फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Helpful in narco test investigation, but not legal recognition

नार्को टेस्ट जांच में मददगार, पर कानूनी मान्यता नहीं

Sun, 04 Oct 2020 01:48 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 04 Oct 2020 01:48 AM IST
विज्ञापन
Helpful in narco test investigation, but not legal recognition
रामबाबू शर्मा एडवोकेट - फोटो : CITY OFFICE
अभिषेक शर्मा
विज्ञापन

हाथरस की अनुसूचित जाति की बिटिया की मौत के मामले में प्रदेश सरकार ने फैसला सच सामने लाने के लिए लिया या फिर किसी दबाव में, मगर इतना जरूर है कि नार्को परीक्षण की रिपोर्ट की कानूनी मान्यता नहीं है। मतलब, इस रिपोर्ट को मुकदमे के ट्रायल (सत्र परीक्षण) के दौरान अदालत में बतौर साक्ष्य हिस्सा नहीं माना जाता। यह राय व्यक्त की है, अपने शहर के नामचीन अधिवक्ताओं ने। इन विधि विशेषज्ञों ने कहा कि सरकार या पुलिस अपनी संतुष्टि के लिए नार्को कराए, अलग बात है। यह उनके लिए जांच का हिस्सा हो सकता है। मगर, यह गैरजरूरी है।
- नार्को परीक्षण को लेकर 2013 में सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच का स्पष्ट आदेश है कि यह अमान्य है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने मत में स्पष्ट कहा कि इंजेक्ट करने के बाद नार्को परीक्षण करना, मतलब करंट लगाकर या दबाव में लेकर कुछ कहलवाने जैसा है। यह नहीं कराना चाहिए। कम से कम पीड़ित को तो बिल्कुल नहीं कराना चाहिए। अगर बेहद आवश्यक न हो तो। - ठा. बुद्धपाल सिंह वरिष्ठ अधिवक्ता
विज्ञापन

- नार्को परीक्षण का कानूनी आधार नहीं है। यह पुलिस अपनी संतुष्टि के लिए या किसी तह तक पहुंचने के लिए कराए तो इसकी कोर्ट में मान्यता नहीं है। पीड़ित पक्ष के नार्को का तो कोई औचित्य नहीं है। साथ ही बिना सहमति के भी किसी का नार्को नहीं कराया जा सकता। पीड़ित अपनी बात रख रहा है, पुलिस को उसकी जांच करनी चाहिए। जांच में अगर सही है तो उसके अनुसार और गलत है तो उसके अनुसार कार्रवाई करे। - रामबाबू शर्मा वरिष्ठ अधिवक्ता
विज्ञापन
विज्ञापन

- यह सही है कि कोर्ट में नार्को परीक्षण मान्य नहीं है। मगर इस मामले में सरकार ने सच जानने के लिए यह फैसला लिया है। पुलिस विवेचना में जरूरत पड़ने पर ऐसा किया जा रहा है। इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। सच्चाई आने के बाद उसके अनुसार पुलिस कोर्ट में चार्जशीट पेश कर सकती है । - नीरज चौहान युवा अधिवक्ता

- सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग के अनुसार, नार्को परीक्षण गैरवाजिब है। इस मामले में सरकार व प्रशासन शुरुआत से हुईं अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए ऐसा कदम उठा रही है, उल्टा पीड़ित को दबाव में लेने के लिए ऐसा किया जा रहा है, जो कि गलत है। जिस प्रकरण में इस कदर तूफान मचा हो, उस मामले में वैधानिक कदम उठाने चाहिए, जबकि नार्को की कोई वैधानिकता नहीं है। - चंद्रशेखर दीक्षित वरिष्ठ अधिवक्ता

नीरज चौहान एडवोकेट

नीरज चौहान एडवोकेट- फोटो : CITY OFFICE

चन्द्रशेखर एडवोकेट

चन्द्रशेखर एडवोकेट- फोटो : CITY OFFICE

बुद्धपाल सिंह एडवोकेट

बुद्धपाल सिंह एडवोकेट- फोटो : CITY OFFICE

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed