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मिल के खरीददार ढूंढ़ो और बकाया भुगतान कराओ
आशीष निगम
Updated Tue, 11 Apr 2017 02:32 AM IST
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अमर उजाला में आनंद एग्रोकेम गोपी लधुआ चीनी मिल में हुए घपलों की जांच की मांग उठने के बाद मंडलायुक्त सुभाष चंद्र शर्मा सख्त हो गए हैं।
सोमवार को उन्होंने डीएम ऋषिकेष भास्कर याशोद, बरेली के गन्ना उपायुक्त दिनेश्वर मिश्रा, जिला गन्ना अधिकारी सुनील कुमार और अन्य अधिकारियों को बुला कर बकाया भुगतान की जानकारी की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हर हाल में मिल का खरीददार ढूंढ़ो और नीलाम करके किसानों का भुगतान करो।
इसकी जगह, उपकरण, मशीनरी की अलग-अलग नीलामी की जाए। मंडलायुक्त ने इसकी जिम्मेदारी डीएम को सौंपी कि वे नीलामी प्रक्रिया को पूरी करें।
मंडलायुक्त ने कहा है कि बीती 7 अप्रैल को कर करेत्तर की समीक्षा बैठक में उन्होंने अधिकारियों से इस संबंध में सवाल जवाब किया था, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई है। शिथिलता बर्दाश्त नहीं होगी। किसानों के भुगतान में फर्जीवाड़े के जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।
पुलिस रिपोर्ट दर्ज करा कर प्रभावी कार्रवाई होगी। गौर हो कि इस चीनी मिल पर किसानों का ब्याज सहित 43 करोड़ रुपये का बकाया है। जिसका सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी भुगतान नहीं हुआ है। यही नहीं मिल प्रबंधन ने 2.93 करोड़ रुपये के जिस भुगतान का ब्यौरा अदालत में दिया, उसमें भी अधिकांश भुगतान जांच में फर्जी पाये गये हैं।
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किसानों के बैंक खातों में रकम पहुंची ही नहीं है। बता दें कि मंडलायुक्त पूर्व में प्रदेश के गन्ना आयुक्त भी रह चुके हैं और उस वक्त से लगातार किसानों के बकाया भुगतान कराने का प्रयास करते रहे हैं।
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सोमवार को उन्होंने डीएम ऋषिकेष भास्कर याशोद, बरेली के गन्ना उपायुक्त दिनेश्वर मिश्रा, जिला गन्ना अधिकारी सुनील कुमार और अन्य अधिकारियों को बुला कर बकाया भुगतान की जानकारी की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हर हाल में मिल का खरीददार ढूंढ़ो और नीलाम करके किसानों का भुगतान करो।
इसकी जगह, उपकरण, मशीनरी की अलग-अलग नीलामी की जाए। मंडलायुक्त ने इसकी जिम्मेदारी डीएम को सौंपी कि वे नीलामी प्रक्रिया को पूरी करें।
मंडलायुक्त ने कहा है कि बीती 7 अप्रैल को कर करेत्तर की समीक्षा बैठक में उन्होंने अधिकारियों से इस संबंध में सवाल जवाब किया था, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई है। शिथिलता बर्दाश्त नहीं होगी। किसानों के भुगतान में फर्जीवाड़े के जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।
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पुलिस रिपोर्ट दर्ज करा कर प्रभावी कार्रवाई होगी। गौर हो कि इस चीनी मिल पर किसानों का ब्याज सहित 43 करोड़ रुपये का बकाया है। जिसका सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी भुगतान नहीं हुआ है। यही नहीं मिल प्रबंधन ने 2.93 करोड़ रुपये के जिस भुगतान का ब्यौरा अदालत में दिया, उसमें भी अधिकांश भुगतान जांच में फर्जी पाये गये हैं।
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किसानों के बैंक खातों में रकम पहुंची ही नहीं है। बता दें कि मंडलायुक्त पूर्व में प्रदेश के गन्ना आयुक्त भी रह चुके हैं और उस वक्त से लगातार किसानों के बकाया भुगतान कराने का प्रयास करते रहे हैं।