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एएमयू बवालः जांच टीम का सवाल, वाकई बर्बरता हुई या कुछ तोड़ मरोड़कर पेश किया गया
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प्रॉक्टर टीम से पुछताछ करतीडीआईजी मंजिल सैनी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ।
- फोटो : CITY OFFICE
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आईपीएस मंजिल सैनी के नेतृत्व में आई मानवाधिकार आयोग की जांच टीम के सवालों की फेहरिस्त लंबी है। टीम खोज रही है कि याचिकाकर्ता ने जो आरोप याचिका में पुलिस बर्बरता को लेकर लगाए हैं, वे सही हैं या फिर कुछ तोड़ मरोड़ का पेश किया गया है। इसी सच्चाई को जानने के लिए सवालों की फेहरिस्त बनाई गई है और जांच टीम ने यहां आकर पांच दिन के लिए डेरा जमा लिया है। सबसे बड़ी बात 15 दिसंबर की रात पुलिस द्वारा बाब-ए-सैयद का जाली वाला गेट तोड़कर अंदर घुसने और बर्बरता करने का आरोप याचिका में लगाया है। इस सवाल पर सबसे पहले काम शुरू किया गया है कि आखिर गेट किसने तोड़ा, क्योंकि पुलिस ने हाईकोर्ट में दाखिल काउंटर एफिडेविट में यह साक्ष्य दिए हैं कि गेट छात्रों की ओर से तोड़ा गया। इसके साथ सबूत के रूप में सीसीटीवी फुटेज लगाए गए हैं। जांच टीम अब उन्हीं फुटेजों को अपने स्तर से संकलित करने का काम कर रही है। ताकि यह भी साफ हो सके कि पुलिस ने उन फुटेज से कोई छेड़छाड़ नहीं की।
जांच टीम का कहना है कि याचिका में पुलिस पर लगे आरोपों में सही गलत का पता करना है। इसके तहत गेट तोड़ने से लेकर पुलिस बर्बरता, हॉलों में टीयर गैस सेल फेंकना, प्रापर्टी नुकसान पहुंचाना आदि की सच्चाई जानना प्रमुख है। इस दौरान वह प्राक्टोरियल बोर्ड से मिलीं तो उन्होंने पूछा कि शुरुआत कैसे हुई। इस बवाल में कितने छात्र जख्मी हुए। उनके नाम पते व बयान कैसे मिलेंगे। वहीं गिरफ्तार छात्रों की संख्या भी पूछी गई। यह भी पूछा गया कि कहां कहां क्या क्या नुकसान हुआ है। इस दौरान मोरिसन कोर्ट हॉस्टल व आफताब हॉल में क्या क्या हुआ था, यह भी टीम का सवाल है। घायल अब कहां हैं, कितने भरती हैं। जो घरों को चले गए, उनकी क्या हालत है, यह सब टीम के सवाल हैं।
इन प्रक्रियाओं में गुजरा टीम का पहला दिन
दोपहर में आने के बाद जांच टीम ने कैंपस पहुंचकर एएमयू के अधिकारियों से वार्ता कर दिन भर में कुल 16 लोगों के बयान दर्ज किए। वहीं एएमयू इंतजामिया से घायलों की सूची ली। कुछ शेष घायलों की सूची मंगलवार को मिलने की उम्मीद है। इसके बाद शाम को सर्किट हाउस में पुलिस अधिकारियों से भी काफी देर तक चर्चा हुई।
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अभी इस दिशा में भी काम किया जाएगा
जांच टीम ने घायल छात्रों, पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों, प्रदर्शन में शामिल लोगों, धरने में शामिल छात्रों आदि से मिलना तय किया है। इसके बाद सबसे आखिर में पुलिस प्रशासनिक स्तर से उनके द्वारा दिए गए साक्ष्यों को लेकर मीटिंग होगी। फिर यह जांच टीम फेक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट आयोग को पेश करेगी और आयोग उस रिपोर्ट को हाईकोर्ट के समक्ष रखेगा।
जांच टीम के आने से पहले पुलिस ने किया होमवर्क
जांच टीम के आने की खबर पहले से ही पुलिस के पास थी। कई दिन से पुलिस स्तर से तैयारियां की जा रही थीं। वहीं सुबह से ही पूरी पुलिस टीम ने एक बार फिर होमवर्क कर तथ्यों को दोहराया। साथ में पुलिस द्वारा जो साक्ष्य टीम के समक्ष रखे जाने हैं, उन पर काम हुआ।
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जांच टीम का कहना है कि याचिका में पुलिस पर लगे आरोपों में सही गलत का पता करना है। इसके तहत गेट तोड़ने से लेकर पुलिस बर्बरता, हॉलों में टीयर गैस सेल फेंकना, प्रापर्टी नुकसान पहुंचाना आदि की सच्चाई जानना प्रमुख है। इस दौरान वह प्राक्टोरियल बोर्ड से मिलीं तो उन्होंने पूछा कि शुरुआत कैसे हुई। इस बवाल में कितने छात्र जख्मी हुए। उनके नाम पते व बयान कैसे मिलेंगे। वहीं गिरफ्तार छात्रों की संख्या भी पूछी गई। यह भी पूछा गया कि कहां कहां क्या क्या नुकसान हुआ है। इस दौरान मोरिसन कोर्ट हॉस्टल व आफताब हॉल में क्या क्या हुआ था, यह भी टीम का सवाल है। घायल अब कहां हैं, कितने भरती हैं। जो घरों को चले गए, उनकी क्या हालत है, यह सब टीम के सवाल हैं।
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इन प्रक्रियाओं में गुजरा टीम का पहला दिन
दोपहर में आने के बाद जांच टीम ने कैंपस पहुंचकर एएमयू के अधिकारियों से वार्ता कर दिन भर में कुल 16 लोगों के बयान दर्ज किए। वहीं एएमयू इंतजामिया से घायलों की सूची ली। कुछ शेष घायलों की सूची मंगलवार को मिलने की उम्मीद है। इसके बाद शाम को सर्किट हाउस में पुलिस अधिकारियों से भी काफी देर तक चर्चा हुई।
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अभी इस दिशा में भी काम किया जाएगा
जांच टीम ने घायल छात्रों, पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों, प्रदर्शन में शामिल लोगों, धरने में शामिल छात्रों आदि से मिलना तय किया है। इसके बाद सबसे आखिर में पुलिस प्रशासनिक स्तर से उनके द्वारा दिए गए साक्ष्यों को लेकर मीटिंग होगी। फिर यह जांच टीम फेक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट आयोग को पेश करेगी और आयोग उस रिपोर्ट को हाईकोर्ट के समक्ष रखेगा।
जांच टीम के आने से पहले पुलिस ने किया होमवर्क
जांच टीम के आने की खबर पहले से ही पुलिस के पास थी। कई दिन से पुलिस स्तर से तैयारियां की जा रही थीं। वहीं सुबह से ही पूरी पुलिस टीम ने एक बार फिर होमवर्क कर तथ्यों को दोहराया। साथ में पुलिस द्वारा जो साक्ष्य टीम के समक्ष रखे जाने हैं, उन पर काम हुआ।

एएमयूः निरीक्षण करतीं डीआईजी मंजिल सैनी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग साथ में प्रॉक्टर टीम ।- फोटो : CITY OFFICE