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अलीगढ़ः दूल्हे हुए तैयार... दुल्हन का इंतजार

Sun, 14 Nov 2021 02:10 AM IST
amar ujala/aligarh Published by: अलीगढ़ ब्यूरो Updated Sun, 14 Nov 2021 02:10 AM IST
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Devouthhan
एक शोरूम में शेरवानी पसंद करते डॉ. बाल कृष्ण गौर साथ में परिजन। - फोटो : CITY OFFICE
आज देवोत्थान एकादशी है। हिंदु मान्यताओं के अनुसार चार महीने बाद रविवार को देव जागेंगे। उठो देव, जागो देव जयकारों से जहां श्रद्धालु पूजा अर्चना करेंगे। वहीं देव के जागने से विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और मांगलिक कार्य प्रारंभ होंगे। इससे पहले शहर के बाजारों में शादी विवाह से संबंधित जमकर खरीदारी हुई। दूल्हा शेरवानी, दुल्हन लहंगा-चोरी तो अन्य लोग सूट, कुर्ता, जैकेट आदि खरीदते मिले। रविवार को कई दूल्हा शोरूमों में तैयार हुए। जिन्हें अब दुल्हन का इंतजार है।
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देवोत्थान एकादशी के मौके पर जनपद में आज बैंड-बाजा बज उठेंगे। नाचते गाते हुए बराती अपने-अपने दुल्हों की बारात निकालेंगे। सोमवार को बड़ा सहालग है। जनपद में अधिकांश मैरिज होम, गेस्ट हाउस, होटल बुक हो गए हैं। इससे पहले रविवार को शहर के रेलवे रोड और सेंटर प्वाइंट क्षेत्र के विभिन्न बाजारों में लोगों ने जमकर खरीदारी की। रेलवे रोड पर तो जाम जैसे हालात रहे। हर कोई अपने-अपने लिए विभिन्न वैरायटी के कपड़े, जूते, परफ्यूम, घड़ी आदि खरीद रहा था। महिलाओं ने मेकअप का सामान, पर्स, सैंडिल, लहंगा-चोली, साड़ी आदि की खरीदारी की। इसके अलावा बैंड-बाजा संचालकों ने रिहर्सल की। जबकि कैटर्स, हलवाई, मजदूर, डेकोरेशन वालों ने शादी को लेकर तैयारियां की। आयोजन स्थलों पर राशन का सामान पहुंचने लगा है। कैमरामैन, लाइट डेकोरेशन, डीजे, आरके स्ट्रा पार्टी आदि की बुकिंग से भी खुशी की लहर है। यह सहालग कोरोना काल के नुकसान की भरपाई करने वाला सबसे अच्छा समय बताया जा रहा है। जबकि आज एकादशी के मौके पर श्रद्धालु भघवान विष्णु की पूजा अर्चना करेंगे। शाम को पकवान, गन्ना और मौसमी फलों के भोग लगाने की तैयारी महिलाओं ने की।
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आज पूजा करने की यह है विधि
- श्री गुरू ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि पूरे घर की साफ सफाई कर चूना, गेरू और खड़िया से देवोत्थान का चित्र बनाते हैं या फिर बाजार से भी कैलेंडर मिल जाता है। घर में मुख्य द्वार तक फूल-पत्तियां, बेलों की सुंदर आकर्षक रंगोली, देवी देवताओं के पैरों के निशान बनाते हैं। चावल, गुड़, मूली, बैंगन, शकरकंदी, सिंघाड़ा, चने की सब्जी, बेर, गन्ना पूजा में रखते हैं। चित्र और सामान को डलिया या परात (चलनी) से ढक देते हैं। चारों ओर घी के दीपक जलाने के बाद घर की सभी महिलाएं एक साथ बैठकर देवों को उठाती हैं और डलिया के ऊपर हाथों की अंगुलियां उलट पलट के मारते हुए कहती हैं कि उठो देव-जागो देव, बैठो देव, पामरिया चटकाओ देव, देवसोय चारों मास-जिसके बाद डलिया सीधा करके रख देती हैं। हल्दी, चावल, घी से पूजा करती हैं। गन्ने के रस से देवी-देवताओं पर धार लगाते हैं। ऐसी स्थिति में चित्र पर रस से भोग लगाना चाहिए। माताएं बहने प्रभु के जागने की खुशी में नाच गाकर भजन गाती हैं।
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