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अलीगढ़ : कल्याण के बिना पहला चुनाव, कई दिग्गजों का तय होगा सियासी कद
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अभिषेक शर्मा
1962 के बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा का यह पहला चुनाव है, जो बिना कल्याण सिंह के लड़ा गया। पिछले वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री के देहांत के बाद चुनाव मैदान में उनके पौत्र संदीप सिंह अतरौली से लड़े हैं। साथ में भाजपा के स्टार प्रचारक सूची में शामिल संदीप सिंह के पिता राजवीर सिंह राजू सहित जिले के कई सियासी दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर है। इस चुनाव का परिणाम इन सभी का सियासी कद तय करेगा। साथ ही जिन सीटों पर राजवीर सिंह राजू ने अपने समर्थकों को टिकट दिलवाया है, वह सीटें भी सीधे उन्हीं के वजूद से जुड़ी हैं।
1962 से अतरौली सीट से कल्याण सिंह ने सियासी सफर शुरू किया और वे प्रदेश के मुख्यमंत्री व राजस्थान के राज्यपाल तक बने। जिले की सभी सीटों के अलावा वे कासगंज, हाथरस, बुलंदशहर, एटा, फर्रुखाबाद, बदायूं, कन्नौज आदि जनपदों में टिकट वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका रखते थे। एक बार जब वे भाजपा से अलग होकर चुनाव लड़े तो इसका खामियाजा सीधे-सीधे भाजपा को उनके प्रभाव वाले क्षेत्र में देखने को मिला और पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। हालांकि उनकी वापसी के बाद पार्टी ने इस क्षेत्र में फिर वापसी दर्ज की। पिछले वर्ष कल्याण सिंह का देहांत हो गया। इसके बाद उनकी सियासी विरासत उनके पुत्र एटा सांसद राजवीर सिंह व पौत्र प्रदेश में मंत्री संदीप सिंह संभाल रहे हैं।
इस बार भी राजवीर सिंह की सिफारिश पर अलीगढ़ व आसपास के जिलों की कई सीटों पर टिकट बांटे गए। पार्टी ने उन्हें स्टार प्रचारक भी बनाया। उनके मंत्री पुत्र भी अपने चुनाव के बाद प्रदेश भर में चुनाव में सक्रिय रहे। इसके अलावा भाजपा में एमएलसी ठा.जयवीर सिंह, सांसद के करीबी खैर विधायक अनूप प्रधान, कांग्रेस से दिग्गज नेता राष्ट्रीय सचिव विवेक बंसल, सपा से प्रमुख उद्योगपति जफर आलम, घोषित टिकट कटवाकर अपना टिकट कराकर लाए अज्जू इशहाक आदि की प्रतिष्ठा दांव पर है। साथ में ये परिणाम इन सभी का सियासी कद भी तय करेगा। इसी तरह सभी मौजूदा विधायकों का सियासी कद भी ये चुनाव तय करेगा।
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एग्जिट पोल पर अपनी-अपनी राय
- बसपा जिले की सातों सीटें जीत रही है। प्रदेश में पूर्ण बहुमत से बहनजी की सरकार बन रही है। मतगणना की तैयारी जोरों पर हैं। प्रशासन द्वारा मतगणना एजेंटों की कोई जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए अब प्रत्याशियों के स्तर से कार्यवाही की जा रही है। - रतनदीप सिंह, जिलाध्यक्ष बसपा
- एग्जिट पोल दिखाने वाले भाजपा के एजेंट के रूप में कार्य कर रहे हैं। यह माइंड गेम हो रहा है। 10 मार्च को मतगणना के बाद सपा की सरकार बनने जा रही है। मतगणना के दिन हर टेबल, बैलेट पेपर टेबल पर एजेंट बन रहे हैं। बेईमानी नहीं होने दी जाएगी।-गिरीश यादव, जिलाध्यक्ष, सपा
एग्जिट पोल को सही नहीं मानते हैं। ऐसा एग्जिट पोल दिखाकर केवल मानसिक दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों पर बेईमानी करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। कुछ भी हो जाए, लेकिन बेईमानी नहीं करने देंगे। 240 सीटें गठबंधन की होंगी। - चौधरी कालीचरण सिंह, जिलाध्यक्ष, रालोद
- एग्जिट पोल कतई सही मानने योग्य नहीं हैं। इससे पहले पश्चिम बंगाल में भी इसी तरह मीडिया ने एग्जिट पोल दिखाए थे। मगर परिणाम सभी के सामने हैं। इस बार यूपी में कांग्रेस बेहद मजबूती से चुनाव लड़ी है और परिणाम बेहद बेहतर आएंगे। - संतोष सिंह, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस
- भाजपा जनपद की सभी सीटों पर जीत रही है। प्रदेश में पार्टी को 300 से अधिक सीटें मिल रही हैं। एग्जिट पोल से भी साफ हो गया है कि प्रदेश में फिर से भाजपा की सरकार बन रही है। आज हाथरस सांसद राजवीर दिलेर की मौजूदगी में प्रत्याशियों, एजेंटों, जिला एवं विधान सभा प्रभारियों के साथ ही इलेक्शन एजेंटों की बैठक हुई, जिसमें आगे की रणनीति तय की गई। बुधवार को मतगणना एजेंटों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक विधान सभा क्षेत्र से करीब बीस एजेंट मतगणना के दौरान मौजूद रहेंगे।-चौधरी ऋषिपाल सिंह, जिलाध्यक्ष, भाजपा
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1962 के बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा का यह पहला चुनाव है, जो बिना कल्याण सिंह के लड़ा गया। पिछले वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री के देहांत के बाद चुनाव मैदान में उनके पौत्र संदीप सिंह अतरौली से लड़े हैं। साथ में भाजपा के स्टार प्रचारक सूची में शामिल संदीप सिंह के पिता राजवीर सिंह राजू सहित जिले के कई सियासी दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर है। इस चुनाव का परिणाम इन सभी का सियासी कद तय करेगा। साथ ही जिन सीटों पर राजवीर सिंह राजू ने अपने समर्थकों को टिकट दिलवाया है, वह सीटें भी सीधे उन्हीं के वजूद से जुड़ी हैं।
1962 से अतरौली सीट से कल्याण सिंह ने सियासी सफर शुरू किया और वे प्रदेश के मुख्यमंत्री व राजस्थान के राज्यपाल तक बने। जिले की सभी सीटों के अलावा वे कासगंज, हाथरस, बुलंदशहर, एटा, फर्रुखाबाद, बदायूं, कन्नौज आदि जनपदों में टिकट वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका रखते थे। एक बार जब वे भाजपा से अलग होकर चुनाव लड़े तो इसका खामियाजा सीधे-सीधे भाजपा को उनके प्रभाव वाले क्षेत्र में देखने को मिला और पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। हालांकि उनकी वापसी के बाद पार्टी ने इस क्षेत्र में फिर वापसी दर्ज की। पिछले वर्ष कल्याण सिंह का देहांत हो गया। इसके बाद उनकी सियासी विरासत उनके पुत्र एटा सांसद राजवीर सिंह व पौत्र प्रदेश में मंत्री संदीप सिंह संभाल रहे हैं।
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इस बार भी राजवीर सिंह की सिफारिश पर अलीगढ़ व आसपास के जिलों की कई सीटों पर टिकट बांटे गए। पार्टी ने उन्हें स्टार प्रचारक भी बनाया। उनके मंत्री पुत्र भी अपने चुनाव के बाद प्रदेश भर में चुनाव में सक्रिय रहे। इसके अलावा भाजपा में एमएलसी ठा.जयवीर सिंह, सांसद के करीबी खैर विधायक अनूप प्रधान, कांग्रेस से दिग्गज नेता राष्ट्रीय सचिव विवेक बंसल, सपा से प्रमुख उद्योगपति जफर आलम, घोषित टिकट कटवाकर अपना टिकट कराकर लाए अज्जू इशहाक आदि की प्रतिष्ठा दांव पर है। साथ में ये परिणाम इन सभी का सियासी कद भी तय करेगा। इसी तरह सभी मौजूदा विधायकों का सियासी कद भी ये चुनाव तय करेगा।
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एग्जिट पोल पर अपनी-अपनी राय
- बसपा जिले की सातों सीटें जीत रही है। प्रदेश में पूर्ण बहुमत से बहनजी की सरकार बन रही है। मतगणना की तैयारी जोरों पर हैं। प्रशासन द्वारा मतगणना एजेंटों की कोई जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए अब प्रत्याशियों के स्तर से कार्यवाही की जा रही है। - रतनदीप सिंह, जिलाध्यक्ष बसपा
- एग्जिट पोल दिखाने वाले भाजपा के एजेंट के रूप में कार्य कर रहे हैं। यह माइंड गेम हो रहा है। 10 मार्च को मतगणना के बाद सपा की सरकार बनने जा रही है। मतगणना के दिन हर टेबल, बैलेट पेपर टेबल पर एजेंट बन रहे हैं। बेईमानी नहीं होने दी जाएगी।-गिरीश यादव, जिलाध्यक्ष, सपा
एग्जिट पोल को सही नहीं मानते हैं। ऐसा एग्जिट पोल दिखाकर केवल मानसिक दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों पर बेईमानी करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। कुछ भी हो जाए, लेकिन बेईमानी नहीं करने देंगे। 240 सीटें गठबंधन की होंगी। - चौधरी कालीचरण सिंह, जिलाध्यक्ष, रालोद
- एग्जिट पोल कतई सही मानने योग्य नहीं हैं। इससे पहले पश्चिम बंगाल में भी इसी तरह मीडिया ने एग्जिट पोल दिखाए थे। मगर परिणाम सभी के सामने हैं। इस बार यूपी में कांग्रेस बेहद मजबूती से चुनाव लड़ी है और परिणाम बेहद बेहतर आएंगे। - संतोष सिंह, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस
- भाजपा जनपद की सभी सीटों पर जीत रही है। प्रदेश में पार्टी को 300 से अधिक सीटें मिल रही हैं। एग्जिट पोल से भी साफ हो गया है कि प्रदेश में फिर से भाजपा की सरकार बन रही है। आज हाथरस सांसद राजवीर दिलेर की मौजूदगी में प्रत्याशियों, एजेंटों, जिला एवं विधान सभा प्रभारियों के साथ ही इलेक्शन एजेंटों की बैठक हुई, जिसमें आगे की रणनीति तय की गई। बुधवार को मतगणना एजेंटों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक विधान सभा क्षेत्र से करीब बीस एजेंट मतगणना के दौरान मौजूद रहेंगे।-चौधरी ऋषिपाल सिंह, जिलाध्यक्ष, भाजपा