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Aligarh News: बेटे की स्कूल ड्रेस ने ज्ञानवती को बनाया उद्यमी
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अतरौली में ज्ञानवती के सिले कपड़े देखते राज्यमंत्री संदीप सिंह। संवाद
- फोटो : samvad
हालात जब विपरीत होते हैं तब हौसला ही एक ऐसा सहारा होता है जिसके बल पर कठिन से कठिन काम किया जा सकता है। ऐसा ही एक मामला अतरौली के गांव खेड़ा में देखने को मिला है। यहां की ज्ञानवती ने ऐसा ही कुछ कर दिखाया है जिसकी समाज में मिसाल दी जा रही है।
आर्थिक तंगी के चलते बेटे को स्कूल ड्रेस न दिला पाने की टीस ने ज्ञानवती को उद्यमी बना दिया है। अब उन्होंने सिलाई के कारोबार को बढ़ाकर 11 सिलाई मशीनों के साथ गुजरात, कोलकाता और महाराष्ट्र तक कपड़े सप्लाई करने की योजना बना ली है। ज्ञानवती बताती हैं कि पति बालकिशन मजदूरी और खेती से घर चलाते हैं। छोटे बेटे कृष को वर्ष 2021 में स्कूल की ड्रेस पैसों के अभाव में नहीं दिला पाई थी। बिना ड्रेस के स्कूल में आने से मना कर दिया गया। यह बात दिल को चुभ गई और घर में पुरानी सिलाई मशीन से उसी रात कपड़ा लाकर खुद ड्रेस सिल दी। दूसरे लोग भी बच्चों के कपड़े सिलवाने लगे।
ज्ञानवती ब्लॉक में स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और दूसरी मशीन लगा ली। समूह से 50 हजार का लोन लेकर धीरे-धीरे मशीनें बढ़ाती गईं। इन पर समूह की महिलाएं और उनके पति काम करने लगे। ज्ञानवती को फायदा होने के साथ ही 14 महिलाओं को भी रोजगार मिल गया है। ज्ञानवती सूरत से कपड़ा लाकर घर पर ही रेडीमेड गारमेंट तैयार करती हैं। पहले सिर्फ बच्चों के कपड़े बनाती थीं, अब लड़कियों के सूट और पुरुषों के कुर्ते भी बन रहे हैं। इन कपड़ों की अतरौली और आसपास के बाजार में सप्लाई है। सूरत के जिस व्यापारी से कपड़ा लेती हैं, उसके जरिए अब गुजरात, कोलकाता और महाराष्ट्र से एक-एक हजार पीस का ऑर्डर मिला है। ज्ञानवती कहती हैं, ऑर्डर पास हो गया और कपड़े पसंद आ गए तो यह किसी बड़े सपने से कम नहीं होगा।
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हाल ही में बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह ने ब्लॉक में उनकी कारीगरी देखकर प्रशंसा की। बीडीओ वेदप्रकाश को ज्ञानवती को ब्लॉक स्तर से हर संभव मदद देने के निर्देश दिए। बीडीओ ने कहा है कि ज्ञानवती जैसी महिलाएं दूसरी महिलाओं के लिए मिसाल हैं।
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आर्थिक तंगी के चलते बेटे को स्कूल ड्रेस न दिला पाने की टीस ने ज्ञानवती को उद्यमी बना दिया है। अब उन्होंने सिलाई के कारोबार को बढ़ाकर 11 सिलाई मशीनों के साथ गुजरात, कोलकाता और महाराष्ट्र तक कपड़े सप्लाई करने की योजना बना ली है। ज्ञानवती बताती हैं कि पति बालकिशन मजदूरी और खेती से घर चलाते हैं। छोटे बेटे कृष को वर्ष 2021 में स्कूल की ड्रेस पैसों के अभाव में नहीं दिला पाई थी। बिना ड्रेस के स्कूल में आने से मना कर दिया गया। यह बात दिल को चुभ गई और घर में पुरानी सिलाई मशीन से उसी रात कपड़ा लाकर खुद ड्रेस सिल दी। दूसरे लोग भी बच्चों के कपड़े सिलवाने लगे।
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ज्ञानवती ब्लॉक में स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और दूसरी मशीन लगा ली। समूह से 50 हजार का लोन लेकर धीरे-धीरे मशीनें बढ़ाती गईं। इन पर समूह की महिलाएं और उनके पति काम करने लगे। ज्ञानवती को फायदा होने के साथ ही 14 महिलाओं को भी रोजगार मिल गया है। ज्ञानवती सूरत से कपड़ा लाकर घर पर ही रेडीमेड गारमेंट तैयार करती हैं। पहले सिर्फ बच्चों के कपड़े बनाती थीं, अब लड़कियों के सूट और पुरुषों के कुर्ते भी बन रहे हैं। इन कपड़ों की अतरौली और आसपास के बाजार में सप्लाई है। सूरत के जिस व्यापारी से कपड़ा लेती हैं, उसके जरिए अब गुजरात, कोलकाता और महाराष्ट्र से एक-एक हजार पीस का ऑर्डर मिला है। ज्ञानवती कहती हैं, ऑर्डर पास हो गया और कपड़े पसंद आ गए तो यह किसी बड़े सपने से कम नहीं होगा।
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हाल ही में बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह ने ब्लॉक में उनकी कारीगरी देखकर प्रशंसा की। बीडीओ वेदप्रकाश को ज्ञानवती को ब्लॉक स्तर से हर संभव मदद देने के निर्देश दिए। बीडीओ ने कहा है कि ज्ञानवती जैसी महिलाएं दूसरी महिलाओं के लिए मिसाल हैं।