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Sir Syed Day: हिंदू राजाओं के साथ थी सर सैयद की गहरी मित्रता, एएमयू के निर्माण में की थी उन्होंने मदद
Tue, 08 Oct 2024 01:02 PM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Tue, 08 Oct 2024 01:02 PM IST
सार
एएमयू के उर्दू एकेडमी के पूर्व निदेशक डॉ. राहत अबरार ने बताया कि सर सैयद अहमद की हिंदू राजाओं और बुद्धिजीवियों से दोस्ती थी। इनमें महाराजा इश्वरी प्रसाद नारायन सिंह (काशी नरेश, बनारस), राजा टीकम सिंह मुरसान, राजा जय किशन दास (मुरादाबाद) आदि शामिल हैं।
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के संस्थापक सर सैयद अहमद खान की हिंदू राजाओं और बुद्धिजीवियों से गहरी मित्रता थी। सर सैयद के एमएओ कॉलेज के निर्माण में हिंदुओं ने आर्थिक मदद की थी। यही एमएओ कालेज आज एएमयू है।
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अलीगढ़ से सर सैयद अहमद का 15 अगस्त 1867 को बनारस के लिए तबादला हो गया। इसके बाद उन्होंने तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर राजा जय किशन दास को साइंटिफिक सोसाइटी की जिम्मेदारी दी थी। वह उनके सबसे खास दोस्तों में से एक थे।उन्होंने सर सैयद को उनके शैक्षिक आंदोलन में हरसंभव मदद और सहयोग दिया था। जब उनका यहां तबादला हो गया, तब उन्हें सोसाइटी का आजीवन सह-अध्यक्ष बना दिया था। 30 अप्रैल 1905 को उनका निधन हो गया। उनके शोक में एमएओ कॉलेज एक दिन के लिए बंद रहा।
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इनसे भी रही दोस्ती
एएमयू के उर्दू एकेडमी के पूर्व निदेशक डॉ. राहत अबरार ने बताया कि सर सैयद अहमद की हिंदू राजाओं और बुद्धिजीवियों से दोस्ती थी। इनमें महाराजा इश्वरी प्रसाद नारायन सिंह (काशी नरेश, बनारस), राजा टीकम सिंह मुरसान, राजा जय किशन दास (मुरादाबाद), महाराज दिग्विजय सिंह (बलरामपुर), राजा मधु सिंह (अमेठी), राव हिंदुपत (अलीपुर), लाला होतीलाल (हाथरस), मुंशी हनुमान प्रसाद (आगरा), लाला हरवंश लाल (गाजीपुर), मुंशी नवाब किशोर (लखनऊ), बख्शी नंद किशोर (हाथरस), पंडित नंद किशोर (संभल), राय नारायन दास (बनारस), मुंशी नवाब राय (दातागंज, बदायूं), सरदार नेहाल सिंह (लाहौर), मोहनलाल (हाथरस), राय मन राय (आगरा), पंडित मनफूल मियां (पंजाब), लाला गुलाब सिंह (मुरादाबाद), लाला किशन सहाय (मेरठ), बाबू काली प्रसून सिंह (कलकत्ता), राय शंकर दास मुंसिफ (अमरोहा) आदि शामिल हैं।
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चहारदीवारी के लिए दिया था हिंदुओं ने दान
एमएओ कॉलेज की चहारदीवारी के निर्माण में हिंदुओं ने भी दान दिया था। इनमें काशीनाथ बिस्वास, राय बख्त सिंह मेवाड़, प्यारेलाल, बाबू मधुसूधन सिंह बनारस, राजा शंभू नारायन सिंह बनारस, राय नारायन दास, बाबू केशव राम, बाबू सीताराम बनारस, राना शंकर बख्श, जगमोहन सिंह, शिव पाल, राजा अजीत पाल सिंह, राजा श्रीपाल सिंह, राय मधु प्रसाद, ठाकुर शंकर रंजन सिंह आदि ने दान दिया था।