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आंधी-बारिश व ओलावृष्टि की मार: फूल में भरा पानी, बौर बना बुरादा, मौसम ने तोड़े बागवान के अरमान

Tue, 07 Apr 2026 03:01 PM IST
Chaman Kumar Sharma नवीन शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़
नवीन शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Tue, 07 Apr 2026 03:01 PM IST
सार

पेड़ों पर बौर कम, जमीन पर बुरादा ज्यादा नजर आ रहा है और हर गिरे फूल के साथ बागवान की उम्मीद भी टूट रही है। बागवानों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से मौसम का मिजाज लगातार बिगड़ रहा है। पिछले साल आंधी में पेड़ टूटे थे, इस बार बौर ही नहीं बचा।

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impact of weather on gardening
जामुन और आम के बौर के बारे में बताते बागवान - फोटो : संवाद

विस्तार

साहब, इस बार तो फूल में ऐसा पानी भरा कि बौर बुरादा बनकर झड़ने लगा। गांव गनियावली के बागवान महावीर सिंह की ये बात सिर्फ एक किसान का दर्द नहीं, बल्कि पूरे इलाके के बागवानों की कहानी है। इस बार आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने आम और जामुन की फसल पर ऐसी मार की है कि पेड़ों पर आई उम्मीदें जमीन पर बिखर गईं। बागवानों के मुताबिक, आम के बौर को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। पहले बारिश ने उसे भिगोया, फिर तेज हवा ने उसे तोड़कर बुरादे की तरह गिरा दिया।

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अतरौली क्षेत्र में दशहरी, चौंसा, लंगड़ा और फजली आम के बाग बड़ी संख्या में हैं। करीब 18 दिन पहले पेड़ों पर बौर निकलना शुरू हुआ था और अच्छी पैदावार की उम्मीद थी। लेकिन पिछले 15 दिनों में बार-बार बदले मौसम ने पूरी तस्वीर बदल दी। महावीर सिंह बताते हैं कि उन्होंने इस बार 64 बीघा का बाग ठेके पर लिया था। जो बौर फल बन चुका था, वही बच पाया। बाकी सब झड़ गया। उनके मुताबिक, इस बार 40 से 50 फीसदी तक नुकसान हुआ है।
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जिले में करीब तीन हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में आम के बाग हैं। अतरौली क्षेत्र में आम के बाग अधिक हैं। इस बार 15 से 20 प्रतिशत नुकसान का अनुमान है। - सुनील कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।

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जामुन-आड़ू भी नहीं बचे
गांव बहराबाद के बागवान हिमांशु मित्तल बताते हैं कि सिर्फ आम ही नहीं, जामुन और आड़ू के पेड़ों पर भी असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि फूल ही टूटकर गिर गया, फल बनने का मौका ही नहीं मिला। जामुन में करीब 70 फीसदी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

तीन साल से लगातार मार
पेड़ों पर बौर कम, जमीन पर बुरादा ज्यादा नजर आ रहा है और हर गिरे फूल के साथ बागवान की उम्मीद भी टूट रही है। बागवानों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से मौसम का मिजाज लगातार बिगड़ रहा है। पिछले साल आंधी में पेड़ टूटे थे, इस बार बौर ही नहीं बचा। ऐसे में आम का सीजन शुरू होने से पहले ही कमाई पर संकट गहरा गया है।

क्यों बौर बन जाता है बुरादा?
आम के बौर (फूल) बहुत नाजुक होते हैं और मौसम में हल्का बदलाव भी इन्हें नुकसान पहुंचा सकता है। इस बार नुकसान के पीछे ये मुख्य कारण हैं।
1. बारिश से नमी का ज्यादा असर : फूलों पर लगातार नमी रहने से उनमें फंगस और सड़न शुरू हो जाती है। इससे बौर कमजोर होकर झड़ने लगता है।
2. तेज आंधी का झटका : जब बौर पूरी तरह विकसित नहीं होता, तब तेज हवा उसे टहनियों से तोड़ देती है। यही कारण है कि बौर बुरादे की तरह नीचे गिरा दिखता है।
3. तापमान में उतार-चढ़ाव : आम के बौर के लिए संतुलित तापमान जरूरी होता है। बार-बार मौसम बदलने से फूल टिक नहीं पाते और झड़ जाते हैं।
4. ओलावृष्टि का असर : ओले सीधे फूलों पर गिरते हैं, जिससे बौर टूटकर नष्ट हो जाता है और फल बनने की प्रक्रिया रुक जाती है।

एक नजर में नुकसान

  • आम के बौर में 40-50% तक नुकसान (बागवानों का दावा)
  • जामुन में 60-70% तक गिरावट की आशंका
  • अलीगढ़ में 3000 हेक्टेयर में आम के बाग
  • 15-20% नुकसान का सरकारी अनुमान
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