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ऐतिहासिक हैं, पर पर्यटन मानचित्र से गायब हैं अलीगढ़ की धरोहरें
सार
ऐसे में अपने जिले की एतिहासिक व पुरातात्विक धरोहरों का जिक्र करना लाजमी है।मैंने अपने संगीत निर्देशन में स्वरबद्ध कर अपने एएमयू के यूजिक हॉबी स्टूडेंट से रिकॉर्ड करवाया था, जो लाइब्रेरी में प्रवेश करते ही सीधे हाथ की दीवार पर लगी है।हालांकि नोएडा में ‘फिल्म सिटी’ से जरूर उम्मीद बंधी है।
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एएमयू स्टेची हॉल का फोटो। संवाद
- फोटो : CITY OFFICE
विस्तार
पर्यटन दिवस 27 सितंबर को है। ऐसे में अपने जिले की एतिहासिक व पुरातात्विक धरोहरों का जिक्र करना लाजमी है। मगर दुखद पहलू ये है कि अपना जिला पर्यटन मानचित्र से बाहर है। ऐसा क्यों, इस सवाल का जवाब नहीं मिलता। हम अपने जिले की इन धरोहारों की बात करें तो पर्यटन का सबसे बड़ा खजाना अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में है।
परिसर में ऐसी ऐतिहासिक इमारतें, धरोहरें हैं, जो देखे उसे देखता ही रह जाए। इसके अलावा जिले में कई ऐसी धरोहर हैं, जिनको संरक्षित करने के लिए शासन स्तर से समय समय पर मदद मिलती है। मगर इन्हें पर्यटन मानचित्र पर आज तक नहीं लाया गया।
बात अगर एएमयू की करें तो सांस्कृतिक शिक्षा केंद्र, एएमयू के समन्वयक प्रो. एफएस शीरानी ने बताया कि पर्यटकों को अगर इस ऐतिहासिक इमारतों और धरोहरों का देखना है, तो उन्हें कोई शुल्क नहीं देना होगा। अलबत्ता, यूनिवर्सिटी के कार्य दिवस में आना होगा। आने की जानकारी देनी होगी।
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उन्हें गाइड उपलब्ध कराया जाएगा। एएमयू अपने आप में एक पर्यटन का हब है, क्योंकि उसकी तारीख 10-20 साल पुरानी नहीं है, बल्कि सौ साल से ज्यादा पुरानी है। यूनिवर्सिटी की शुरुआत 1875 में मदरसा से हुई थी। 1877 में एमएओ कॉलेज बना था। 1920 में यूनिवर्सिटी बनी थी।
- एएमयू की मौलाना आजाद लाइब्रेरी भी ऐतिहासिक महत्व की है, जो देखने लायक है। एशिया में यह लाइब्रेरी अपना अव्वल स्थान रखती है। इसकी दूसरी खूबियों के अलावा शायद केवल इस लाइब्रेरी का गीत भी है, जो इसकी गोल्डन जुबली पर डॉ. मुअज्जम ने लिखा है। मैंने अपने संगीत निर्देशन में स्वरबद्ध कर अपने एएमयू के यूजिक हॉबी स्टूडेंट से रिकॉर्ड करवाया था, जो लाइब्रेरी में प्रवेश करते ही सीधे हाथ की दीवार पर लगी है। ऐ कुतुबगाहे अलीगढ़ तू हमारी शान है, तू कुतुबखाना नहीं है इल्म की पहचान है।
-जॉनी फॉस्टर, पूर्व संगीत शिक्षक, एएमयू
एएमयू शिक्षा के साथ पर्यटन के लिहाज से भी परिपूर्ण है। इस परिसर में ऐसी बेशकीमती धराहरें और इमारते हैं, जो कहीं नहीं है। दुनिया में 13 तरह की इमारती संरचनाएं होती हैं, जो सभी एएमयू में हैं। ऐसा दुनिया में एक साथ कहीं नहीं हो सकता। जामा मस्जिद में अब्दुल हक की कैलीग्राफी है, जो दिल्ली के अकबरी मस्जिद में लगी थी। मस्जिद को अंग्रेजों ने 1857 को शहीद कर दिया था, क्योंकि यहीं से अंग्रेजों के खिलाफ मंसूबे बनते थे। सर सैयद अहमद खान ने मस्जिद का मलबा खरीद लिया था।-प्रो. एफएस शीरानी, समन्वयक, सांस्कृतिक शिक्षा केंद्र, एएमयू
इन्हें देखें
एएमयू के स्ट्रेची हॉल, विक्टोरिया गेट, एसएस हॉल, एएमयू लाइब्रेरी, यूनियन हॉल, मिंटो सर्किल स्कूल, जामा मस्जिद, मूसा डाकरी संग्रहालय, अलीगढ़ किला, सर सैयद एकेडमी, कैनेडी हॉल, सीता अशोक पेड़, स्विमिंग पूल आदि।
इनकी खासियत
सांस्कृतिक शिक्षा केंद्र, एएमयू के समन्वयक प्रो. एफएस शीरानी के अनुसार, एएमयू की लाइब्रेरी में किताबों का शानदार संग्रह है।
- मूसा डाकरी के संग्रहालय के प्रवेशद्वार पर मशहूर चित्रकार एफएफ हुसैन ने 1964 में यूरल बनाया था, जो उन्होंने एक-एक टाइल के टुकड़े से सर सैयद अहमद खान की तस्वीर उकेरी थी।
- संग्रहालय में चार हजार पुराना अनाज रखने का जार
- डेढ़ लाख साल पहले का पत्थर
- नाखून से लिखा कुरान, बिना नुक्ते का कुरान, 22 पारे का कुरान, एक कुर्ता कुरान की आयतें
- सात फुट ऊंची तीर्थांकर की बेशकीमती प्रतिमा
- दुर्लभ रामायण, श्रीमद् भगवत गीता, चौखट पर शिव-पार्वती का आकृति, जो ब्रह्मा मंदिर का है
- मंसूर नक्काश की पेंटिंग
- औरंगजेब की सबसे छोटी तलवार
- जहांगीर का नोट्स
- अब्दुस सलाम का नोबेल पुरस्कार
अब नोएडा फिल्म सिटी से बंधी है उम्मीद
दो शताब्दी से ज्यादा के अपने इतिहास में अलीगढ़ पर्यटन में कभी अपनी पहचान नहीं बना सका। इसकी यही वजह रही कि धार्मिक स्थल बड़े पर्यटन स्थल बन सकते थे, उन पर ध्यान नहीं दिया गया। इनमें सुविधाओं का होना तो दूर, कुछ के लिए शहर से संपर्क मार्ग तक नहीं बन सके हैं। यही नहीं रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड या अन्य सार्वजनिक स्थलों पर उनका कोई प्रचार प्रसार तक नहीं हुआ है। हालांकि अब नोएडा में फिल्म सिटी बनने से कुछ उम्मीद बंधी है।
सबसे पहले विश्व प्रसिद्ध श्रीबांकेबिहारी (वृंदावन) के विग्रह को प्रकट कराने वाले स्वामी हरिदास की तपोस्थली श्रीखेरेश्वर धाम को कभी वृंदावन से नहीं जोड़ा जा सका। हालांकि, आज तक उनके वंशज अपने संस्कार करने के लिए श्रीखेरेश्वर धाम में ही आते हैं।
इसी तरह ब्रज चौरासी कोस क्षेत्र के अंतर्गत धरणीधर सरोवर बेसवां पौराणिक व धार्मिक स्थल श्री कृष्ण जन्मस्थली से बमुश्किल 30 किमी दूरी पर स्थित होने के कारण देश-विदेश के पर्यटकों के लिए एक दर्शनीय व पिकनिक केंद्र हो सकता है।
पर्यटन स्थल बनने से न केवल इस क्षेत्र का संपूर्ण विकास होगा, अपितु बेरोजगार नवयुवकों को रोजगार के असीमित अवसर भी उपलब्ध होंगे। पर्यटकों से होने वाली आय सरकारी खजाने के लिए भी अतिरिक्त आय का स्रोत हो सकती हैं।
जिले का सबसे महत्वपूर्ण तीर्थधाम ऋषि विश्वामित्र की तपोस्थली धरणीधर सरोवर पर्यटन स्थल घोषित नहीं हो सका। हालांकि नोएडा में ‘फिल्म सिटी’ से जरूर उम्मीद बंधी है। शायद अलीगढ़ के प्राचीन स्थलों पर फिल्मों और टीवी सीरियल की शूटिंग हो और इनकी पहचान देश के पटल पर हो सके। हाल के दिनों में धनीपुर एयरपोर्ट पर जॉन अब्राहम अभिनित फिल्म अटैक की शूटिंग हुई है।
ये भी जानें
-वर्ष 2014 में पूर्व कबीना मंत्री स्व. ख्वाजा हलीम पर्यटन विभाग के सलाहकार बने तो उन्होंने विकास भवन में एक कक्ष में पर्यटन विभाग की अस्थायी शुरुआत कराई, लेकिन उनके निधन के साथ ही ये एक कक्ष भी खत्म हो गया।
-वर्ष 2007 में सांसद रहते हुए चौ. बिजेंद्र सिंह ने धरणीधर ताल, भोज ताल में सौंदर्यीकरण कराया।
-वर्ष 2017-18 में सांसद सतीश गौतम ने केंद्र सरकार की स्प्रिचुअल सर्किट-2 योजना में श्रीखेरेश्वर धाम मंदिर में एक करोड़ 8 लाख और दूसरी योजना में अचलताल में 50 लाख रुपये से घाटों का जीर्णोद्धार कराया।
ये भी जिले की धरोहरें
-अचल सरोवर, भोजताल आश्रम चंडौस, दाऊजी मंदिर गौमत, अंग्रेजी शासन काल में स्थापित रेलवे स्टेशन, दीवानी का मुख्य भवन आदि।
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परिसर में ऐसी ऐतिहासिक इमारतें, धरोहरें हैं, जो देखे उसे देखता ही रह जाए। इसके अलावा जिले में कई ऐसी धरोहर हैं, जिनको संरक्षित करने के लिए शासन स्तर से समय समय पर मदद मिलती है। मगर इन्हें पर्यटन मानचित्र पर आज तक नहीं लाया गया।
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बात अगर एएमयू की करें तो सांस्कृतिक शिक्षा केंद्र, एएमयू के समन्वयक प्रो. एफएस शीरानी ने बताया कि पर्यटकों को अगर इस ऐतिहासिक इमारतों और धरोहरों का देखना है, तो उन्हें कोई शुल्क नहीं देना होगा। अलबत्ता, यूनिवर्सिटी के कार्य दिवस में आना होगा। आने की जानकारी देनी होगी।
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उन्हें गाइड उपलब्ध कराया जाएगा। एएमयू अपने आप में एक पर्यटन का हब है, क्योंकि उसकी तारीख 10-20 साल पुरानी नहीं है, बल्कि सौ साल से ज्यादा पुरानी है। यूनिवर्सिटी की शुरुआत 1875 में मदरसा से हुई थी। 1877 में एमएओ कॉलेज बना था। 1920 में यूनिवर्सिटी बनी थी।
- एएमयू की मौलाना आजाद लाइब्रेरी भी ऐतिहासिक महत्व की है, जो देखने लायक है। एशिया में यह लाइब्रेरी अपना अव्वल स्थान रखती है। इसकी दूसरी खूबियों के अलावा शायद केवल इस लाइब्रेरी का गीत भी है, जो इसकी गोल्डन जुबली पर डॉ. मुअज्जम ने लिखा है। मैंने अपने संगीत निर्देशन में स्वरबद्ध कर अपने एएमयू के यूजिक हॉबी स्टूडेंट से रिकॉर्ड करवाया था, जो लाइब्रेरी में प्रवेश करते ही सीधे हाथ की दीवार पर लगी है। ऐ कुतुबगाहे अलीगढ़ तू हमारी शान है, तू कुतुबखाना नहीं है इल्म की पहचान है।
-जॉनी फॉस्टर, पूर्व संगीत शिक्षक, एएमयू
एएमयू शिक्षा के साथ पर्यटन के लिहाज से भी परिपूर्ण है। इस परिसर में ऐसी बेशकीमती धराहरें और इमारते हैं, जो कहीं नहीं है। दुनिया में 13 तरह की इमारती संरचनाएं होती हैं, जो सभी एएमयू में हैं। ऐसा दुनिया में एक साथ कहीं नहीं हो सकता। जामा मस्जिद में अब्दुल हक की कैलीग्राफी है, जो दिल्ली के अकबरी मस्जिद में लगी थी। मस्जिद को अंग्रेजों ने 1857 को शहीद कर दिया था, क्योंकि यहीं से अंग्रेजों के खिलाफ मंसूबे बनते थे। सर सैयद अहमद खान ने मस्जिद का मलबा खरीद लिया था।-प्रो. एफएस शीरानी, समन्वयक, सांस्कृतिक शिक्षा केंद्र, एएमयू
इन्हें देखें
एएमयू के स्ट्रेची हॉल, विक्टोरिया गेट, एसएस हॉल, एएमयू लाइब्रेरी, यूनियन हॉल, मिंटो सर्किल स्कूल, जामा मस्जिद, मूसा डाकरी संग्रहालय, अलीगढ़ किला, सर सैयद एकेडमी, कैनेडी हॉल, सीता अशोक पेड़, स्विमिंग पूल आदि।
इनकी खासियत
सांस्कृतिक शिक्षा केंद्र, एएमयू के समन्वयक प्रो. एफएस शीरानी के अनुसार, एएमयू की लाइब्रेरी में किताबों का शानदार संग्रह है।
- मूसा डाकरी के संग्रहालय के प्रवेशद्वार पर मशहूर चित्रकार एफएफ हुसैन ने 1964 में यूरल बनाया था, जो उन्होंने एक-एक टाइल के टुकड़े से सर सैयद अहमद खान की तस्वीर उकेरी थी।
- संग्रहालय में चार हजार पुराना अनाज रखने का जार
- डेढ़ लाख साल पहले का पत्थर
- नाखून से लिखा कुरान, बिना नुक्ते का कुरान, 22 पारे का कुरान, एक कुर्ता कुरान की आयतें
- सात फुट ऊंची तीर्थांकर की बेशकीमती प्रतिमा
- दुर्लभ रामायण, श्रीमद् भगवत गीता, चौखट पर शिव-पार्वती का आकृति, जो ब्रह्मा मंदिर का है
- मंसूर नक्काश की पेंटिंग
- औरंगजेब की सबसे छोटी तलवार
- जहांगीर का नोट्स
- अब्दुस सलाम का नोबेल पुरस्कार
अब नोएडा फिल्म सिटी से बंधी है उम्मीद
दो शताब्दी से ज्यादा के अपने इतिहास में अलीगढ़ पर्यटन में कभी अपनी पहचान नहीं बना सका। इसकी यही वजह रही कि धार्मिक स्थल बड़े पर्यटन स्थल बन सकते थे, उन पर ध्यान नहीं दिया गया। इनमें सुविधाओं का होना तो दूर, कुछ के लिए शहर से संपर्क मार्ग तक नहीं बन सके हैं। यही नहीं रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड या अन्य सार्वजनिक स्थलों पर उनका कोई प्रचार प्रसार तक नहीं हुआ है। हालांकि अब नोएडा में फिल्म सिटी बनने से कुछ उम्मीद बंधी है।
सबसे पहले विश्व प्रसिद्ध श्रीबांकेबिहारी (वृंदावन) के विग्रह को प्रकट कराने वाले स्वामी हरिदास की तपोस्थली श्रीखेरेश्वर धाम को कभी वृंदावन से नहीं जोड़ा जा सका। हालांकि, आज तक उनके वंशज अपने संस्कार करने के लिए श्रीखेरेश्वर धाम में ही आते हैं।
इसी तरह ब्रज चौरासी कोस क्षेत्र के अंतर्गत धरणीधर सरोवर बेसवां पौराणिक व धार्मिक स्थल श्री कृष्ण जन्मस्थली से बमुश्किल 30 किमी दूरी पर स्थित होने के कारण देश-विदेश के पर्यटकों के लिए एक दर्शनीय व पिकनिक केंद्र हो सकता है।
पर्यटन स्थल बनने से न केवल इस क्षेत्र का संपूर्ण विकास होगा, अपितु बेरोजगार नवयुवकों को रोजगार के असीमित अवसर भी उपलब्ध होंगे। पर्यटकों से होने वाली आय सरकारी खजाने के लिए भी अतिरिक्त आय का स्रोत हो सकती हैं।
जिले का सबसे महत्वपूर्ण तीर्थधाम ऋषि विश्वामित्र की तपोस्थली धरणीधर सरोवर पर्यटन स्थल घोषित नहीं हो सका। हालांकि नोएडा में ‘फिल्म सिटी’ से जरूर उम्मीद बंधी है। शायद अलीगढ़ के प्राचीन स्थलों पर फिल्मों और टीवी सीरियल की शूटिंग हो और इनकी पहचान देश के पटल पर हो सके। हाल के दिनों में धनीपुर एयरपोर्ट पर जॉन अब्राहम अभिनित फिल्म अटैक की शूटिंग हुई है।
ये भी जानें
-वर्ष 2014 में पूर्व कबीना मंत्री स्व. ख्वाजा हलीम पर्यटन विभाग के सलाहकार बने तो उन्होंने विकास भवन में एक कक्ष में पर्यटन विभाग की अस्थायी शुरुआत कराई, लेकिन उनके निधन के साथ ही ये एक कक्ष भी खत्म हो गया।
-वर्ष 2007 में सांसद रहते हुए चौ. बिजेंद्र सिंह ने धरणीधर ताल, भोज ताल में सौंदर्यीकरण कराया।
-वर्ष 2017-18 में सांसद सतीश गौतम ने केंद्र सरकार की स्प्रिचुअल सर्किट-2 योजना में श्रीखेरेश्वर धाम मंदिर में एक करोड़ 8 लाख और दूसरी योजना में अचलताल में 50 लाख रुपये से घाटों का जीर्णोद्धार कराया।
ये भी जिले की धरोहरें
-अचल सरोवर, भोजताल आश्रम चंडौस, दाऊजी मंदिर गौमत, अंग्रेजी शासन काल में स्थापित रेलवे स्टेशन, दीवानी का मुख्य भवन आदि।