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Aligarh News: चौदह वर्ष पुराने मुकदमे में पूर्व सांसद बरी, एमपी एमएलए कोर्ट ने सुनाया फैसला, यह है मामला

Mon, 26 Jun 2023 08:05 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Mon, 26 Jun 2023 08:05 PM IST
सार

मुकदमा गभाना के सहायक रिटर्निंग अधिकारी/एसडीएम गभाना उदयराज सिंह की तहरीर पर दर्ज किया गया। जिसमें आरोप था कि 25 मार्च 2009 के एक समाचार पत्र में खबर प्रकाशित हुई कि कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याशी चौ.बिजेंद्र सिंह ने बरौली क्षेत्र के गांव रामनगर, श्यामपुर, पोथा-पोथी, नगला बंजारा, लालपुर, मोहरैना में कई चुनावी सभाएं आयोजित की गईं। मगर इन सभाओं की उनके कार्यालय से अनुमति नहीं ली गई थी।

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Former Aligarh MP Bijendra Singh acquitted in fourteen years old case
पूर्व सांसद चौधरी बिजेंद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अलीगढ़ के पूर्व सांसद व सपा नेता बिजेंद्र सिंह को एमपीएमएलए कोर्ट ने आचार संहिता उल्लंघन के एक मुकदमे में बरी किया है। मामला 14 वर्ष पुराना है, जब बिजेंद्र सिंह कांग्रेस से सांसद रहते हुए लोकसभा का चुनाव लड़ रहे थे। तभी उन पर गभाना में आचार संहिता उल्लंघन का मुकदमा दर्ज हुआ था। एमपीएमएल मामलों की सुनवाई वाली विशेष अदालत के एसीएम प्रथम संदीप सिंह ने सोमवार को कमजोर साक्ष्यों के आधार पर बिजेंद्र सिंह को इस मुकदमे से बरी किया है। 

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यह मुकदमा गभाना के सहायक रिटर्निंग अधिकारी/एसडीएम गभाना उदयराज सिंह की तहरीर पर दर्ज किया गया। जिसमें आरोप था कि 25 मार्च 2009 के एक समाचार पत्र में खबर प्रकाशित हुई कि कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याशी चौ.बिजेंद्र सिंह ने बरौली क्षेत्र के गांव रामनगर, श्यामपुर, पोथा-पोथी, नगला बंजारा, लालपुर, मोहरैना में कई चुनावी सभाएं आयोजित की गईं। मगर इन सभाओं की उनके कार्यालय से अनुमति नहीं ली गई थी। इस पर कांग्रेस प्रत्याशी रहे चौ.बिजेंद्र सिंह को नोटिस देकर जवाब देने के लिए कहा गया। मगर उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया। 
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इस आधार पर आचार संहिता उल्लंघन व मतदाताओं को प्रभावित करने की धारा 188 व 171 च के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया। मामले में विवेचना द्वारा चार्जशीट दायर की गई। अदालत में चार्जशीट का संज्ञान लेकर विचारण किया गया। जिसमें कमजोर साक्ष्यों के आधार पर आरोपों का आधार नहीं पाया गया और न अभियोजन पक्ष कोई वीडियो फुटेज पेश कर सका। इस आधार पर चौ.बिजेंद्र सिंह को बरी कर दिया गया।
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ये चार गवाह किए गए पेश
अभियोजन की ओर से इस मुकदमे में तत्कालीन एसओ गभाना जसपाल सिंह पावार, एफआईआर लेखक रामदास यादव, विवेचक मदनपाल, वादी सेवानिवृत्त एसडीएम उदयराज सिंह पेश किए गए। ये सिर्फ अखबार की कटिंग के आधार पर आचार संहिता उल्लंघन की बात कह सके। न तो कोई वीडियो फुटेज था, न साक्षी थे और न यह बता सके कि वहां क्या हुआ था। अखबार की कटिंग पर भी घटना की दिनांक आदि नहीं दर्शा सके। इस आधार पर न्यायालय ने बचाव पक्ष की दलील स्वीकारते हुए बिजेंद्र सिंह को बरी किया है।

सांसद रहते चुनाव लड़े थे बिजेंद्र

सपा में आने से पहले बिजेंद्र सिंह वर्ष 2009 में कांग्रेस से अलीगढ़ के सांसद थे। उस दौरान वह कांग्रेस के सांसद भी थे और कांग्रेस की सीट पर लोकसभा का चुनाव भी लड़ रहे थे। उस दौरान प्रदेश में बसपा की सरकार थी। प्रदेश में मंत्री व मौजूदा बरौली विधायक ठा.जयवीर सिंह की पत्नी राजकुमार चौहान उस चुनाव को जीती थीं।

इसी चुनाव के एक मुकदमे में हो चुकी है सजा
वर्ष 2009 के ही चुनाव में गभाना के ही आचार संहिता उल्लंघन के एक मुकदमे में बिजेंद्र सिंह को दो माह की सजा हो चुकी है। यह सजा इसी वर्ष मार्च में इसी न्यायालय से सुनाई गई थी। जिसकी अपील बिजेंद्र सिंह की ओर से सत्र न्यायालय में की गई है। 

उस समय बसपा शासन काल में सत्ता के दबाव में मुझ पर मुकदमे दर्ज हुए थे। न्यायालय ने हमारी बात को सुना और समझा व सम्मान दिया। हम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हैं।-चौ.बिजेंद्र सिंह, पूर्व सांसद

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