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हाथरस कांड: अमर उजाला के सवालों के इर्द-गिर्द थी सीबीआई की चार्जशीट, 35 में से 13 गवाह अलीगढ़ के थे

Fri, 03 Mar 2023 04:28 AM IST
चमन शर्मा अभिषेक शर्मा
अभिषेक शर्मा Published by: चमन शर्मा Updated Fri, 03 Mar 2023 04:28 AM IST
सार

हाथरस कांड में फैसला सीबीआई की चार्जशीट पर आया। जिन तथ्यों का सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में उल्लेख किया है। उन तथ्यों पर अमर उजाला द्वारा घटना के बाद सवाल उठाए गए थे।

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Hathras Bitiya Case CBI charge sheet revolved around Amar Ujala questions
CBI - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

हाथरस बिटिया प्रकरण में फैसला सीबीआई की चार्जशीट पर आया है। मगर यहां दावे से कहा जा सकता है कि जिन तथ्यों का सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में उल्लेख किया है। उन तथ्यों पर अमर उजाला द्वारा घटना के बाद सवाल उठाए गए थे। उन सवालों से जुड़े तथ्य विवेचना में आधार बने हैं।

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अमर उजाला में प्रकाशित खबर
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ये थे सवाल
सवाल नंबर 1-घटना में 14, 19 और 22 सितंबर को अलग अलग तरह के आरोप।
सवाल नंबर 2-घटना के समय तीन आरोपियों की अलग अलग स्थानों पर लोकेशन।
सवाल नंबर 3-मेडिकल रिपोर्ट में हाथरस जिला अस्पताल व मेडिकल में अलग तथ्य।
सवाल नंबर 4-राजनीतिक एंट्री के बाद अचानक बयानों में बदलाव क्यों आते चले गए।

167 पेज के निर्णय में कुल 35 में से 13 गवाह अलीगढ़ जनपद के
हाथरस के एडीजे विशेष एससीएसटी त्रिलोकपाल सिंह की अदालत ने 167 का निर्णय सुनाया है। जिसमें कुल 35 गवाह हैं, जिनमें से 13 गवाह अलीगढ़ जनपद के हैं। इनमें सबसे पहले तत्कालीन नायब तहसीलदार कोल मनीष कुमार हैं, जिन्होंने अपने बयान में स्वीकारा है कि मृत्यु पूर्व बयान में दुष्कर्म या छेडख़ानी की कोई बात नहीं आई। इसके बाद जेएनएमसी न्यूरो सर्जरी विभाग के तत्कालीन चेयरमैन प्रो.एमएफ हुदा के अलावा मेडिकल के कुल 11 डॉक्टर व अन्य स्टाफ के लोग गवाह हैं। इनके द्वारा कहीं भी दुष्कर्म की पुष्टि नहीं की गई है।

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इस तरह लगे पुलिस-सिस्टम पर सवाल

इस घटना में पुलिस सिस्टम पर पहले दिन से पीड़ित की मदद न करने के आरोप लगे। मगर परिवार व पीड़ित के बदलते बयान पुलिस की परेशानी का सबब बने हुए थे। पहले दिन सिर्फ मारपीट, फिर छेडख़ानी और फिर दुष्कर्म जैसे आरोप आए। शुरुआती विवेचक सीओ सादाबाद ने भी दो बार में बयान दर्ज कर विवेचना आगे बढ़ाई और चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। मगर बेटी की मौत के बाद प्रकरण में जो भूचाल आया। उसके बाद प्रकरण ने पूरी तरह टर्न ले लिया। देश भर की राजनीतिक एंट्री हुई। अमर उजाला ने मामले में गहराई से पड़ताल करते हुए कुछ सवाल उठाए। न्यायालय के मुकदमे की प्रति पढ़ने के बाद साफ हुआ है कि उन सवालों से जुड़े तथ्य सीबीआई की चार्जशीट का हिस्सा रहे हैं।

फिर मेडिकल से कैसे मचा दुष्कर्म का शोर
इस मामले में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन व स्टाफ के अंदर की राजनीति भी अब जगजाहिर हो रही है। उस घटना के समय दो बातें मेडिकल कॉलेज के खिलाफ सुर्खियों में रहीं। पहली ये कि 28 सितंबर को बेटी को सफदरजंग रेफर किया गया और एम्स कैसे पहुंच गई। दूसरी ये कि दुष्कर्म का अंदेशा मेडिकल जांच में जताया जा रहा है, यह तथ्य बाहर सुर्खियों में लाया गया। जिसके आधार पर परिवार व अन्य विपक्षी राजनीतिक दलों ने इस बात का शोर मचाया और मीडिया में सुर्खियों में रहा। 

सीबीआई का एक सप्ताह तक रहा था डेरा
जब इस कांड की जांच सीबीआई को मिली तो जांच अधिकारी/सीओ सीमा पाहुजा की अगुवाई में टीम एक सप्ताह तक यहां डेरा डाले रही। इस दौरान मेडिकल कॉलेज में एक-एक स्टाफ व नायब तहसीलदार से बात की। इसके बाद जेल में भी दो बार टीम गई और आरोपियों से अलग अलग बात की। इसके बाद टीम द्वारा आरोपियों की नारको/पॉलीग्राफी जांच की अनुमति हाथरस न्यायालय से मांगी और चारों को पुलिस सुरक्षा में यहां से पुणे ले जाया गया था।

हाथरस बिटिया प्रकरण में न्यायालय ने जो फैसला सुनाया है, उसका हम सम्मान करते हैं। मगर इसमें यह साफ हो गया है कि सीबीआई ने सही तरीके से अपनी जांच में साक्ष्य संकलित नहीं किए। इसलिए तीन आरोपी बरी हुए हैं। अगर सीबीआई किसी तरह की कमी न करती तो आज तीन आरोपी बरी न होते। अब हम हर तरह से पहले दिन से परिवार के साथ हैं और न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं। घटना के समय आरोपी पक्ष के साथ अगुवाई। -श्यौराज जीवन, कांग्रेस नेता
यह सत्य की जीत हुई है। तीन आरोपी निर्दोष थे, जिन्हें सीबीआई और न्यायालय ने बरी करार दिया है। एक व्यक्ति को दोषी करार दिया गया है, उसमें हम इतना ही कहेंगे कि सीबीआई ने किसी भ्रम में गलत तथ्य न्यायालय में पेश किए हैं। जिसके आधार पर उन्हें सजा सुनाई गई है। इस मामले में दोषी व्यक्ति के परिवार की ओर से हाईकोर्ट में अपील दायर की जाएगी। हम परिवार के साथ खड़े होंगे। -घटना के समय आरोपी पक्ष के साथ अगुवाई। - सुमंत किशोर सिंह, पूर्व छात्र नेता
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