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Aligarh: असली फाइटर जेट की तर्ज पर सरकारी स्कूल के बच्चों ने बनाया उड़ने वाला रैप्टर मॉडल, सैकड़ों मीटर उड़ान

Sat, 14 Mar 2026 11:56 AM IST
Chaman Kumar Sharma इकराम वारिस, अमर उजाला, अलीगढ़
इकराम वारिस, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Sat, 14 Mar 2026 11:56 AM IST
सार

इस फाइटर जेट मॉडल को नियंत्रित करने के लिए रेडियो ट्रांसमीटर लगाया गया है, जो 1 से 1.5 किलोमीटर तक ऊंचाई तक आसानी से उड़ सकता है।  विद्यार्थियों ने इसे बनाने के लिए फिश बॉक्स थर्माकोल सहित हल्के और टिकाऊ मटेरियल का उपयोग किया।

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Government school children made a flying model of a raptor
सरकारी स्कूल के बच्चे रैप्टर मॉडल उड़ाते हुए - फोटो : वीडियो ग्रैब

विस्तार

ग्रामीण क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों के विद्यार्थी भी अब विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में नए कीर्तिमान बना रहे हैं। ऐसा ही कमाल अलीगढ़ में विकासखंड अकराबाद के कंपोजिट विद्यालय भिलावली के विद्यार्थियों ने कर दिखाया है। उन्होंने असली फाइटर जेट की तर्ज पर उड़ने वाला यूएफ-22 रैप्टर मॉडल तैयार कर सबको चौंका दिया। सिर्फ छह हजार रुपये की लागत से बने इस मॉडल ने उड़ान भरकर सबका ध्यान खींचा है।

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कक्षा 4 से कक्षा 8 तक के पांच  विद्यार्थियों  की टीम ने शिक्षक आशीष  कुमार के मार्गदर्शन में यह अनोखा प्रोजेक्ट तैयार किया। टीम में कक्षा आठ की छात्रा प्रांशी कुमारी, आशी, हृदेश कुमार, कक्षा सात की रंजना कुमारी और कक्षा चार के छात्र कार्तिक शर्मा शामिल हैं।
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रेडियो ट्रांसमीटर से 1–1.5 किमी तक उड़ान
शिक्षक आशीष कुमार ने बताया कि इस फाइटर जेट मॉडल को नियंत्रित करने के लिए रेडियो ट्रांसमीटर लगाया गया है, जो 1 से 1.5 किलोमीटर तक ऊंचाई तक आसानी से उड़ सकता है।  विद्यार्थियों ने इसे बनाने के लिए फिश बॉक्स थर्माकोल सहित हल्के और टिकाऊ मटेरियल का उपयोग किया।

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कंप्यूटर सिमुलेटर पर ली पायलट जैसी ट्रेनिंग
सबसे खास बात यह रही कि असली मैदान में उड़ान से पहले  विद्यार्थियों  ने  विद्यालय में लगाए गए कंप्यूटर सिमुलेटर पर अभ्यास किया। इससे उन्हें विमान संचालन की समझ मिली और क्रैश का खतरा भी कम हुआ। इसके बाद मैदान में सफल परीक्षण किया गया।

रोबोटिक्स की पाठशाला का कमाल
आशीष कुमार ने रोबोटिक्स की पाठशाला लगाई। विद्यार्थी पहले भी कई तकनीकी प्रोजेक्ट तैयार कर चुके हैं, जिनमें स्मार्ट डस्टबिन, ऑब्सटेकल अवॉइडिंग रोबोट, स्मार्ट होम ऑटोमेशन और वाटर प्रोपेल्ड रॉकेट शामिल हैं।

शिक्षक आशीष कुमार के प्रयासों और  विद्यार्थियों की वैज्ञानिक सोच बढ़ी है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उस लक्ष्य को मजबूत करती है, जिसमें  विद्यार्थियों को रटने के बजाय प्रयोग और नवाचार के जरिए सीखने पर जोर दिया गया है।-डॉ राकेश कुमार सिंह, बीएसए

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