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कलेक्ट्रेट पर जमे किसान, हिले अफसर
जट्टारी/अलीगढ़
Updated Tue, 23 Jun 2015 01:39 AM IST
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कलेक्ट्रेट पर जमे किसान, हिले अफसर
अमर उजाला ब्यूरो
जट्टारी/अलीगढ़। टप्पल क्षेत्र में यमुना के उस पार हरियाणा के किसानों द्वारा कब्जाई गई अपनी सैकड़ों एकड़ जमीन को वापस लेने के लिए आंदोलित गांव धारागढ़ी के किसानों ने सोमवार को कलेक्ट्रेट को घेर लिया। सुबह से ही कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वारा पर डेरा डाले किसान और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच दोपहर तीन बजे तक हाई वोल्टेज ड्रामा चला। विधायक दलवीर सिंह की मौजूदगी में डीएम के साथ हुई वार्ता विफल होने के बाद एडीएम प्रशासन ने वार्ता को सफल बनाया। एडीएम द्वारा जिला प्रशासन की एक समिति का गठन होने, हरियाणा प्रशासन से बात कर मदद कराने और मामले की पूरी पैरवी की घोषणा के बाद ही आंदोलन खत्म हुआ। इस दौरान कलेक्ट्रेट छावनी बना रहा। बड़े-बड़े अफसरों घंटों तक किसानों से मनुहार करते रहे। हरियाणा के किसानों के कब्जे से अपनी 480 एकड़ जमीन वापस लेने के लिए 8 जून से आमरण अनशन पर बैठे गांव धारागढ़ी के सैकड़ों किसान महिला और बच्चों सहित सोमवार की सुबह सात बजे कलेक्ट्रेट पर आमरण अनशन करने पहुंच गए। कठुपुला-जमालपुर रोड जाम कर दिया। घबराए जिला प्रशासन ने आनन-फानन में बड़ी संख्या में फोर्स तैनात करा दिया। सिटी मजिस्ट्रेट हिमांशु गौतम, एसडीएम-सीओ खैर, तहसीलदार सहित पूरा प्रशासनिक अमला किसानों को मनाने कलेक्ट्रेट के बाहर आ गया। आंदोलित किसान टस से मस नहीं हुए। करीब साढ़े 11 बजे डीएम डा. बलकार सिंह ने किसानों को वार्ता के लिए बुलाया। रालोद विधायक दलवीर सिंह चौधरी की मौजूदगी में किसानों की ओर से राष्ट्रीय महान गणतंत्र पार्टी के चुनाव समिति अध्यक्ष वीरपाल गहलौत, प्रमोद कुमार, अशोक निषाद , हरी सिंह, कल्लू सिंह, रामचंद्र की डीएम से वार्ता हुई। इस वार्ता में आंदोलन के मुख्य कर्ताधर्ता एवं राष्ट्रीय महान गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आनंद निषाद ने तबियत खराब होने का हवाला देकर वार्ता में भाग नहीं लिया। सिटी मजिस्ट्रेट हिमांशु गौतम, सीओ खैर आदि को आशंका थी कि आनंद निषाद नहीं आए तो वार्ता सफल नहीं होगी। लेकिन वार्ता में आए अन्य किसान नेताओं ने डीएम को इस भरोसे में ले लिया कि वह उनसे बाहर नहीं हैं। किसान चाहते थे कि जमीन जब तक वापस नहीं हो रही है तब तक हरियाणा के किसान उस पर खेती नहीं कर पाएं यह सुनिश्चित हो जाए। डीएम ने समझाया कि यह उच्च स्तर का मामला है। इसके निस्तारण को कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर जो भी किया जा सकता है वह अलीगढ़ प्रशासन करेगा। वार्ता कर निकले किसानों ने प्रशासन का पक्ष आनंद निषाद और अनशन पर बैठे किसानों को सुनाया। आनंद निषाद के साथ सभी ने अनशन खत्म करने से इंकार कर दिया। किसानों के परिवार के बच्चे और महिलाएं सड़क से हटे तक नहीं। बच्चे सड़क पर ही खाना खा रहे थे। वे भी जमीन की जंग की तपिश में धूप में जलते रहे। डीएम से वार्ता के बाद भी अनशन खत्म नहीं हुआ तो सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ खैर ने फिर से प्रयास शुरू किए। आनंद निषाद ने ऐलान किया कि वह बात करेंगे फिर कोई निर्णय होगा। प्रशासन भी यही चाहता था। आनंद निषाद की एडीएम प्रशासन संजय चौहान से वार्ता कराई गई। विधायक भी इसमें शामिल हुए। एडीएम ने बताया कि उनकी अध्यक्षता वाली समिति बुधवार को तहसील खैर में धारागढ़ी के किसानों के भू अभिलेख देखेगी। उनकी समस्याएं सुनेगी। इसमें एसपी देहात, एसडीएम और तहसीलदार सहित पांच सदस्य होंगे। डीसी पलवल से मंगलवार को किसानों की मुलाकात तय कराई गई। इसके अलावा जरूरत पर शासन और न्यायालय में भी जोरदार पैरवी की जाएगी। किसान इस बात पर सहमत हुए कि वह आगे की वार्ता और पैरवी के लिए पांच सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल का गठन कर लेंगे। वार्ता के बाद आनंद निषाद ने सिटी मजिस्ट्रेट ,एसडीएम और सीओ की मौजूदगी में अनशन खत्म करने का ऐलान कर दिया।
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अमर उजाला ब्यूरो
जट्टारी/अलीगढ़। टप्पल क्षेत्र में यमुना के उस पार हरियाणा के किसानों द्वारा कब्जाई गई अपनी सैकड़ों एकड़ जमीन को वापस लेने के लिए आंदोलित गांव धारागढ़ी के किसानों ने सोमवार को कलेक्ट्रेट को घेर लिया। सुबह से ही कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वारा पर डेरा डाले किसान और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच दोपहर तीन बजे तक हाई वोल्टेज ड्रामा चला। विधायक दलवीर सिंह की मौजूदगी में डीएम के साथ हुई वार्ता विफल होने के बाद एडीएम प्रशासन ने वार्ता को सफल बनाया। एडीएम द्वारा जिला प्रशासन की एक समिति का गठन होने, हरियाणा प्रशासन से बात कर मदद कराने और मामले की पूरी पैरवी की घोषणा के बाद ही आंदोलन खत्म हुआ। इस दौरान कलेक्ट्रेट छावनी बना रहा। बड़े-बड़े अफसरों घंटों तक किसानों से मनुहार करते रहे। हरियाणा के किसानों के कब्जे से अपनी 480 एकड़ जमीन वापस लेने के लिए 8 जून से आमरण अनशन पर बैठे गांव धारागढ़ी के सैकड़ों किसान महिला और बच्चों सहित सोमवार की सुबह सात बजे कलेक्ट्रेट पर आमरण अनशन करने पहुंच गए। कठुपुला-जमालपुर रोड जाम कर दिया। घबराए जिला प्रशासन ने आनन-फानन में बड़ी संख्या में फोर्स तैनात करा दिया। सिटी मजिस्ट्रेट हिमांशु गौतम, एसडीएम-सीओ खैर, तहसीलदार सहित पूरा प्रशासनिक अमला किसानों को मनाने कलेक्ट्रेट के बाहर आ गया। आंदोलित किसान टस से मस नहीं हुए। करीब साढ़े 11 बजे डीएम डा. बलकार सिंह ने किसानों को वार्ता के लिए बुलाया। रालोद विधायक दलवीर सिंह चौधरी की मौजूदगी में किसानों की ओर से राष्ट्रीय महान गणतंत्र पार्टी के चुनाव समिति अध्यक्ष वीरपाल गहलौत, प्रमोद कुमार, अशोक निषाद , हरी सिंह, कल्लू सिंह, रामचंद्र की डीएम से वार्ता हुई। इस वार्ता में आंदोलन के मुख्य कर्ताधर्ता एवं राष्ट्रीय महान गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आनंद निषाद ने तबियत खराब होने का हवाला देकर वार्ता में भाग नहीं लिया। सिटी मजिस्ट्रेट हिमांशु गौतम, सीओ खैर आदि को आशंका थी कि आनंद निषाद नहीं आए तो वार्ता सफल नहीं होगी। लेकिन वार्ता में आए अन्य किसान नेताओं ने डीएम को इस भरोसे में ले लिया कि वह उनसे बाहर नहीं हैं। किसान चाहते थे कि जमीन जब तक वापस नहीं हो रही है तब तक हरियाणा के किसान उस पर खेती नहीं कर पाएं यह सुनिश्चित हो जाए। डीएम ने समझाया कि यह उच्च स्तर का मामला है। इसके निस्तारण को कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर जो भी किया जा सकता है वह अलीगढ़ प्रशासन करेगा। वार्ता कर निकले किसानों ने प्रशासन का पक्ष आनंद निषाद और अनशन पर बैठे किसानों को सुनाया। आनंद निषाद के साथ सभी ने अनशन खत्म करने से इंकार कर दिया। किसानों के परिवार के बच्चे और महिलाएं सड़क से हटे तक नहीं। बच्चे सड़क पर ही खाना खा रहे थे। वे भी जमीन की जंग की तपिश में धूप में जलते रहे। डीएम से वार्ता के बाद भी अनशन खत्म नहीं हुआ तो सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ खैर ने फिर से प्रयास शुरू किए। आनंद निषाद ने ऐलान किया कि वह बात करेंगे फिर कोई निर्णय होगा। प्रशासन भी यही चाहता था। आनंद निषाद की एडीएम प्रशासन संजय चौहान से वार्ता कराई गई। विधायक भी इसमें शामिल हुए। एडीएम ने बताया कि उनकी अध्यक्षता वाली समिति बुधवार को तहसील खैर में धारागढ़ी के किसानों के भू अभिलेख देखेगी। उनकी समस्याएं सुनेगी। इसमें एसपी देहात, एसडीएम और तहसीलदार सहित पांच सदस्य होंगे। डीसी पलवल से मंगलवार को किसानों की मुलाकात तय कराई गई। इसके अलावा जरूरत पर शासन और न्यायालय में भी जोरदार पैरवी की जाएगी। किसान इस बात पर सहमत हुए कि वह आगे की वार्ता और पैरवी के लिए पांच सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल का गठन कर लेंगे। वार्ता के बाद आनंद निषाद ने सिटी मजिस्ट्रेट ,एसडीएम और सीओ की मौजूदगी में अनशन खत्म करने का ऐलान कर दिया।