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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   India First Large Scale Sprinkler System to Curb 60000 Tons of Fly Ash in Aligarh Benefiting 30000 People

UP: यहां 60 हजार टन राख उड़ने से रोकेगा देश का पहला बड़ा स्प्रिंक्लर सिस्टम, 30 हजार लोगों को मिलेगी बड़ी राहत

Wed, 12 Feb 2025 02:49 PM IST
शाहरुख खान आशीष निगम, अमर उजाला, अलीगढ़
आशीष निगम, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 12 Feb 2025 02:49 PM IST
सार

Aligarh News: अलीगढ़-मुरादाबाद हाईवे हरदुआगंज पावर हाउस के एश ड्रम से बेतहाशा राख उड़ती है। देश का पहला बड़ा स्प्रिंक्लर सिस्टम इस 60 हजार टन राख को उड़ने से रोकेगा। एएमयू के सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की मदद से यह प्रोजेक्ट बन रहा है।

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India First Large Scale Sprinkler System to Curb 60000 Tons of Fly Ash in Aligarh Benefiting 30000 People
हरदुआगंज पावर हाउस के एश ड्रम से बेतहाशा राख उड़ती है - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Harduaganj Power Plant News: अलीगढ़ के हरदुआगंज तापीय परियोजना कासिमपुर के एश ड्रम से उड़ने वाली बेतहाशा राख का स्थायी समाधान कराने की तैयारी हो गई है। इससे 10 गांवों के तीस हजार लोगों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी। पावर हाउस प्रबंधन, एएमयू के सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की मदद से देश का पहला अनोखा और बड़ा स्प्रिंक्लर प्रोजेक्ट बनने जा रहा है। 
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जिसकी मदद से राख उड़ने से रोकी जा सकेगी। ऐसा स्प्रिंक्लर प्रोजेक्ट अभी तक देश के किसी भी पावर हाउस में नहीं बना है। यह पहला प्रोजेक्ट है। अलीगढ़-मुरादाबाद नेशनल हाईवे पर ग्राम नगौला के सामने दो किमी के दायरे में पावर हाउस का एश ड्रम बना है। 
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140 हेक्टेयर में बने इस राख के पहाड़ में रोजाना लगभग 60 हजार टन राख पहुंचती है। पानी से इसको गीला रखा जाता है, लेकिन वसंत और पतझड़ के मौसम में तेज हवाएं चलने से यह जल्द सूखकर उड़ने लगती है। 
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इसके बाद पूरी गर्मी में यह समस्या रहती है। इसको उड़ने से रोकने के लिए एक बड़ा स्प्रिंक्लर सिस्टम बनाया जाएगा। इस सिस्टम से पानी का छिड़काव कर राख को उड़ने से रोका जाएगा।

इसके लिए एएमयू का सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट मॉडल बना रहा है। इसके लिए इलाहाबाद की एक तकनीकी कंपनी से भी बात हो रही है। यह कंपनी एएमयू के इंजीनियरों के साथ मिल कर इस मॉडल पर काम करेगी। इसके बाद निर्माण भी करेगी। महाकुंभ के बाद कंपनी यहां आकर काम शुरू कर देगी। इस प्रोजेक्ट के लिए सर्वे हो चुका है।

 

दस गांवों को मिलेगी धूल से निजात
एशड्रम का एरिया लगभग दो किमी की परिधि में है, जिससे आसपास के साढ़े छह किमी के दायरे में राख उड़ती है। इस राख से नगौला, रामपुर, छोटा जवां, बड़ा जवां, सुढियाल, सुमेरा, फरीदपुर, पल्ला कस्थली, कासिमपुर, चाऊपुर सहित दस गांवों के लगभग 30 हजार लोग परेशान रहते हैं। ग्रामीण दशकों से इसके समाधान की मांग कर रहे हैं।
 

पावर हाउस प्रबंधन राख को उड़ने से रोकने के लिए एक प्रोजेक्ट पर गंभीरता से काम कर रहा है। जल्द ही इसका एक मॉडल तैयार करा लिया जाएगा। इसके लिए एएमयू के सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट से तकनीकी मदद ली जा रही है। जल्द ही धरातल पर इसका काम शुरू होगा। -अतुल सक्सेना, मुख्य महाप्रबंधक, कासिमपुर पावर हाउस हरदुआगंज।

 

पावर हाउस के एश ड्रम के चारों ओर एक बड़ा स्प्रिंकलर सिस्टम बनाया जाएगा। इस सिस्टम से एशड्रम के चारों ओर फव्वारों से पानी का छिड़काव किया जाएगा। जिससे राख को उड़ने से रोका जाएगा। इंजीनियर इस पर काम कर रहे हैं। डिजाइन बनाने के लिए साइट सर्वे हुआ है। पूरे देश में अभी तक इस तरह का कोई मॉडल नहीं बना है। यह अपनी तरह का पहला प्रयोग होगा।-प्रो. इजहारुल हक फारूकी, चेयरमैन सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट, एएमयू।

70 से 80 हजार टन रोजाना पावर हाउस में बन जाती है राख 
इसके दो प्रकार होते हैं पहला फ्लाई एश और दूसरा ड्राई एश
ड्राई एश वहां से एश ड्रम में पहुंचती है, जहां इसे एकत्र किया जाता है
एश ड्रम लगभग 140 हेक्टेयर के क्षेत्र में है, जिसमें ए और बी दो भाग हैं
एश ड्रम से रोजाना एक हजार टन राख सीमेंट फैक्टरियों में जाती है
एश ड्रम से श्रीसीमेंट, वंडर और अल्ट्रा ट्रैक सीमेंट फैक्टरियां राख ले रहीं हैं
पावर हाउस से फ्लाई एश जेके और सुमंगलम सीमेंट सहित अन्य फर्म लेती हैं
 
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