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अलीगढ़ः सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ किसानों ने किया प्रदर्शन
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विरोध प्रदर्शन कर कलक्ट्रेट जाते संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारी।
- फोटो : CITY OFFICE
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न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी, शहीद किसान परिवारों को मुआवजा, आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज केसों की वापसी की मांगों पर सरकार की ओर से तय सीमा में कोई कार्रवाई न होने से नाराज किसानों ने संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय आह्वान पर विश्वासघात दिवस मनाया। इस मौके पर किसान संगठनों ने सुभाष चौक से कलेक्ट्रेट तक संयुक्त विरोध रैली निकाली। इसके बाद कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी एवं मुख्यमंत्री योगी के विरोध में जमकर नारेबाजी की गई। इसके बाद एसीएम द्वितीय को राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन साैंपा।
किसानों नेताओं ने कहा कि शहीद किसान परिवारों को मुआवजा देने और किसान आंदोलन के दौरान किसानों से केस वापसी पर उत्तर प्रदेश सरकार ने कोई कार्रवाई शुरू नहीं की है। लखीमपुर खीरी हत्याकांड में एसआईटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में षड्यंत्र की बात स्वीकार करने के बावजूद इस कांड के प्रमुख आरोपी अजय मिश्र टेनी का केंद्रीय मंत्रिमंडल में बना रहना संवैधानिक और राजनैतिक मर्यादा के खिलाफ है। यह तो किसानों के घाव पर नमक छिड़कने का काम है। दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश पुलिस इस घटना में नामजद किसानों को केसों में फंसाने और गिरफ्तार करने का काम लगातार कर रही है। ज्ञापन के जरिए किसान संगठनों ने राष्ट्रपति से मांग की कि आप केंद्र सरकार को उसके लिखित वादों की याद दिलाएं और इन्हें जल्द से जल्द पूरा करवाएं। यदि सरकार अपने लिखित आश्वासन से मुकर जाती है तो किसानों के पास आंदोलन को दोबारा शुरू करने के सिवा और कोई रास्ता नहीं बचेगा।
इस मौके पर संयुक्त किसान मोर्चा की राज्य इकाई के नेता शशिकांत, क्रांतिकारी किसान यूनियन के चौ. गजेंद्र सिंह, कृपाल सिंह, किसान सभा के सूरजपाल उपाध्याय, इरफान अंसारी, एहतशाम बेग, भाकियू के पूर्व जिलाध्यक्ष विमल तोमर, मुनीम, राजवीर सिंह समेत बड़ी संख्या में किसान शामिल रहे।
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किसानों नेताओं ने कहा कि शहीद किसान परिवारों को मुआवजा देने और किसान आंदोलन के दौरान किसानों से केस वापसी पर उत्तर प्रदेश सरकार ने कोई कार्रवाई शुरू नहीं की है। लखीमपुर खीरी हत्याकांड में एसआईटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में षड्यंत्र की बात स्वीकार करने के बावजूद इस कांड के प्रमुख आरोपी अजय मिश्र टेनी का केंद्रीय मंत्रिमंडल में बना रहना संवैधानिक और राजनैतिक मर्यादा के खिलाफ है। यह तो किसानों के घाव पर नमक छिड़कने का काम है। दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश पुलिस इस घटना में नामजद किसानों को केसों में फंसाने और गिरफ्तार करने का काम लगातार कर रही है। ज्ञापन के जरिए किसान संगठनों ने राष्ट्रपति से मांग की कि आप केंद्र सरकार को उसके लिखित वादों की याद दिलाएं और इन्हें जल्द से जल्द पूरा करवाएं। यदि सरकार अपने लिखित आश्वासन से मुकर जाती है तो किसानों के पास आंदोलन को दोबारा शुरू करने के सिवा और कोई रास्ता नहीं बचेगा।
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इस मौके पर संयुक्त किसान मोर्चा की राज्य इकाई के नेता शशिकांत, क्रांतिकारी किसान यूनियन के चौ. गजेंद्र सिंह, कृपाल सिंह, किसान सभा के सूरजपाल उपाध्याय, इरफान अंसारी, एहतशाम बेग, भाकियू के पूर्व जिलाध्यक्ष विमल तोमर, मुनीम, राजवीर सिंह समेत बड़ी संख्या में किसान शामिल रहे।
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