{"_id":"5f4d5e858ebc3e7133782b94","slug":"if-we-get-the-convenience-we-will-beat-china-city-office-news-ali242617072","type":"story","status":"publish","title_hn":"अलीगढ़ : सहूलियत मिलें तो चीन को पछाड़ देंगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अलीगढ़ : सहूलियत मिलें तो चीन को पछाड़ देंगे
विज्ञापन
मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खिलौनों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने को कहा था। इस बात को सुन कर अलीगढ़ के खिलौना कारोबारियों की उम्मीदों को मानों पंख लग गए हों। उद्यमियों का कहना है कि यदि सरकार साधन और सहूलियत दे तो वह चीन को पछाड़ कर नंबर एक बन सकते हैं। अनुमानित तौर पर यहां 70 से 80 करोड़ का सालाना खिलौना पिस्टल का कारोबार है।
यहां के खिलौना पिस्टल उद्योग का इतिहास करीब 65-70 साल पुराना है। यहां के ईगल और बुलेट जैसे कुछ ब्रांड तो देश के कोने-कोने में अलीगढ़ के हुनर को पहचान दिलाते हैं। चीन से चुनौती मिलने के बावजूद यहां के उत्पादक नहीं डिगे और आयरन सीट के बदले प्लास्टिक के तमंचे बनाकर उनका मुकाबला किया। दीपावली पर बच्चे अलीगढ़ के इन खिलौना तमंचों को चलाते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में खिलौनों पर फोकस किया है। इसका मतलब यह है कि सरकार की निगाह खिलौना उद्योग की तरफ है और इसे बढ़ाने की कोशिश होगी। देश में करीब 20 करोड़ बच्चे होंगे और कई सौ करोड़ का खिलौना कारोबार होगा। प्रधानमंत्री हमें साधन दे सकते हैं। सकारात्मक सोच के साथ तो आगे हमें ही बढ़ना है और हम बढ़ेंगे।
विज्ञापन
- सुनील पॉली, खिलौना पिस्टल निर्माता
हम लोग परंपरागत तरीके से खिलौना पिस्टल बना रहे। तकनीक और मशीन के लिए दिल्ली या दूसरे शहरों पर निर्भर है। पार्ट्स खराब होने पर बाहर जाना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर कोई सहायता नहीं मिलती। निर्यात व व्यापार के बढ़ोतरी के लिए सरकारी स्तर पर कोई सेमिनार आदि नहीं होते। तकनीकी साधन व सहायता मिले तो हम चीन को पीछे छोड़ देंगे।
- मधुर राठी, खिलौना पिस्टल निर्माता
प्रधानमंत्री के मन की बात सुनकर बहुत खुशी हुई है। अलीगढ़ का खिलौना पिस्टल कारोबार पूरे देश में फैला है। यहां के उद्यमी चीन के सामने कभी घुटने नहीं टेके। वक्त के साथ उद्योग में बदलाव लाए और डटकर मुकाबला किया। चीनी प्रभुत्व बढ़ने के बावजूद देश के कोने-कोने में यहां के पिस्टल की मांग बनी हुई है। चीन पर प्रतिबंध लग जाए तो खिलौना उद्योग को लाभ होगा।
- सोमंक आरएलवी
विज्ञापन
यहां के खिलौना पिस्टल उद्योग का इतिहास करीब 65-70 साल पुराना है। यहां के ईगल और बुलेट जैसे कुछ ब्रांड तो देश के कोने-कोने में अलीगढ़ के हुनर को पहचान दिलाते हैं। चीन से चुनौती मिलने के बावजूद यहां के उत्पादक नहीं डिगे और आयरन सीट के बदले प्लास्टिक के तमंचे बनाकर उनका मुकाबला किया। दीपावली पर बच्चे अलीगढ़ के इन खिलौना तमंचों को चलाते हैं।
विज्ञापन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में खिलौनों पर फोकस किया है। इसका मतलब यह है कि सरकार की निगाह खिलौना उद्योग की तरफ है और इसे बढ़ाने की कोशिश होगी। देश में करीब 20 करोड़ बच्चे होंगे और कई सौ करोड़ का खिलौना कारोबार होगा। प्रधानमंत्री हमें साधन दे सकते हैं। सकारात्मक सोच के साथ तो आगे हमें ही बढ़ना है और हम बढ़ेंगे।
विज्ञापन
- सुनील पॉली, खिलौना पिस्टल निर्माता
हम लोग परंपरागत तरीके से खिलौना पिस्टल बना रहे। तकनीक और मशीन के लिए दिल्ली या दूसरे शहरों पर निर्भर है। पार्ट्स खराब होने पर बाहर जाना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर कोई सहायता नहीं मिलती। निर्यात व व्यापार के बढ़ोतरी के लिए सरकारी स्तर पर कोई सेमिनार आदि नहीं होते। तकनीकी साधन व सहायता मिले तो हम चीन को पीछे छोड़ देंगे।
- मधुर राठी, खिलौना पिस्टल निर्माता
प्रधानमंत्री के मन की बात सुनकर बहुत खुशी हुई है। अलीगढ़ का खिलौना पिस्टल कारोबार पूरे देश में फैला है। यहां के उद्यमी चीन के सामने कभी घुटने नहीं टेके। वक्त के साथ उद्योग में बदलाव लाए और डटकर मुकाबला किया। चीनी प्रभुत्व बढ़ने के बावजूद देश के कोने-कोने में यहां के पिस्टल की मांग बनी हुई है। चीन पर प्रतिबंध लग जाए तो खिलौना उद्योग को लाभ होगा।
- सोमंक आरएलवी