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आज टाइम कैप्सूल में दफन होगा एएमयू का इतिहास
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गणतंत्र दिवस के अवसर पर आज अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के विक्टोरिया गेट के सामने जमीन के अंदर टाइम कैप्सूल दफन किया जाएगा। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह के अंतर्गत चल रहे कार्यक्रमों में यह भी एक कार्यक्रम शामिल था। इसके लिए बाकायदा एक कमेटी का गठन किया गया था। जिसने टाइम कैप्सूल के निर्माण और इसमें रखी जाने वाली सामग्री के संबंध में व्यापक अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट तैयार की। ये कार्य कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर की निगरानी में हुआ।
इस टाइम कैप्सूल में 1875 में मदरसा शुरू होने से लेकर बाद में कॉलेज और विश्वविद्यालय से लेकर 2020 तक के पूरे सफर का विवरण रखा गया है। इसमें विश्वविद्यालय में अब तक कौन-कौन कुलपति हुए विश्वविद्यालय के सभी दीक्षांत समारोह का ब्योरा, मुख्य घटनाओं की जानकारी, सभी पद्म पुरस्कार प्राप्त महान व्यक्तियों का विवरण, राष्ट्र के प्रमुखों का संबोधन, विश्वविद्यालय की उपलब्धियां, संग्रहालय आदि सभी का विवरण प्रिंटेड फॉर्म में रखा गया है।
इस कैप्सूल को 30 फीट जमीन की गहराई में रखा जाएगा। कैप्सूल को टाइटेनियम मिश्रित धातु से तैयार किया गया है, जो पांच शताब्दियों तक खराब नहीं होगी। इस टाइम कैप्सूल में विश्वविद्यालय की सभी फैकल्टियों, वर्तमान में शिक्षा प्रणाली और अब तक के प्राप्त किए गए ज्ञान को भी रखा गया है, जिससे आने वाली पीढ़ी यह जान सकेगी कि पांच शताब्दी पहले किस प्रकार छात्रों को अध्ययन कराया जाता था। टाइम कैप्सूल दफन किए जाने का कार्यक्रम कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर द्वारा ऑनलाइन संचालित किया जाएगा। कार्यक्रम सुबह 11 बजे शुरू होगा। कार्यक्रम से पहले विश्वविद्यालय में परंपरागत रूप से होने वाली कुरान ख्वानी का आयोजन किया जाएगा। टाइम कैप्सूल कमेटी के सदस्य डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि यह एक ऐतिहासिक मौका है। हम आने वाली पीढ़ी के लिए एक बहुत बड़ी धरोहर संजोकर रखने जा रहे हैं।
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इस टाइम कैप्सूल में 1875 में मदरसा शुरू होने से लेकर बाद में कॉलेज और विश्वविद्यालय से लेकर 2020 तक के पूरे सफर का विवरण रखा गया है। इसमें विश्वविद्यालय में अब तक कौन-कौन कुलपति हुए विश्वविद्यालय के सभी दीक्षांत समारोह का ब्योरा, मुख्य घटनाओं की जानकारी, सभी पद्म पुरस्कार प्राप्त महान व्यक्तियों का विवरण, राष्ट्र के प्रमुखों का संबोधन, विश्वविद्यालय की उपलब्धियां, संग्रहालय आदि सभी का विवरण प्रिंटेड फॉर्म में रखा गया है।
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इस कैप्सूल को 30 फीट जमीन की गहराई में रखा जाएगा। कैप्सूल को टाइटेनियम मिश्रित धातु से तैयार किया गया है, जो पांच शताब्दियों तक खराब नहीं होगी। इस टाइम कैप्सूल में विश्वविद्यालय की सभी फैकल्टियों, वर्तमान में शिक्षा प्रणाली और अब तक के प्राप्त किए गए ज्ञान को भी रखा गया है, जिससे आने वाली पीढ़ी यह जान सकेगी कि पांच शताब्दी पहले किस प्रकार छात्रों को अध्ययन कराया जाता था। टाइम कैप्सूल दफन किए जाने का कार्यक्रम कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर द्वारा ऑनलाइन संचालित किया जाएगा। कार्यक्रम सुबह 11 बजे शुरू होगा। कार्यक्रम से पहले विश्वविद्यालय में परंपरागत रूप से होने वाली कुरान ख्वानी का आयोजन किया जाएगा। टाइम कैप्सूल कमेटी के सदस्य डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि यह एक ऐतिहासिक मौका है। हम आने वाली पीढ़ी के लिए एक बहुत बड़ी धरोहर संजोकर रखने जा रहे हैं।
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