फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   History-sheeter Ballu became a child abuser for relief from life imprisonment, got a shock

Aligarh News: उम्रकैद से राहत के लिए हिस्ट्रीशीटर बल्लू बना बाल अपचारी, लगा झटका

Thu, 20 Jul 2023 01:10 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 20 Jul 2023 01:10 AM IST
विज्ञापन
History-sheeter Ballu became a child abuser for relief from life imprisonment, got a shock
हाथरस जनपद के सिकंदराराऊ क्षेत्र के गांव अख्तयारपुर मऊ के हिस्ट्रीशीटर बल्लू ने उम्रकैद की सजा से राहत पाने के लिए बाल अपचारी साबित करने की कोशिश की। जमानत पाने के लिए उसने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर घटना के समय खुद को बाल अपचारी बताया।
विज्ञापन




इस अपील पर हुए जांच आदेश के बाद साक्ष्यों के आधार पर किशोर न्याय बोर्ड ने उसे बाल अपचारी घोषित कर दिया। मगर अपर सत्र न्यायालय विशेष पॉक्सो सुरेंद्र मोहन सहाय की अदालत ने साक्ष्यों व दलीलों के आधार पर बल्लू को बाल अपचारी नहीं माना है। किशोर न्याय बोर्ड के फैसले को अपास्त कर दिया है। इससे बल्लू के राहत पाने की कोशिशों को झटका लगा है।
विज्ञापन






ये है घटनाक्रम

उस समय अलीगढ़ जनपद का हिस्सा रहे सिकंदराराऊ क्षेत्र के गांव अख्तयारपुर निवासी सतीश चंद्र शर्मा की 12 अप्रैल 1994 को मंदिर पर पूजा करते समय हत्या कर घर में डकैती को अंजाम दिया गया था। घटना में गांव के अपराधी बल्लू आदि के नाम उजागर हुए। 1996 में बल्लू आदि को उम्रकैद की सजा हुई। इसके बाद आरोपी हाईकोर्ट गए, जहां से 2020 में उनकी सजा बरकरार रही। बता दें कि सतीश शर्मा के छोटे भाई कमलेश कुमार शर्मा बड़े ग्रुप में सेवारत थे और कवि नगर, गाजियाबाद में रहते हैं। वह इस मुकदमे के वादी हैं और लगातार पैरोकारी कर रहे हैं। कमलेश कुमार शर्मा की पत्नी आशा शर्मा गाजियाबाद की पूर्व मेयर हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन







सुप्रीम कोर्ट में बाल अपचारी दर्शाकर की अपील

अलीगढ़ सत्र न्यायालय और हाईकोर्ट से उम्रकैद की सजा बरकरार रहने के बाद वर्ष 2021 में बल्लू की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जमानत अर्जी दायर की गई, जिसमें खुद को घटना के समय बाल अपचारी बताते हुए अपना नाम भूपेंद्र शर्मा उर्फ बल्लू बताया और साक्ष्य के तौर पर वर्ष 1990 में दसवीं पास की अंकतालिका दिखाई, जिसमें जन्म तिथि 16 जुलाई 1976 दिखाते हुए घटना के समय खुद को 17 वर्ष 8 माह 26 दिन का दर्शाया। ऐसा दिखाने के पीछे बल्लू की मंशा बाल अपचारी साबित होने पर उम्रकैद से राहत पाने की रही होगी। इस अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने किशोर न्याय बोर्ड को भूपेंद्र शर्मा उर्फ बल्लू के मामले की जांच के आदेश दिए। किशोर न्याय बोर्ड ने स्कूली दस्तावेज व पेश किए गए आधार कार्ड, पैनकार्ड, वोटर कार्ड आदि के आधार पर 31 जनवरी 2023 को उसे बाल अपचारी घोषित कर दिया।







एडीजे कोर्ट में साबित न हो सके उसके साक्ष्य

वादी कमलेश कुमार शर्मा ने अधिवक्ता अनूप कौशिक के जरिये किशोर न्याय बोर्ड के फैसले के खिलाफ एडीजे विशेष पॉक्सो सुरेंद्र मोहन सहाय की अदालत में अपील दायर की। साक्ष्यों के साथ यह साबित करने का प्रयास किया गया कि जिस वर्ष 1990 की अंकतालिका में बल्लू को भूपेंद्र उर्फ बल्लू बताया है। वह भूपेंद्र है ही नहीं। बल्कि किसी अन्य का नाम इसने अपने नाम के आगे जोड़ा है। अधिवक्ता ने साक्ष्यों व दलीलों से बताया कि अगर 1990 की अंकतालिका को सही माना जाए तो बल्लू की उम्र दसवीं करते समय 14 वर्ष भी नहीं हो रही। उसकी अंकतालिका में नाम उर्फ बल्लू क्यों नहीं है, जबकि आधार, पैन में उर्फ बल्लू क्यों है। वैसे उर्फ नाम इन दस्तावेजों में अंकित नहीं होता है। वोटर लिस्ट में सिर्फ भूपेंद्र क्यों है। बेसिक स्कूल के समय के किसी दस्तावेज पर फोटो साक्ष्य नहीं है। अगर यह नाबालिग था तो पुलिस ने जब उसकी हिस्ट्रीशीट बल्लू के नाम से खोली तो उसकी उम्र बीस वर्ष अंकित की। हिस्ट्रीशीट के अनुसार, उस पर कुल 26 मुकदमे हैं। किसी अन्य मुकदमे की पैरोकारी के समय उसे भूपेंद्र उर्फ बल्लू क्यों नहीं बताया या दर्शाया गया। कपसिया जूनियर स्कूल से 2022 में जारी टीसी में उसकी कक्षा छह में प्रवेश तारीख 1985 दर्ज है और 1987 में उसे आठवीं उत्तीर्ण दर्शाया गया है। मात्र दो वर्ष में ये कैसे संभव है। मेडिकल बोर्ड ने किशोर न्याय बोर्ड के आदेश पर उम्र का सत्यापन किया, जिसमें मौजूदा उम्र 49 वर्ष और घटना के समय उम्र 20 वर्ष होने का अनुमान लगाया है। पुलिस ने पीड़ित पक्ष के बयान नहीं लिए, बस उसके गांव व परिवार के बयान लेकर रिपोर्ट दी। जो उसके डर में समर्थन में बोल सकते हैं। अधिवक्ता के अनुसार, इन तमाम साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने इसे बाल अपचारी न मानते हुए किशोर न्याय बोर्ड का आदेश अपास्त किया है। साथ में यह भी कहा है कि न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग के उद्देश्य से कूटरचित दस्तावेज तैयार किए हैं। यह भूपेंद्र कोई और है, जबकि यह व्यक्ति बल्लू ही है। इस आदेश के बाद पीड़ित पक्ष ने राहत महसूस की है।







ये है बैंक लूट के पेशेवर बल्लू का आपराधिक रिकार्ड

अलीगढ़। अधिवक्ता अनूप कौशिक व पीड़ित केके शर्मा के अनुसार, सिकंदराराऊ पुलिस के रिकार्ड के अनुसार बल्लू पर वर्ष 1994 से 2021 तक कुल 26 अपराध हाथरस, अलीगढ़, बुलंदशहर, मथुरा गाजियाबाद आदि में दर्ज हुए, जिनमें बैंक लूट, हत्या, लूट आदि के संगीन अपराध हैं। वर्ष 1997 में हाथरस के सादाबाद में बैंक डकैती के दौरान गार्ड की हत्या कर यह गैंग भागा था। तत्कालीन एसपी तिलोत्तमा वर्मा ने दो बदमाशों को मुठभेड़ में मार गिराया था और बल्लू पकड़ा गया था। जमानत पर आने के बाद केके शर्मा पर भी हमला किया गया। एक बार पेशी से लौटते समय गभाना से पुलिस अभिरक्षा से भी यह भागा था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed