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2050 में भारत होगा सबसे शक्तिशाली राष्ट्र
अमर उजाला ब्यूरो/इगलास।
Updated Sat, 06 Feb 2016 01:38 AM IST
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बहुमुखी प्रतिभा का नेतृत्व और सकल घरेलू उत्पादन दर में तेजी से हो रही वृद्धि के बल पर भारत का भविष्य उज्जवल है। वर्ष 2050 में भारत विश्व का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनकर उभरेगा।
मंगलायतन विश्व विद्यालय में राष्ट्रीय व्याख्यान माला में 21वीं सदी की शक्ति-भारत- विषय पर मेजर जनरल (रिटा) सीपी सिंह ने कहा कि भारत के सामने चुनौतियों की कमी नहीं है लेकिन राष्ट्रवाद की भावना के कारण हम हर मुश्किल हालात पर काबू पा लेंगे। उन्होंने कहा कि हमारा देश बहु-संस्कृति वाला देश है लेकिन जब कभी राष्ट्र के सामने संकट खड़ा होता है तब हम सब एक हो जाते है। इस बात को पड़ौसी देश भी अच्छी तरह समझते हैं।
उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के समय पंचशील के सिद्धांत और पड़ौसियों से दोस्ताना सम्बंधों का परिणाम वर्ष 1962 के युद्ध में हम देख चुके हैं लेकिन अब पहले जैसे हालात नहीं है। अब हमारे पास विश्व की सबसे बड़ी सेना है। मालद्वीप जैसे देश हमसे सैनिक सहायता की इच्छा रखते हैं।
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हमने अत्यानुधिक हथियार, मिसाइल बनाई हैं। हमारी सेनाएं पूरी तरह से हर चुनौती का सामना करने को तैयार हैं। आने वाले समय में भारत रक्षा तकनीकि का निर्यात करेगा। समुद्री सीमा की रक्षा क्षेत्र में हमारी मारक क्षमता में वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि रक्षा और विदेश नीति के निर्धारण में सेना नेतृत्व की भागीदारी होनी चाहिए। इससे देश को अधिक ताकत मिलेगी।
वर्तमान में नीतियों का निर्धारण मंत्रालय स्तर से होता है और जिम्मेदारी सेना के कमांडरों की होती है। उन्होंने देश की तरक्की में सबसे बड़ी बाधा जनसंख्या वृद्धि को माना। वहीं चुनौतियों का जिक्त्रस् करते हुए कहा कि भारत संघीय संरचना वाला देश है। उन्होंने सीमा सुरक्षा बढ़ाने के साथ ही आतंकवाद से निपटने पर भी बल दिया। ब्रेन-डेऊन की बात पर उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिभाशाली लोगों की कमी नहीं है।
एक दिन भारत से प्रतिभाओं को अन्य देश आयात करेंगे। कार्यक्त्रस्म का शुभारंभ मुख्य वक्ता मेजर जनरल (रिटा.) सीपी सिंह और कुलपति ब्रिगेडियर (रिटा.) सुरजीत सिंह पावला ने सरस्वती मां के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया। व्याख्यान के अन्त में छात्र-छात्राओं ने महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे। प्रोवीसी ब्रिगेडियर (रिटा.)डा0 पीएस सिवाच ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस दौरान विभिन्न विभागों के डायरेक्टर, डीन, विभागाध्यक्ष, प्रवक्ता समेत छात्र-छात्राऐं मौजूद रहे।
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मंगलायतन विश्व विद्यालय में राष्ट्रीय व्याख्यान माला में 21वीं सदी की शक्ति-भारत- विषय पर मेजर जनरल (रिटा) सीपी सिंह ने कहा कि भारत के सामने चुनौतियों की कमी नहीं है लेकिन राष्ट्रवाद की भावना के कारण हम हर मुश्किल हालात पर काबू पा लेंगे। उन्होंने कहा कि हमारा देश बहु-संस्कृति वाला देश है लेकिन जब कभी राष्ट्र के सामने संकट खड़ा होता है तब हम सब एक हो जाते है। इस बात को पड़ौसी देश भी अच्छी तरह समझते हैं।
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उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के समय पंचशील के सिद्धांत और पड़ौसियों से दोस्ताना सम्बंधों का परिणाम वर्ष 1962 के युद्ध में हम देख चुके हैं लेकिन अब पहले जैसे हालात नहीं है। अब हमारे पास विश्व की सबसे बड़ी सेना है। मालद्वीप जैसे देश हमसे सैनिक सहायता की इच्छा रखते हैं।
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हमने अत्यानुधिक हथियार, मिसाइल बनाई हैं। हमारी सेनाएं पूरी तरह से हर चुनौती का सामना करने को तैयार हैं। आने वाले समय में भारत रक्षा तकनीकि का निर्यात करेगा। समुद्री सीमा की रक्षा क्षेत्र में हमारी मारक क्षमता में वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि रक्षा और विदेश नीति के निर्धारण में सेना नेतृत्व की भागीदारी होनी चाहिए। इससे देश को अधिक ताकत मिलेगी।
वर्तमान में नीतियों का निर्धारण मंत्रालय स्तर से होता है और जिम्मेदारी सेना के कमांडरों की होती है। उन्होंने देश की तरक्की में सबसे बड़ी बाधा जनसंख्या वृद्धि को माना। वहीं चुनौतियों का जिक्त्रस् करते हुए कहा कि भारत संघीय संरचना वाला देश है। उन्होंने सीमा सुरक्षा बढ़ाने के साथ ही आतंकवाद से निपटने पर भी बल दिया। ब्रेन-डेऊन की बात पर उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिभाशाली लोगों की कमी नहीं है।
एक दिन भारत से प्रतिभाओं को अन्य देश आयात करेंगे। कार्यक्त्रस्म का शुभारंभ मुख्य वक्ता मेजर जनरल (रिटा.) सीपी सिंह और कुलपति ब्रिगेडियर (रिटा.) सुरजीत सिंह पावला ने सरस्वती मां के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया। व्याख्यान के अन्त में छात्र-छात्राओं ने महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे। प्रोवीसी ब्रिगेडियर (रिटा.)डा0 पीएस सिवाच ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस दौरान विभिन्न विभागों के डायरेक्टर, डीन, विभागाध्यक्ष, प्रवक्ता समेत छात्र-छात्राऐं मौजूद रहे।