{"_id":"591bee1675240abb4c5c8978b9cf264f","slug":"history-can-not-be-changed-by-changing-the-name-of-aurangzeb-road-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"औरंगजेब मार्ग का नाम बदलने से इतिहास नहीं बदला जा सकता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
औरंगजेब मार्ग का नाम बदलने से इतिहास नहीं बदला जा सकता
अमर उजाला ब्यूरो/अलीगढ़
Updated Fri, 11 Dec 2015 01:32 AM IST
विज्ञापन
प्रख्यात लेखिका एवं नेहरू गांधी परिवार की सदस्या नयनतारा सहगल ने कहा कि दिल्ली के औरंगजेब मार्ग का नाम बदलने से भारतीय इतिहास नहीं बदला जा सकता।
देश में चरमपंथी विविधता में एकता की विचारधारा को खंडित करने में लगे हैं। जिस प्रकार 1947 में विभाजन के समय देश के अमनपसंद नागरिकों ने हिंदू राष्ट्र की मांग ठुकरा दी था।
एक बार फिर भारत की जनता इसे अस्वीकार कर देगी। श्रीमति सहगल गुरुवार को एएमयू के पॉलीटेक्निक सभागार में आयोजित छठी केपी सिंह स्मृति व्याख्यान में बोल रही थीं।
उन्होंने देश में बढ़ती हिंसा और असहिष्णुता की राजनीति को देश की धर्मनिरपेक्ष परंपराओं के लिए घातक बताया। कहा कि देश की विविधता और उसकी एकता को बनाए रखने के लिए ही लगभग 40 लेखकों, कलाकारों, बुद्धिजीवियों और वैज्ञानिकों नेे अपने सम्मान वापस किए थे।
विज्ञापन
इनमें से कोई भी व्यक्ति किसी भी सियासी दल से जुड़ा नहीं है, न ही कोई किसी से परिचित था।
उन्होंने कहा कि उनकी निकट की रिश्तेदार प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1975 में जब इमरजेंसी लगाई थी तो वह पहली लेखिका थीं जिन्होंने इसका खुला विरोध किया था।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार जर्मनी में फांसीवादी आंदोलन के दौरान महिलाओं से ज्यादा बच्चे पैदा करने को कहा जाता था। उसी तरह एक साध्वी 10-10 बच्चे पैदा करने की वकालत कर फासीवादी प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रही हैं।
आज देश की उच्च शिक्षा संस्थाओं को हिंदुत्व के एजेंडे में लाने का प्रयास चल रहा है। विभिन्न धर्मों के बीच घृणा का माहौल पैदा करने की कोशिश चल रही है।
क्रिसमस डे के दिन गर्वनेंस डे घोषित करना उचित नहीं। इस मौके पर एएमयू कुलपति जमीरउद्दीन शाह ने कहा कि एएमयू एक धर्मनिरपेक्ष एवं आधुनिक शैक्षणिक संस्थान है।
फारसी अध्ययन केंद्र की निदेशक प्रो. अजरमी दुख्त सफवी ने प्रो. केपी सिंह को याद करते हुए कहा कि वह एक बेहतरीन इंसान और राही मासूम रजा के गहरे दोस्त थे। इस अवसर पर सह कुलपति सैयद अहमद अली, डॉ. तारिक इस्लाम, डॉ. नमिता सिंह, अजय बिसारिया आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
देश में चरमपंथी विविधता में एकता की विचारधारा को खंडित करने में लगे हैं। जिस प्रकार 1947 में विभाजन के समय देश के अमनपसंद नागरिकों ने हिंदू राष्ट्र की मांग ठुकरा दी था।
एक बार फिर भारत की जनता इसे अस्वीकार कर देगी। श्रीमति सहगल गुरुवार को एएमयू के पॉलीटेक्निक सभागार में आयोजित छठी केपी सिंह स्मृति व्याख्यान में बोल रही थीं।
विज्ञापन
उन्होंने देश में बढ़ती हिंसा और असहिष्णुता की राजनीति को देश की धर्मनिरपेक्ष परंपराओं के लिए घातक बताया। कहा कि देश की विविधता और उसकी एकता को बनाए रखने के लिए ही लगभग 40 लेखकों, कलाकारों, बुद्धिजीवियों और वैज्ञानिकों नेे अपने सम्मान वापस किए थे।
विज्ञापन
इनमें से कोई भी व्यक्ति किसी भी सियासी दल से जुड़ा नहीं है, न ही कोई किसी से परिचित था।
उन्होंने कहा कि उनकी निकट की रिश्तेदार प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1975 में जब इमरजेंसी लगाई थी तो वह पहली लेखिका थीं जिन्होंने इसका खुला विरोध किया था।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार जर्मनी में फांसीवादी आंदोलन के दौरान महिलाओं से ज्यादा बच्चे पैदा करने को कहा जाता था। उसी तरह एक साध्वी 10-10 बच्चे पैदा करने की वकालत कर फासीवादी प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रही हैं।
आज देश की उच्च शिक्षा संस्थाओं को हिंदुत्व के एजेंडे में लाने का प्रयास चल रहा है। विभिन्न धर्मों के बीच घृणा का माहौल पैदा करने की कोशिश चल रही है।
क्रिसमस डे के दिन गर्वनेंस डे घोषित करना उचित नहीं। इस मौके पर एएमयू कुलपति जमीरउद्दीन शाह ने कहा कि एएमयू एक धर्मनिरपेक्ष एवं आधुनिक शैक्षणिक संस्थान है।
फारसी अध्ययन केंद्र की निदेशक प्रो. अजरमी दुख्त सफवी ने प्रो. केपी सिंह को याद करते हुए कहा कि वह एक बेहतरीन इंसान और राही मासूम रजा के गहरे दोस्त थे। इस अवसर पर सह कुलपति सैयद अहमद अली, डॉ. तारिक इस्लाम, डॉ. नमिता सिंह, अजय बिसारिया आदि मौजूद रहे।