Vaastu Shastra: घर हो या दुकान, वास्तु दोष करता है परेशान, कहां-क्या रख कर करें निराकरण, बता रहे पंडित जी
यह कैसे जानें कि आपके घर या दुकान में वास्तु दोष है या नहीं, अगर है तो कैसे उसका निराकरण हो, कहां पर कौनसी चीज रखना उचित है, बता रहे हैं ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा ...
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रहने के लिए घर हो या व्यवसाय करने के लिए कोई दुकान, वहां अगर वास्तु दोष है तो उसका हमारे जीवन पर नकारात्मक असर पड़ता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार यह कैसे जानें कि आपके घर या दुकान में वास्तु दोष है या नहीं, अगर है तो कैसे उसका निराकरण हो, कहां पर कौनसी चीज रखना उचित है, इन्हीं सभी सवालों के जवाब ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा ने दिए।
कैसे पहचानें वास्तु दोष है या नहीं
ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि जहां वास्तु दोष होता है, वहां तरक्की रुक जाती है। वहां पर बीमारी का घर बना रहता है। शादी-संतान के काम में दिक्कत बनी रहती हैं। वहां लड़ाई-झगड़ा बना रहता है। परिवार में वंश वृद्धी नहीं होती है।
ऐसे करें वास्तु दोष का उपाय
उन्होंने बताया कि मछलियों को चलते हुए पानी, तालाब नहर में छोड़ना, कुत्ते-चीटियों को भोजन देना, कन्याओं की शादी, पढ़ाई-लिखाई में दान, जानवर-पशु ,पक्षियों की सेवा, सूरज को जल देना तर्पण करना आदि करने से वास्तु दोष में लाभ होता है।
घर-मकान का मुख्य दरवाजा किस दिशा में कैसा हो
उन्होंने बताया कि घर का मुख्य द्वार पूर्व में है तो उसका रंग नारंगी या सुनहरा होना चाहिए। घर का मुख्य दरवाज़ा कभी भी दक्षिण दिशा में होना ही नहीं चाहिए।
आपके घर का मुख्य दरवाज़ा उत्तर दिशा में है तो उसका रंग नीला या आसमानी नीला होना चाहिए। घर का मुख्य दरवाज़ा पश्चिम में खुलता है तो उसका रंग सफेद या हल्का पीला होना चाहिए।
सीढ़ियों को लेकर ये ध्यान दें
ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि सीढ़ियों की दिशा दक्षिण, पश्चिम या नैऋत्य कोण की दिशा में हो। सीढ़ियां हमेशा विषम संख्या में हों। जैसे 3, 5, 7, 9, 11, 13, 15, 17, 23, 29 आदि में हो। सामान्यत: घर में 17 सीढ़ियां शुभ मानी जाती हैं। सीढि़यों के नीचे स्टोर या स्विच रूम बनाया जा सकता है। दुकान, टॉयलेट, बाथरूम, लेटने का पलंग या बैठने का आसन नहीं होना चाहिए। सीढ़ियां कभी भी घर, मकान या दुकान के बीचों-बीच या ब्रह्मा स्थान में नहीं होनी चाहिए।
घर में पूजा स्थल
उन्होंने बताया कि घर के ईशान में मंदिर बनाना चाहिए। इस दिशा में शिवजी की मूर्ति या शिवलिंग स्थापित करना सबसे ज्यादा शुभ है। मंदिर का द्वार पूर्व या दक्षिण में होना चाहिए। घर में शिवजी की प्राण प्रतिष्ठा कभी नहीं करवानी चाहिए। चित्र या मूर्तियां रख सकते हैं।