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Aligarh News: सरकारी साइटें हैक कर रोहिंग्या-घुसपैठियों तक के बनाए आधार कार्ड; STF ने गिरोह का किया भंडाफोड़

Sat, 08 Nov 2025 11:40 AM IST
चमन शर्मा अभिषेक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़
अभिषेक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Sat, 08 Nov 2025 11:40 AM IST
सार

एसटीएफ लखनऊ यूनिट ने बृहस्पतिवार तड़के जीवनगढ़ गली नंबर 12 में संचालित जनसेवा केंद्रों पर छापा मारकर उनके संचालक साजिद हुसैन व नईमुद्दीन को दबोचा था। इन दोनों व इनके सरगना सहित तीन फरार साथियों पर मुकदमा दर्ज कराकर दोनों को जेल भेज दिया गया।

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Government sites hacked to create Indian Aadhaar Card for even Rohingya infiltrators
गिरफ्तार आरोपी - फोटो : संवाद

विस्तार

एसटीएफ ने अलीगढ़ में क्वार्सी के जीवनगढ़ इलाके से सरकारी साइटों को हैक कर कूटरचित आधार कार्ड बनाने वाले जिस गिरोह का भंडाफोड़ किया है। उसके बड़े कारनामों से भी इन्कार नहीं किया जा रहा। ऐसे भी साक्ष्य मिले हैं जिससे साफ हो रहा है कि इस गिरोह ने भारतीय नागरिकों के साथ-साथ रोहिंग्या-घुसपैठियों तक के आधार कार्ड बनाए हैं। यह नेटवर्क पश्चिम बंगाल में भारतीय सीमा से शुरू हुआ और देश की कई साइटों को हैक करते हुए फर्जीवाड़ा करता रहा। फिलहाल इनसे मिले चार लैपटॉप के जरिये उनके तीन साल के डेटा की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, जिसके लिए लैपटॉप सहित सभी उपकरण साइबर लैब भेजे जा रहे हैं।

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एसटीएफ लखनऊ यूनिट ने बृहस्पतिवार तड़के जीवनगढ़ गली नंबर 12 में संचालित जनसेवा केंद्रों पर छापा मारकर उनके संचालक साजिद हुसैन व नईमुद्दीन को दबोचा था। इन दोनों व इनके सरगना सहित तीन फरार साथियों पर मुकदमा दर्ज कराकर दोनों को जेल भेज दिया गया। इस मामले में विवेचना अब क्वार्सी पुलिस द्वारा की जा रही है। जिसमें सबसे पहले दोनों से मिले 4 लैपटॉप की साइबर विशेषज्ञ से फॉरेंसिक जांच कराने की तैयारी है। इस विषय में एसटीएफ के उच्च पदस्थ सूत्र साफ-साफ बताते हैं कि पकड़ा गया साजिद पूर्व में आधार बनाने वाली कंपनी में काम करता था। 
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उसके संपर्क उसके साथ के काम करने वाले ऐसे लोगों से हुए, जो पश्चिम बंगाल में भारतीय सीमा पर इसी तरह फर्जीवाड़ा कर आधार कार्ड बनाने का धंधा कर रहे थे। उनके व गुजरात की आधार बनाने वाली कंपनी के अपने परिचित प्रशांत के जरिये ही साजिद दिल्ली के आकाश के संपर्क में आया। उसने जब साजिद से यह काम शुरू कराया तो पिछले तीन वर्ष में साजिद ने अपना नेटवर्क अलीगढ़ के साथ साथ पश्चिमी यूपी के हाथरस, बुलंदशहर, मेरठ, कासगंज, एटा, बदायूं, संभल, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर आदि के उन मुस्लिम आबादी वाले जिलों में बनाया। जहां उसे आधार कार्ड बनाने वाले ग्राहक आसानी से मिल सकें।

इस बात से बिल्कुल इन्कार नहीं किया जा सकता कि साजिद व उसके साथी ने अपने दिल्ली के हैकर की मदद से रोहिंग्या व अन्य तरह के घुसपैठियों के आधार कार्ड न बनाए हों। खुद एसटीएफ के इनपुट की शुरुआत भी इसी तरह हुई। मगर इसकी तस्दीक इनसे बरामद कंप्यूटर सिस्टमों की साइबर विशेषज्ञ से फॉरेंसिक जांच से हो सकेगी। उसमें डेटा व जिन लोगों के कार्ड बने हैं, उनके नंबर निकलवाए जाएंगे। इन्होंने पिछले तीन वर्ष में कितने लोगों से रुपये लिए हैं, वह भी जांच का आधार होगा। इसके बाद ही सही तथ्य निकलकर आएगा। यह प्रक्रिया शुरू कराई जा रही है।-मृगांक शेखर पाठक, एसपी सिटी
इस मामले में अभी आकाश, अमित व शरद की तलाश में टीमें लगी हैं। साथ में इनके द्वारा संचालित की गईं साइटों व सिस्टमों की आईपी जांचने के लिए साइबर विशेषज्ञ की मदद ली जा रही है। उसी अनुसार जल्द आगे कदम बढ़ाया जाएगा।-सर्वम सिंह, सीओ तृतीय

एक दिन में 50 आधार बनाने का मिलता लक्ष्य

सूत्रों के अनुसार दिल्ली के हैकर सरगना द्वारा साजिद को हर दिन कम से कम 50 आधार कार्ड बनाने का लक्ष्य मिलता था। उसका साफ कहना था कि कम से कम 30 व अधिकतम 50 आधार कार्ड ग्राहक तलाशकर उनके आधार कार्ड बनवाओगे तो काम चलेगा। इस पर साजिद अपने नेटवर्क के जरिये अपने जिले के साथ-साथ पश्चिमी यूपी के आसपास के जिलों के लोगों तक के आधार कार्ड बनाता था।

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सरगना खोलेगा राज..कितने राज्यों में फैला जाल
सरकारी साइटों को हैककर आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह द्वारा किए गए फर्जीवाड़े से जुड़े बहुत से सवाल उजागर होने हैं। सबसे पहला सवाल तो यही है कि गिरोह के दिल्ली वाले सरगना आकाश ने कितने राज्यों में अपना नेटवर्क बना रखा था। इसके लिए पुलिस व एटीएफ टीमें आकाश सहित जेल गए जनसेवा केंद्र संचालकों के अलीगढ़ निवासी फरार साथियों की तलाश में जुटी हैं। जेल गए दोनों आरोपियों के मोबाइलों की सीडीआर से मदद ली जा रही है, ताकि फरार तीनों की लोकेशन मिल सके।

सीओ तृतीय सर्वम सिंह बताते हैं कि गिरोह का सरगना दिल्ली निवासी आकाश, अलीगढ़ के शरद व अमित फरार हैं। उनके पकड़े जाने पर काफी कुछ उजागर होगा। अभी तक उजागर हुआ कि आकाश द्वारा उत्तराखंड व झारखंड सरकार की आधार कार्ड बनाने वाली डिपार्टमेंट ऑफ वीमेंस एंड चाइल्ड वेलफेयर की साइटों को हैककर उन्हें एक्सिस दिया जाता था। संदेह है कि इनके द्वारा पश्चिम बंगाल व गुजरात सहित अन्य कई राज्यों की साइटों को भी हैक की गई होंगी। यह भी उजागर हुआ कि अमित व शरद पहले खुद आधार कार्ड बनाते थे, बाद में आकाश के जरिये ही साजिद के संपर्क में आए, जिनकी तलाश में टीमें लगी हैं।

ऐसे बनाते थे कूटरचित आधार कार्ड
आधार कार्ड बनाने के लिए सबसे पहले आवेदक के जन्म या मूल निवास प्रमाणपत्र की जरूरत होती है। यह पहले साइटों को हैक कर छदम नाम, पते या जिस नाम से आवेदक बनवाना चाहें, उस नाम-पते से मूल निवास या जन्म प्रमाणपत्र बनाते थे। इसके लिए इन्हें पार्षद, स्कूल, अस्पताल तक के अधिकृत हस्ताक्षर व मुहर की जरूरत होती थी, वे सब इनके पास थे। प्रमाण पत्र बनने के बाद उसे आधार कार्ड बनाने में प्रयोग करते थे।

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