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दांव पर भाजपा की प्रतिष्ठा, खतरा रालोद से

Sun, 15 Sep 2019 01:15 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 15 Sep 2019 01:15 AM IST
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Iglas bypoll become BJP honours matter.
कौशल कुमार ओझा
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अलीगढ़। इगलास विधान सभा उपचुनाव से ऐन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस अंदाज में जन संवाद किया, उससे यह तो साफ है कि प्रत्याशी कोई भी हो चुनाव भाजपा लड़ेगी और प्रतिष्ठा भी दांव पर है। भाजपा सामने आने वाला खतरा भी भांप रही है, यह खतरा किसी और से नहीं, मिनी छपरौली कही जाने वाली सीट पर खतरा भी राष्ट्रीय लोकदल से है। इसलिए पार्टी कोई मौका छोड़ना नहीं चाहती। यही वजह है कि मुख्यमंत्री ने यहां मंच से जाटों के बीच इगलास के बगल के जाट राजपरिवार के राजा महेंद्र प्रताप के नाम पर अलीगढ़ में अगले बजट में राज्य विश्वविद्यालय बनाने की घोषणा की है। हालांकि रालोद भी इगलास में अपनी राजनीतिक विरासत बचाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए है। तीन महीने से रालोद के नेता यहां डेरा डाले हुए हैं। खुद छोटे चौधरी अजित और जयंत लगातार नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि यूपी विधानसभा में रालोद की सदस्य संख्या शून्य है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अलीगढ़ में राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर राज्य विश्वविद्यालय की स्थापना की घोषणा कर अप्रत्यक्ष रूप से रालोद की तीन महीने से इगलास में जमीन पर चल रही मेहनत पर पानी फेरने का प्रयास किया है। भाजपा की कोशिश है कि हर कीमत पर जाट मतदाताओं को अपने पाले में लाना है। इगलास विधान सभा जाट बहुल क्षेत्र हैं और सर्वाधिक संख्या उन्हीं की है। दूसरे स्थान पर अनुसूचित जाति हैं। ऐसे में सुरक्षित विधान सभा क्षेत्र इगलास में जाट मतदाता ही जीत-हार का फैसला करते हैं। यहीं कारण है कि कोई भी पार्टी टिकट वितरण में जाट मतदाताओं की पसंद या नापसंद का ख्याल रखती है। दूसरी वजह यह भी है कि 2017 में सीट भाजपा के खाते में थी। इसलिए इस बार भी सीट रिपीट हो। यहां अगर चौ.राजेंद्र सिंह को छोड़ दें तो लगातार कोई विधायक नहीं बना है। विजेंद्र सिंह जरूर तीन बार विधायक बने, मगर वह भी बीच-बीच में चुनाव हारे हैं।
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राजनीतिक जानकार भी यह बात जानते हैं कि इगलास सीट पर लंबे समय से चौ.चरण सिंह, उनके बाद चौ.अजित सिंह व रालोद का प्रभाव है। इस विधान सभा क्षेत्र में चौधरी परिवार की पकड़ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चौधरी चरण सिंह की पत्नी व चौधरी अजित सिंह की माता गायत्री देवी, चौधरी अजित सिंह की बहन ज्ञानवती भी विधायक रह चुकी हैं। राजेंद्र सिंह को चौधरी चरण सिंह यहां से लड़ाते थे, जो चार बार विधायक निर्वाचित हुए। इसके अतिरिक्त रालोद की विमलेश चौधरी एवं त्रिलोकीनाथ दिवाकर भी इगलास का नेतृत्व विधान सभा में कर चुके हैं। सूत्रों पर भरोसा करें तो रालोद के शीर्ष नेता सपा एवं कुछ अन्य दलों के संपर्क में हैं। हो सकता है कि चुनाव के पहले किसी तरह का गठबंधन भी हो जाए। लेकिन इससे पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना का एलान कर रालोद का खेल बिगाड़ने की कोशिश की है। अब देखना दिलचस्प होगा कि रालोद का विधान सभा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का सपना साकार होता है या नहीं।
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