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Aligarh News: पहली बार छात्राओं की उठी आवाज, यूनियन में मांगी हिस्सेदारी
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एएमयू।
- फोटो : Archive
वीमेंस कॉलेज की छात्राओं के प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को कुलपति प्रो. नईमा खातून से मुलाकात की। छात्राओं ने कॉलेज में अलग से छात्रसंघ चुनाव कराने के बजाय एएमयू छात्रसंघ के सभी पदों पर छात्राओं के लिए आरक्षण की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि छात्राओं को एएमयू छात्रसंघ व्यवस्था में समान भागीदारी का अवसर मिलना चाहिए। अलग-अलग चुनाव कराने के बजाय एएमयू छात्रसंघ के सभी पदों पर छात्राओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया जाए, ताकि वे भी छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकें और यूनिवर्सिटी से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात प्रभावी ढंग से रख सकें।
बता दें कि 2018 तक वीमेंस कॉलेज और एएमयू छात्र संघ का चुनाव अलग-अलग होता रहा है। इस बार भी अलग चुनाव होने हैं। एएमयू और वीमेंस काॅलेज के छात्रसंघों के लिए अलग-अलग मुख्य चुनाव अधिकारियों की नियुक्ति की जा चुकी है।
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मात्र पांच हजार रुपये में करना होगा चुनाव प्रचार
छात्रसंघ चुनाव में प्रत्याशियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी सीमित खर्च में 37 हजार छात्र-छात्राओं को साधने की। इसके लिए उन्हें मात्र पांच हजार रुपये खर्च करने की अनुमति होगी। चुनाव में प्रिंटेड चुनाव प्रचार सामग्री का भी इस्तेमाल प्रतिबंधित रहेगा। प्रत्याशी चुनाव में हाथ से बने पंफलेट, पोस्टर, बैनर के जरिये ही प्रचार कर सकेंगे।
फिलहाल, संभावित प्रत्याशी अपने स्तर से चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं। आठ वर्ष बाद चुनाव होने के कारण छात्र राजनीति में नए चेहरों का बोलबाला रहेगा। यूनिवर्सिटी के साथ वीमेंस कॉलेज में भी छात्रसंघ चुनाव होगा। यहां करीब 3100 छात्राएं पढ़ती हैं। यहां भी प्रत्याशियों को पांच हजार रुपये की खर्च सीमा में चुनाव लड़ना होगा।
प्रचार में दिखेगा पारंपरिक और डिजिटल रंग
छात्रसंघ चुनाव में प्रिंटेड प्रचार सामग्री पर रोक के कारण प्रत्याशियों को पारंपरिक तरीकों के साथ डिजिटल प्रचार माध्यमों का सहारा लेना होगा। खर्च की सीमा कम होने कारण सोशल मीडिया के जरिये ही अधिक से अधिक छात्रों तक अपनी बात पहुंचानी होगी। बहुत से संभावित प्रत्याशियों ने अभी से अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर संदेश, अपील और तस्वीरों की झड़ी लगा दी है। शेरवानी में तस्वीरें पोस्ट करने के साथ अपनी दावेदारी सामने रखने के लिए डिजिटल मंच पर सक्रियता बढ़ा दी है।
सोच समझकर करना होगा संसाधनों का इस्तेमाल
मुख्य चुनाव अधिकारी प्रो. जावेद तालिब ने बताया कि छात्रसंघ चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। एक-दो दिन में कोर कमेटी की बैठक होगी। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए 30 से ज्यादा चुनाव अधिकारी बनाए जाएंगे। लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप एक प्रत्याशी अधिकतम पांच हजार रुपये ही खर्च कर सकेगा। खर्च की सीमा और प्रचार सामग्री संबंधी नियमों के चलते प्रत्याशियों को अपने संसाधनों का इस्तेमाल सोच-समझकर करना होगा। चुनाव प्रचार के दौरान निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। चुनाव की प्रक्रिया 26 अक्तूबर से शुरू होगी। पांच नवंबर को मतदान होगा। उसी दिन मतगणना के बाद परिणाम की घोषणा की जाएगी।
ये हैं लिंगदोह कमेटी की प्रमुख सिफारिशें
-प्रत्याशी विश्वविद्यालय का नियमित और पूर्णकालिक विद्यार्थी होना चाहिए।
-स्नातक पाठ्यक्रम के 17 से 22 वर्ष की आयु के छात्र चुनाव लड़ सकते हैं।
-चार वर्षीय पाठ्यक्रम में 17 से 23 और पांच वर्षीय पाठ्यक्रम में 17 से 24 वर्ष के विद्यार्थी चुनाव में हिस्सा ले सकते हैं।
-स्नातकोत्तर छात्रों के लिए चुनाव लड़ने की अधिकतम आयु सीमा 25 वर्ष तय है।
-शोधार्थियों के लिए चुनाव लड़ने की अधिकतम आयु सीमा 28 वर्ष निर्धारित है।
-चुनाव वर्ष में प्रत्याशी का किसी भी तरह का कोई शैक्षणिक बकाया नहीं होना चाहिए।
-प्रत्याशी की कक्षाओं में न्यूनतम उपस्थिति 75 प्रतिशत या विश्वविद्यालय की ओर से तय की गई सीमा के अनुरूप होनी चाहिए।
-प्रत्याशी के पास पदाधिकारी के पद पर चुनाव लड़ने का एक ही मौका होगा। कार्यकारी सदस्य के पद पर चुनाव लड़ने के लिए अधिकतम दो अवसर होंगे।
-प्रत्याशियों का पूर्व में कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए।
दीवारों से मिटाए जा रहे नारे, जमीन पर अब भी आंदोलन के निशान
एएमयू में छात्रसंघ चुनाव की मांग के लिए 19 दिन तक चले छात्र आंदोलन के निशान धीरे-धीरे मिटाए जा रहे हैं। आंदोलन के दौरान परिसर में जगह-जगह दीवारों पर चुनाव की मांग संबंधी नारे लिखे गए थे। इन नारों को यूनिवर्सिटी प्रशासन रंगाई-पुताई के जरिये मिटाने में जुटा हुआ है। हालांकि, जमीन पर लिखे नारे और स्लोगन अभी भी बरकरार हैं। माना जा रहा है कि दीवारों के बाद इन्हें मिटाने की कवायद शुरू होगी।
सांसद चंद्रशेखर ने की यासिर से बात
आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद ने 19 दिन तक भूख हड़ताल पर बैठे यासिर फहद से वीडियो कॉल करके उनका कुशलक्षेम जाना। उन्होंने यासिर को शाबाशी दी। जेएन मेडिकल कॉलेज में यासिर का उपचार चल रहा है।
मैदान में उतरने के लिए दावेदार बेकरार
छात्रसंघ चुनाव की तारीख घोषित होते ही एएमयू में चुनावी रंग चढ़ने लगा है। चुनाव मैदान में उतरने के लिए दावेदार बेकरार हैं। चुनाव लड़ने वाले संभावित प्रत्याशियों के नाम सामने आने लगे हैं। अध्यक्ष पद के लिए मोहम्मद सलमान गौरी, हमजा जमशेद, सचिव पद के लिए मोहम्मद उमैर, कैबिनेट सदस्य पद के लिए अरमान अली खान, अब्दुल कादिर, आकिब खान, जाहिद रियाज के नाम सामने आ चुके हैं। आने वाले दिनों में अलग-अलग पदों पर प्रत्याशियों के नाम सामने आएंगे।
खूंटी पर टंगी शेरवानियों से झाड़ी धूल
संभावित दावेदारों ने वर्षों से खूंटी पर टंगी अपनी शेरवानियों से धूल झाड़नी शुरू कर दी है। कभी छात्रसंघ चुनाव की पहचान रही शेरवानी अब एक बार फिर चर्चा में है। एएमयू में आखिरी बार वर्ष 2018 में छात्रसंघ चुनाव हुआ था। इसके बाद से छात्रसंघ चुनाव का इंतजार कर रहे छात्रों को अब वर्ष 2026-27 के शैक्षणिक सत्र में चुनाव में भाग लेने का मौका मिल रहा है।
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प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि छात्राओं को एएमयू छात्रसंघ व्यवस्था में समान भागीदारी का अवसर मिलना चाहिए। अलग-अलग चुनाव कराने के बजाय एएमयू छात्रसंघ के सभी पदों पर छात्राओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया जाए, ताकि वे भी छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकें और यूनिवर्सिटी से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात प्रभावी ढंग से रख सकें।
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बता दें कि 2018 तक वीमेंस कॉलेज और एएमयू छात्र संघ का चुनाव अलग-अलग होता रहा है। इस बार भी अलग चुनाव होने हैं। एएमयू और वीमेंस काॅलेज के छात्रसंघों के लिए अलग-अलग मुख्य चुनाव अधिकारियों की नियुक्ति की जा चुकी है।
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मात्र पांच हजार रुपये में करना होगा चुनाव प्रचार
छात्रसंघ चुनाव में प्रत्याशियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी सीमित खर्च में 37 हजार छात्र-छात्राओं को साधने की। इसके लिए उन्हें मात्र पांच हजार रुपये खर्च करने की अनुमति होगी। चुनाव में प्रिंटेड चुनाव प्रचार सामग्री का भी इस्तेमाल प्रतिबंधित रहेगा। प्रत्याशी चुनाव में हाथ से बने पंफलेट, पोस्टर, बैनर के जरिये ही प्रचार कर सकेंगे।
फिलहाल, संभावित प्रत्याशी अपने स्तर से चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं। आठ वर्ष बाद चुनाव होने के कारण छात्र राजनीति में नए चेहरों का बोलबाला रहेगा। यूनिवर्सिटी के साथ वीमेंस कॉलेज में भी छात्रसंघ चुनाव होगा। यहां करीब 3100 छात्राएं पढ़ती हैं। यहां भी प्रत्याशियों को पांच हजार रुपये की खर्च सीमा में चुनाव लड़ना होगा।
प्रचार में दिखेगा पारंपरिक और डिजिटल रंग
छात्रसंघ चुनाव में प्रिंटेड प्रचार सामग्री पर रोक के कारण प्रत्याशियों को पारंपरिक तरीकों के साथ डिजिटल प्रचार माध्यमों का सहारा लेना होगा। खर्च की सीमा कम होने कारण सोशल मीडिया के जरिये ही अधिक से अधिक छात्रों तक अपनी बात पहुंचानी होगी। बहुत से संभावित प्रत्याशियों ने अभी से अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर संदेश, अपील और तस्वीरों की झड़ी लगा दी है। शेरवानी में तस्वीरें पोस्ट करने के साथ अपनी दावेदारी सामने रखने के लिए डिजिटल मंच पर सक्रियता बढ़ा दी है।
सोच समझकर करना होगा संसाधनों का इस्तेमाल
मुख्य चुनाव अधिकारी प्रो. जावेद तालिब ने बताया कि छात्रसंघ चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। एक-दो दिन में कोर कमेटी की बैठक होगी। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए 30 से ज्यादा चुनाव अधिकारी बनाए जाएंगे। लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप एक प्रत्याशी अधिकतम पांच हजार रुपये ही खर्च कर सकेगा। खर्च की सीमा और प्रचार सामग्री संबंधी नियमों के चलते प्रत्याशियों को अपने संसाधनों का इस्तेमाल सोच-समझकर करना होगा। चुनाव प्रचार के दौरान निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। चुनाव की प्रक्रिया 26 अक्तूबर से शुरू होगी। पांच नवंबर को मतदान होगा। उसी दिन मतगणना के बाद परिणाम की घोषणा की जाएगी।
ये हैं लिंगदोह कमेटी की प्रमुख सिफारिशें
-प्रत्याशी विश्वविद्यालय का नियमित और पूर्णकालिक विद्यार्थी होना चाहिए।
-स्नातक पाठ्यक्रम के 17 से 22 वर्ष की आयु के छात्र चुनाव लड़ सकते हैं।
-चार वर्षीय पाठ्यक्रम में 17 से 23 और पांच वर्षीय पाठ्यक्रम में 17 से 24 वर्ष के विद्यार्थी चुनाव में हिस्सा ले सकते हैं।
-स्नातकोत्तर छात्रों के लिए चुनाव लड़ने की अधिकतम आयु सीमा 25 वर्ष तय है।
-शोधार्थियों के लिए चुनाव लड़ने की अधिकतम आयु सीमा 28 वर्ष निर्धारित है।
-चुनाव वर्ष में प्रत्याशी का किसी भी तरह का कोई शैक्षणिक बकाया नहीं होना चाहिए।
-प्रत्याशी की कक्षाओं में न्यूनतम उपस्थिति 75 प्रतिशत या विश्वविद्यालय की ओर से तय की गई सीमा के अनुरूप होनी चाहिए।
-प्रत्याशी के पास पदाधिकारी के पद पर चुनाव लड़ने का एक ही मौका होगा। कार्यकारी सदस्य के पद पर चुनाव लड़ने के लिए अधिकतम दो अवसर होंगे।
-प्रत्याशियों का पूर्व में कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए।
दीवारों से मिटाए जा रहे नारे, जमीन पर अब भी आंदोलन के निशान
एएमयू में छात्रसंघ चुनाव की मांग के लिए 19 दिन तक चले छात्र आंदोलन के निशान धीरे-धीरे मिटाए जा रहे हैं। आंदोलन के दौरान परिसर में जगह-जगह दीवारों पर चुनाव की मांग संबंधी नारे लिखे गए थे। इन नारों को यूनिवर्सिटी प्रशासन रंगाई-पुताई के जरिये मिटाने में जुटा हुआ है। हालांकि, जमीन पर लिखे नारे और स्लोगन अभी भी बरकरार हैं। माना जा रहा है कि दीवारों के बाद इन्हें मिटाने की कवायद शुरू होगी।
सांसद चंद्रशेखर ने की यासिर से बात
आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद ने 19 दिन तक भूख हड़ताल पर बैठे यासिर फहद से वीडियो कॉल करके उनका कुशलक्षेम जाना। उन्होंने यासिर को शाबाशी दी। जेएन मेडिकल कॉलेज में यासिर का उपचार चल रहा है।
मैदान में उतरने के लिए दावेदार बेकरार
छात्रसंघ चुनाव की तारीख घोषित होते ही एएमयू में चुनावी रंग चढ़ने लगा है। चुनाव मैदान में उतरने के लिए दावेदार बेकरार हैं। चुनाव लड़ने वाले संभावित प्रत्याशियों के नाम सामने आने लगे हैं। अध्यक्ष पद के लिए मोहम्मद सलमान गौरी, हमजा जमशेद, सचिव पद के लिए मोहम्मद उमैर, कैबिनेट सदस्य पद के लिए अरमान अली खान, अब्दुल कादिर, आकिब खान, जाहिद रियाज के नाम सामने आ चुके हैं। आने वाले दिनों में अलग-अलग पदों पर प्रत्याशियों के नाम सामने आएंगे।
खूंटी पर टंगी शेरवानियों से झाड़ी धूल
संभावित दावेदारों ने वर्षों से खूंटी पर टंगी अपनी शेरवानियों से धूल झाड़नी शुरू कर दी है। कभी छात्रसंघ चुनाव की पहचान रही शेरवानी अब एक बार फिर चर्चा में है। एएमयू में आखिरी बार वर्ष 2018 में छात्रसंघ चुनाव हुआ था। इसके बाद से छात्रसंघ चुनाव का इंतजार कर रहे छात्रों को अब वर्ष 2026-27 के शैक्षणिक सत्र में चुनाव में भाग लेने का मौका मिल रहा है।