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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Elderly Bai climbed on the roof of the temple in front of Sadhvi Prachi.

Aligarh: साध्वी प्राची के सामने बुजुर्ग बाई मंदिर की छत पर चढ़ी, आत्महत्या का किया प्रयास, यह है वजह

Mon, 11 Sep 2023 01:53 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Mon, 11 Sep 2023 01:53 AM IST
सार

शोकसभा में शामिल होने आईं साध्वी प्राची के सामने जबरदस्त विरोध हुआ, नाथ संप्रदाय की 85 वर्षीय बुजुर्ग बाई मंदिर की छत पर चढ़ गईं और आत्महत्या का ऐलान कर दिया। 

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Elderly Bai climbed on the roof of the temple in front of Sadhvi Prachi.
छत से कूदने का प्रयास करती प्रेमनाथ बाई को रोकती पुलिस - फोटो : संवाद

विस्तार

अलीगढ़ महानगर के सासनी गेट पंच नगरी इलाके में नाथ संप्रदाय की देखरेख में संचालित बाबा गोरखनाथ मंदिर परिसर में शोकसभा की तैयारी रविवार को विरोध-हंगामे का कारण बन गई। शोकसभा में शामिल होने आईं साध्वी प्राची के सामने जबरदस्त विरोध हुआ, नाथ संप्रदाय की 85 वर्षीय बुजुर्ग बाई मंदिर की छत पर चढ़ गईं और आत्महत्या का ऐलान कर दिया। 

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एक पड़ोसी ने भी कह दिया कि मंदिर में शोकसभा के लिए लोग उनकी लाश के ऊपर से होकर प्रवेश कर पाएंगे। हंगामे को देखते हुए पुलिस प्रशासन के अधिकारी मौके पर आ गए। साध्वी प्राची को समझाया गया और बुजुर्ग बाई को किसी तरह समझाकर नीचे उतारा गया। बाद में मंदिर के सामने सड़क पर शोकसभा हुई। तब जाकर लोग भीड़ वहां से हटी। 
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हुआ यूं कि मंदिर पर काफी समय से पुजारी व देखरेख का जिम्मा संभाल रहे सराय मिश्र के रहने वाले योगेश माहौर की पिछले दिनों मौत हो गई। इस पर उनके समर्थकों व परिवार ने इस शोकसभा का आयोजन रखा था। जिसमें साध्वी प्राची को बुलाया गया। पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत दोपहर ढाई बजे करीब साध्वी मंदिर पर पहुंचीं। जब मंदिर में ही रहने वाली नाथ संप्रदाय की 85 वर्षीय प्रेमा बाई व आस पड़ोस के लोगों को जानकारी हुई कि मंदिर में शोकसभा की तैयारी है तो लोग इसके विरोध में आ गए। लोगों का तर्क था कि सनातन परंपरा के अनुसार मंदिर में कभी शोकसभा नहीं होती। सनातन परंपरा के अनुसार किसी मौत या जन्म पर परिवारों में सूतक लगते हैं और सूतक समाप्ती तक घरों में पूजा तक नहीं होती। हां, मंदिर में हवन यज्ञ जरूर कर सकते हैं। 
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सासनी गेट स्थित लोधीपुरम में मलरिया वाला आश्रम में भारत गोस्वमी से बात करती साध्वी प्रा

विरोध की खबर पर सिटी मजिस्ट्रेट, सीओ प्रथम, इंस्पेक्टर सासनी गेट मौके पर पहुंच गए। मगर शोकसभा करने वाला पक्ष व साध्वी मंदिर में शोकसभा की जिद पर थे। यह देख प्रेमा बाई मंदिर की छत पर चढ़ गईं और आत्महत्या का ऐलान कर दिया। मंदिर के ही पड़ोसी दिनेश चंद्र वाष्र्णेय ने तो यहां तक ऐलान कर दिया कि शोकसभा के लिए मंदिर में जाने से पहले उनकी लाश से गुजरना होगा। 

हंगामा बढ़ता देख पुलिस प्रशासन के लोगों ने धर्माचार्यों से साध्वी की बात कराई। सभी का सुझाव था कि मंदिर में शोकसभा न की जाए। इसके बाद साध्वी प्राची व शोकसभा आयोजकों ने मंदिर के बाहर सडक़ पर ही योगेश माहौर की तस्वीर रखकर शोकसभा की। तब जाकर माहौल सामान्य हुआ। इस दौरान आयोजक पक्ष से जगदीश माहौर, भाजपा नेता संजू बजाज, जबकि विरोधी पक्ष से भरत गोस्वामी आदि मौजूद रहे।

ये है विवाद की मुख्य वजह

इस विवाद की वजह पर अगर गौर करें तो नाथ संप्रदाय के महंत इस मंदिर के मुख्य कर्ता धर्ता हुआ करते थे। उनका 2013 में देहांत हो गया। उस समय उनके साथ नाथ संप्रदाय की बाई प्रेमा मंदिर की देखरेख में रहती थीं। साथ में सराय मिश्र के ही योगेश माहौर भी उनका सहयोग करते थे। मुख्य महंत के देहांत के कुछ समय बाद प्रेमा बाई हरिद्वार चली गईं। फिर पूरी जिम्मेदारी योगेश निभाने लगे। इस दौरान योगेश ने मंदिर के बाहर कुछ दुकानें भी बनवाईं और मंदिर की आय को ध्यान में रखकर उन्हें किराये पर उठा दिया। 

सासनी गेट स्थित लोधीपुरम में मलरिया वाला आश्रम में लोगों से बातचीत करती साध्वी प्राची

चार-पांच माह पहले प्रेमा बाई यहां लौटीं तो उन्हें मंदिर में प्रवेश का योगेश ने विरोध कर दिया। स्थानीय लोगों की शिकायत और पुलिस के सहयोग से प्रेमा बाई को मंदिर में उनके कमरे में रुकवाया गया। तब से दोनों में तनातनी बनी हुई थी। इसी तनातनी में योगेश पक्ष ने प्रेमा बाई के सहयोगी लोगों पर एससीएसटी का एक मुकदमा भी दर्ज कराया था। जिसमें पुलिस ने चार्जशीट लगा दी। इधर, 28 अगस्त को योगेश की मंदिर में ही तबीयत बिगड़ी। इस पर खुद प्रेमाबाई ने उनके बच्चों को खबर दी। उन्हें सासनी गेट के अस्पताल ले जाया गया। जहां छह सात दिन में उनकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने ब्रेन हेमरेज वजह बताया। परिवार ने मामले में हत्या का आरोप लगाया तो पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया। उसमें भी बीमारी आई। 

बावजूद इसके परिवार ने प्रेमा बाई व उनके समर्थकों पर गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज करा दिया। कहना था कि उन्हीं के तनाव में ब्रेन हेमरेज हुआ है। इसी वजह से इस मामले में दो पक्ष बने हुए हैं। इस मामले में साध्वी प्राची ने मौके पर ही पुलिस प्रशासन से कहा कि उनकी मौत के मामले में सच्चाई से जांच की जाए, जो सच हो। वही किया जाए। किसी दबाव में काम करने की जरूरत नहीं है। इस विषय को उन्होंने मुख्यमंत्री के सामने रखने का भी ऐलान किया।

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