Lok Adalat: नौ मिनट में दूर कराई मियां-बीवी की 19 साल पुरानी लड़ाई, 65 की महिला व 75 के बुजुर्ग का झगड़ा खत्म
अलीगढ़ में लगी लोक अदालत के दौरान 65 वर्ष की महिला व 75 वर्ष के बुजुर्ग भी अपना मामला लेकर पहुंचे। लोक अदालत के माध्यम से दोनों बुजुर्गों के बीच झगड़े को खत्म करा दिया गया। दोनों खुशी-खुशी साथ चले गए।
विस्तार
19 साल से मियां-बीबी के बीच मनमुटाव था। दोनों एक दूसरे के साथ रहने को तैयार नहीं थे। परिवार न्यायालय में भी 2006 से वाद चल रहा था। 10 मई को दोनों अलीगढ़ में लगी लोक अदालत में पहुंचे। न्यायिक अफसरों ने दोनों को बैठाकर समझाया। मुश्किल से 9 मिनट लगे होंगे और दोनों साथ-साथ रहने को राजी हो गए। इस तरह से कई जोड़े पहुंचे थे जो वर्षों से अलग रह रहे थे लेकिन यहां से फिर से साथ रहने को घर के लिए रवाना हो गए।
विधिक सेवा प्राधिकरण की इस वर्ष की दूसरी लोक अदालत में 10 मई को दीवानी परिसर में मेले सरीखा नजारा रहा। इस लोक अदालत में कुल 106263 वादों का सुलह समझौते व प्रीलिटिगेशन के तहत निस्तारण किया गया। साथ में 24 करोड़ 4 लाख 56 हजार 323 रुपये की राशि जुर्माना व प्रतिकर के तौर पर निर्धारित की गई। सभी न्यायालयों में सुलह समझौते के आधार पर 32703 वादों का निस्तारण कर 10 करोड़ 4 लाख 78 हजार 393.23 रुपये जुर्माना वसूला गया। वहीं बैंक व प्रशासन द्वारा प्री-लिटिगेशन के माध्यम से 73450 वादों का निस्तारण कर 139978210 रुपये प्रतिकर राशि तय की गई।
वहीं स्थायी लोक अदालत द्वारा 24 वाद का निस्तारण कर 2626000 रुपये धनराशि तय की गई। वहीं उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वारा 6 वाद का निस्तारण कर 1372682 रुपये धनराशि तय की गयी। प्री-लिटिगेशन वैवाहिक वाद में 110 वादों का निस्तारण किया गया व 13 जोड़े साथ-साथ गए। परिवार न्यायालय द्वारा 34 जोड़े को साथ-साथ उनके घर भेजा गया। इससे पहले जिला जज अनुपम कुमार, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय रणधीर सिंह, वाणिज्यिक न्यायालय के पीठासीन अधिकारी विवेक त्रिपाठी, एमएसीटी के पीठासीन अधिकारी जय सिंह पुण्ढीर व सचिव विधिक सेवा प्राधिकरण नितिन श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से लोक अदालत का शुभारंभ किया। जिला जज संजीव कुमार ने कहा कि लोक अदालत में आपसी समझौते के आधार पर मामलों का निपटारा होता है। यह ऐसा प्लेटफार्म है, जहां समझौते के आधार पर दोनों पक्ष विजयी होते हैं। प्राधिकरण सचिव नितिन श्रीवास्तव ने सभी का आभार व्यक्त किया।
ये था 19 वर्ष पुराना विवाद
अधिवक्ता काउंसलर योगेश सारस्वत के अनुसार परिवार न्यायालय में दंपती विवाद के चलते 2006 से महिला ने अपने व नाबालिग पुत्री के लिए भरण पोषण वाद दायर किया था। जिसमें 2007 में आदेश के बाद भी आज तक कोई भरण पोषण नहीं दिया। आरोप था कि अकराबाद क्षेत्र की महिला की शादी 2003 में बन्नादेवी के व्यक्ति से हुई थी। मगर दहेज के लिए उसे निकाल दिया गया। मामले में अदालत के आदेश पर 2008 में रिकवरी वारंट भी जारी हुआ। मगर भरण पोषण नहीं दिया। एक अन्य मामले में 65 वर्ष की महिला व 75 वर्ष के बुजुर्ग के बीच सुलह कराकर साथ भेजा गया। इन दोनों पर चार पुत्र व तीन पुत्रियां हैं।
ये रहे मौजूद
दि अलीगढ़ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेन्द्र कुमार सिंह, सचिव दीपक बंसल, दि सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद कुमार सक्सेना, एडीजे हरविन्द्र सिंह, सुभाष चन्द्रा, राकेश वशिष्ठ, संजय कुमार यादव, अभिषेक कुमार बागडिय़ा, पारुल अत्री, रवीश कुमार अत्री, नवल किशोर सिंह, प्रदीप कुमार जयंत, प्रदीप कुमार राम, अनिल कुमार, विनय तिवारी, अमित कुमार तिवारी, अंजू राजपूत, ललिता गुप्ता, ज्ञानेन्द्र सिंह-द्वितीय, रचना, सीजेएम शिवम कुमार के अलावा अन्य न्यायिक अधिकारियों में अशोक कुमार सिंह, नेहा रूंगटा, संगीता, गजेन्द्र सिंह, कृति सिह, शिवांक सिंह, राशि तोमर, गंधर्व पटेल, अखिलेश कुमार निज़वान, रजत सिंह यादव, सौम्या मिश्रा, विधि सिघंल, सौरभ मंडलोई, यशस्वी सिंह, ज्योति वर्मा, विजय चैधरी, महिमा सिंह, मोहित नरवाल, आशुतोष वर्मा, आशीष सिंह, रईस अहमद, राम किशन शर्मा, प्रेम नारायन कुलश्रेष्ठ आदि थे। परिवार न्यायालय के काउंसलर योगेश सारस्वत, योगेश शंकर भारद्वाज, अनीता गर्ग, यतेंद्र कुमार, मीडिएटर योगेंद्र उपाध्याय, नरेंद्र कुमार, शबनम फातिमा, सुमन वर्मा भी उपस्थित रहे। इसी न्यायालय में प्रमोद कुमार कुलश्रेष्ठ, विनोद कुमार, अतेना कुमार, यशपाल, देवेंद्र, आदर्श, राजेंद्र त्यागी आदि थे।