शन हो सकता है। ऐसे में मंगलवार को पूरे दिन खुफिया तंत्र ने बसपा नेताओं के अलावा सोमवार को प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले अन्य नेताओं की खुफिया निगहबानी रखी। एलआईयू यह टोह लेता रहा कि अब इस आंदोलन की यहां अगली रणनीति क्या है? कहीं इसे लेकर मीटिंग आदि तो नहीं की जा रही?
एससी/एसटी एक्ट में संशोधन के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर दलितों ने देश भर में उग्र प्रदर्शन किया था। सोमवार को यहां भी घंटों रेलवे ट्रैक जाम करने के साथ जुलूस आदि निकाले थे। खैर में वाहनों में तोड़फोड़ हुई थी। बसपा के अलावा कुछ दलित संगठनों के नेताओं ने प्रदर्शन की कमान संभाली थी। हालांकि बसपा के नेताओं को पार्टी आलाकमान से यह निर्देश मिले थे कि वह इस आंदोलन में शांतिपूर्वक सहयोग करें और किसी भी तरह की हिंसक गतिविधियों में शामिल न हों। अब सोमवार को जिस तरह से प्रदेश के अन्य हिस्सों में हिंसक आंदोलन हुए। उसे लेकर स्थानीय अधिकारी इस बात को लेकर खासे चिंतित रहे कि कहीं इस तरह की भीड़ फिर से अलीगढ़ में भी जमा न हो जाए। इसे लेकर पूरे दिन बसपा व अन्य दलित संगठनों से जुड़े नेताओं पर खुफिया निगाहें लगी रही। इनकी गतिविधियों की जानकारी ली जाती रही।
सोमवार को जितनी भीड़ जुटी, उसका अनुमान अधिकारियों को नहीं था। ऐसे में फिर अधिकारी परेशान हैं कि कहीं फिर इसी मसले पर फिर से भीड़ न जुट जाए। खुफिया तंत्र के अलावा अपने स्तर पर भी अधिकारी पूरे टोह लेते रहे। वहीं बसपा के जिलाध्यक्ष तिलकराज यादव का कहना है कि सोमवार को हुए आंदोलन को लेकर तो पार्टी नेतृत्व ने सहयोग करने के निर्देश दिए थे लेकिन अगले किसी भी तरह के प्रदर्शन आदि के लिए पार्टी हाईकमान ने कोई निर्देश नहीं दिया है। वैसे भी पार्टी किसी भी तरह की हिंसा में विश्वास नहीं रखती।
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सामने आ रहा भाजपा का दलित विरोधी चेहराः जमीरउल्लाह
पूर्व विधायक हाजी जमीरउल्लाह के शाहजमाल स्थित कैंप कार्यालय में शोकसभा आयोजित की गई। इसमें एससी/एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में भारत बंद के दौरान दलित समाज के आंदोलनकारियों की मौत पर शोक जाहिर किया गया। पूर्व विधायक ने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने दलितों को अत्याचार से बचाने के लिए एससी/एसटी एक्ट बनाया था, लेकिन भाजपा इसके साथ आरक्षण को समाप्त करने का काम कर रही है। उन्होंने मारे गए आंदोलनकरियो के परिजनों को एक-एक करोड़ व सरकारी नौकरी दी जाए। भाजपा का दलित विरोधी चेहरा सामने आ गया है। बाबा फरीद आजाद, बिल्लू चौहान, इमरान खान, फरहान सलमानी, मो. हफीज, रुखसार बेगम, इमरान घोसी, रमेश जाटव आदि थे।
शहर में ग्रीन अलर्ट, पुलिस की गश्त बढ़ाई
सोमवार को दलितों के आंदोलन के बाद शहर में चौकसी बढ़ती जा रही है। आंदोलन के दौरान ही जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश पांडेय ने रेलवे स्टेशन पर कहा था कि जिले का प्रदर्शन सामान्य है। यहां स्थिति सभी के सहयोग के कारण नियंत्रण में रही है। इसके साथ ही लखनऊ के आला अधिकारियों को मौके से ही सभी अपडेट दी जाती रही है जिस वजह से अलग से शासन को रिपोर्ट नहीं गई है। अधिकारियों के अनुसार शासन स्तर से भी रिपोर्ट नहीं मांगी गई है। मांगी जाती तो भेजी जाती।
जीआरपी इंस्पेक्टर यशपाल सिंह ने बताया कि सोमवार को हुए दलित आंदोलन के दौरान रेलवे ट्रैक जाम करने या किसी व्यवधान को लेकर रेल प्रशासन की ओर से अब तक कोई तहरीर नहीं दी गई है। तहरीर देने के बाद ही मुकदमा या अन्य कार्रवाई हो सकती है। जीआरपी में इस संबंध में कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। आरपीएफ इंस्पेक्टर नवल किशोर सिंह ने बताया कि किसी तरह से कोई रेल संपत्ति का नुकसान नहीं होने के कारण कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। इधर, मंगलवार को शाम से पुलिस प्रशासन ने शहर में ग्रीन सेक्टर स्कीम को प्रभारी कर चिन्हित 27 इलाकों में पुलिस की गश्त बढ़ा दी है। यहां पहले से तैनात पुलिस कमियों की संख्या बढ़ा कर अफवाह फैलाने वालों को चिन्हित किया जा रहा है, जिससे माहौल शांतिपूर्ण बना रहे।
मैं खुद को दलित मानता हूं : जफर आलम
शहर विधानसभा क्षेत्र से सपा के पूर्व विधायक जफर आलम ने कहा है एससी/एसटी एक्ट में संशोधन, संविधान के रचयिता डा. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाएं तोड़े जाने, दलितों में अति दलित और पिछड़ों अति पिछड़े के आरक्षण का विरोध जायज है। पूरा देश इसमें सुलग रहा है। अगर इंसाफ नहीं हुआ तो यह आग और भड़केगी। यह सब भाजपा और मोदी सरकार के इशारे पर हो रहा है। पूर्व विधायक ने कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और सपा के करोड़ों कार्यकर्ताओं ने दलितों के इस संघर्ष का पूरा समर्थन किया है। खुद उनके कार्यालय में आने वाले हर दलित को पूरा सम्मान देकर उसकी बात सुनी जाती है। जिस माध्यम से दलितों की मदद हो सकती है वह तत्काल की जा रही है। सोमवार को आंदोलन के दिन सैकड़ों दलित उनके कार्यालय में मौजूद रहे। कहा कि मुस्लिम और दलित बस्तियों का हाल एक जैसा है। दोनों जगह एक जैसी समस्याएं है। दरअसल, हिंदुस्तान में रहने वाले मुस्लिमों का एक बड़ा तबका हकीकत में दलित ही था। उनके पूर्वज कहीं न कहीं दलित थे। बाद में वह मुसलमान बने। यह बात वह कई वर्षों से अलग-अलग मंच से कहते आ रहे हैं। पूर्व विधायक ने कहा कि वह सैयद परिवार से ताल्लुक रखते हैं, लेकिन उनका खुद यह मानना है कि वो भी दलित ही हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व विधायक राकेश सिंह को सोमवार को बगैर किसी तलबी के ही एटा जेल से अकराबाद तक लाया जाना बहुत ही संवेदनशील मामला है। इसकी जांच होनी चाहिए। इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई..?
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एससी/एसटी एक्ट में संशोधन के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर दलितों ने देश भर में उग्र प्रदर्शन किया था। सोमवार को यहां भी घंटों रेलवे ट्रैक जाम करने के साथ जुलूस आदि निकाले थे। खैर में वाहनों में तोड़फोड़ हुई थी। बसपा के अलावा कुछ दलित संगठनों के नेताओं ने प्रदर्शन की कमान संभाली थी। हालांकि बसपा के नेताओं को पार्टी आलाकमान से यह निर्देश मिले थे कि वह इस आंदोलन में शांतिपूर्वक सहयोग करें और किसी भी तरह की हिंसक गतिविधियों में शामिल न हों। अब सोमवार को जिस तरह से प्रदेश के अन्य हिस्सों में हिंसक आंदोलन हुए। उसे लेकर स्थानीय अधिकारी इस बात को लेकर खासे चिंतित रहे कि कहीं इस तरह की भीड़ फिर से अलीगढ़ में भी जमा न हो जाए। इसे लेकर पूरे दिन बसपा व अन्य दलित संगठनों से जुड़े नेताओं पर खुफिया निगाहें लगी रही। इनकी गतिविधियों की जानकारी ली जाती रही।
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सोमवार को जितनी भीड़ जुटी, उसका अनुमान अधिकारियों को नहीं था। ऐसे में फिर अधिकारी परेशान हैं कि कहीं फिर इसी मसले पर फिर से भीड़ न जुट जाए। खुफिया तंत्र के अलावा अपने स्तर पर भी अधिकारी पूरे टोह लेते रहे। वहीं बसपा के जिलाध्यक्ष तिलकराज यादव का कहना है कि सोमवार को हुए आंदोलन को लेकर तो पार्टी नेतृत्व ने सहयोग करने के निर्देश दिए थे लेकिन अगले किसी भी तरह के प्रदर्शन आदि के लिए पार्टी हाईकमान ने कोई निर्देश नहीं दिया है। वैसे भी पार्टी किसी भी तरह की हिंसा में विश्वास नहीं रखती।
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सामने आ रहा भाजपा का दलित विरोधी चेहराः जमीरउल्लाह
पूर्व विधायक हाजी जमीरउल्लाह के शाहजमाल स्थित कैंप कार्यालय में शोकसभा आयोजित की गई। इसमें एससी/एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में भारत बंद के दौरान दलित समाज के आंदोलनकारियों की मौत पर शोक जाहिर किया गया। पूर्व विधायक ने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने दलितों को अत्याचार से बचाने के लिए एससी/एसटी एक्ट बनाया था, लेकिन भाजपा इसके साथ आरक्षण को समाप्त करने का काम कर रही है। उन्होंने मारे गए आंदोलनकरियो के परिजनों को एक-एक करोड़ व सरकारी नौकरी दी जाए। भाजपा का दलित विरोधी चेहरा सामने आ गया है। बाबा फरीद आजाद, बिल्लू चौहान, इमरान खान, फरहान सलमानी, मो. हफीज, रुखसार बेगम, इमरान घोसी, रमेश जाटव आदि थे।
शहर में ग्रीन अलर्ट, पुलिस की गश्त बढ़ाई
सोमवार को दलितों के आंदोलन के बाद शहर में चौकसी बढ़ती जा रही है। आंदोलन के दौरान ही जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश पांडेय ने रेलवे स्टेशन पर कहा था कि जिले का प्रदर्शन सामान्य है। यहां स्थिति सभी के सहयोग के कारण नियंत्रण में रही है। इसके साथ ही लखनऊ के आला अधिकारियों को मौके से ही सभी अपडेट दी जाती रही है जिस वजह से अलग से शासन को रिपोर्ट नहीं गई है। अधिकारियों के अनुसार शासन स्तर से भी रिपोर्ट नहीं मांगी गई है। मांगी जाती तो भेजी जाती।
जीआरपी इंस्पेक्टर यशपाल सिंह ने बताया कि सोमवार को हुए दलित आंदोलन के दौरान रेलवे ट्रैक जाम करने या किसी व्यवधान को लेकर रेल प्रशासन की ओर से अब तक कोई तहरीर नहीं दी गई है। तहरीर देने के बाद ही मुकदमा या अन्य कार्रवाई हो सकती है। जीआरपी में इस संबंध में कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। आरपीएफ इंस्पेक्टर नवल किशोर सिंह ने बताया कि किसी तरह से कोई रेल संपत्ति का नुकसान नहीं होने के कारण कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। इधर, मंगलवार को शाम से पुलिस प्रशासन ने शहर में ग्रीन सेक्टर स्कीम को प्रभारी कर चिन्हित 27 इलाकों में पुलिस की गश्त बढ़ा दी है। यहां पहले से तैनात पुलिस कमियों की संख्या बढ़ा कर अफवाह फैलाने वालों को चिन्हित किया जा रहा है, जिससे माहौल शांतिपूर्ण बना रहे।
मैं खुद को दलित मानता हूं : जफर आलम
शहर विधानसभा क्षेत्र से सपा के पूर्व विधायक जफर आलम ने कहा है एससी/एसटी एक्ट में संशोधन, संविधान के रचयिता डा. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाएं तोड़े जाने, दलितों में अति दलित और पिछड़ों अति पिछड़े के आरक्षण का विरोध जायज है। पूरा देश इसमें सुलग रहा है। अगर इंसाफ नहीं हुआ तो यह आग और भड़केगी। यह सब भाजपा और मोदी सरकार के इशारे पर हो रहा है। पूर्व विधायक ने कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और सपा के करोड़ों कार्यकर्ताओं ने दलितों के इस संघर्ष का पूरा समर्थन किया है। खुद उनके कार्यालय में आने वाले हर दलित को पूरा सम्मान देकर उसकी बात सुनी जाती है। जिस माध्यम से दलितों की मदद हो सकती है वह तत्काल की जा रही है। सोमवार को आंदोलन के दिन सैकड़ों दलित उनके कार्यालय में मौजूद रहे। कहा कि मुस्लिम और दलित बस्तियों का हाल एक जैसा है। दोनों जगह एक जैसी समस्याएं है। दरअसल, हिंदुस्तान में रहने वाले मुस्लिमों का एक बड़ा तबका हकीकत में दलित ही था। उनके पूर्वज कहीं न कहीं दलित थे। बाद में वह मुसलमान बने। यह बात वह कई वर्षों से अलग-अलग मंच से कहते आ रहे हैं। पूर्व विधायक ने कहा कि वह सैयद परिवार से ताल्लुक रखते हैं, लेकिन उनका खुद यह मानना है कि वो भी दलित ही हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व विधायक राकेश सिंह को सोमवार को बगैर किसी तलबी के ही एटा जेल से अकराबाद तक लाया जाना बहुत ही संवेदनशील मामला है। इसकी जांच होनी चाहिए। इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई..?