Cyber Crime: चीन-हांगकांग तक के हैकर ले रहे भारत से बैंक खाते, गोरखधंधे में ऐसे होते हैं प्रयोग
शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर ठगी (इनसाइडर ट्रेडिंग) इन दिनों साइबर ठगी में सबसे ज्यादा ट्रेंड में है। इसी ठगी में हरदुआगंज अहीरपाड़ा के दिनेश शर्मा संग मार्च माह में 35 लाख रुपये की ठगी हुई। इसकी जांच करते हुए साइबर थाना पुलिस ने आगरा के रविंद्र राठौर उर्फ बंटी को गिरफ्तार किया।
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साइबर हैकर ठगी के नित नए प्रयोग कर रहे हैं। जांच में उजागर हुआ है कि देश के करंट बैंक खातों को चीन व हांगकांग तक के हैकर प्रयोग कर रहे हैं। इसके पीछे का मकसद करंट खातों में ठगी की बड़ी रकम एक बार में ट्रांसफर कराना और उसमें से फिर 50-100 खातों में छोटे-छोटे टुकड़ों में रकम एक बार में दूसरे खातों में ट्रांसफर करा देना है। इसका प्रयोग ठगी की रकम को इधर से उधर करने के साथ-साथ काले धन को सफेद करने के लिए भी किया जा रहा है।
शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर ठगी (इनसाइडर ट्रेडिंग) इन दिनों साइबर ठगी में सबसे ज्यादा ट्रेंड में है। इसी ठगी में हरदुआगंज अहीरपाड़ा के दिनेश शर्मा संग मार्च माह में 35 लाख रुपये की ठगी हुई। इसकी जांच करते हुए साइबर थाना पुलिस ने आगरा के रविंद्र राठौर उर्फ बंटी को गिरफ्तार किया। इसने ही ठगों को अपना बैंक खाता मुहैया कराया था। इसकी गहराई से जांच में उजागर हुआ है कि साइबर हैकर विदेशों से भी भारतीय खातों को प्रयोग कर रहे हैं। चीन व हांगकांग तक से यहां के खाते प्रयोग हो रहे हैं।
इसके लिए वह ऑनलाइन करंट एकाउंट प्रोवाइडर एप्लीकेशन, एकाउंट एजेंट, फेसबुक पेज, टेलीग्राम प्रोफाइल, व्हाट्सएप ग्रुप आदि पर लोगों से जुड़ते हैं, फिर उन्हें लालच देते हैं और बताते हैं आपका करंट एकाउंट प्रयोग करने के बदले उन्हें कमीशन दिया जाएगा। इसके लिए वह लोगों को बिना जीएसटी पंजीकरण के फर्म के नाम पर एकल मालिकाना हक वाला करंट खाता खुलवाते हैं। उस खाते को ई-बैंकिंग से जुड़वाते हैं।
उसमें बैंक से मिलने वाली ऑटो फारवर्ड की सुविधा शामिल कराई जाती है, जिसके जरिये एक साथ 50-100 खातों में रकम ट्रांसफर हो सके। इसके बाद जब खाता धारक उनके झांसे में आ जाता है तो उसे किसी अपने एजेंट के पास बुलाकर बैठाया जाता है। वहां बैठाकर ठगी की रकम उसके खाते में ट्रांसफर कराई जाती है या फिर काला धन भी उस खाते में ट्रांसफर कराया जाता है। रकम आते ही उसे छोटी-छोटी किश्तों में दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है। छोटी-छोटी किश्तों में यह रकम सिर्फ एक ओटीपी के सहारे ट्रांसफर हो जाती है।
सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर इस तरह के ऑफर किसी को भी आते हैं और लालचवश लोग फंस जाते हैं। ऐसे लोगों से अपील है कि वह लालची ऑफर में फंसकर किसी को अपने खाते का प्रयोग न करने दें और न किसी के कहने पर खाता खुलवाएं, अन्यथा वह भी ठगी का हिस्सा बन सकते हैं।-सुरेंद्र सिंह, इंस्पेक्टर साइबर थाना