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बर्खास्त कर्मचारी ने की आत्महत्या
Sun, 19 May 2019 01:35 AM IST
राजेश सिंह
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
Published by: राजेश सिंह
Updated Sun, 19 May 2019 01:35 AM IST
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दिलीप का फाइल फोटो
- फोटो : Amar Ujala
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नगर पालिका खैर से बर्खास्त किए गए 25 वर्षीय कर्मचारी ने विषाक्त पदार्थ खाकर जान दे दी। हालांकि कोर्ट के स्थगन आदेश पर वह बगैर वेतन के काम कर रहे थे लेकिन परिजनों के अनुसार नौकरी को लेकर कई माह से तनाव की स्थिति में थे। पुलिस ने पंचनामा भरकर शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया है।
गांव नगौला निवासी अवधेश गौतम पुत्र सुरंजनलाल गौतम के दो पुत्र मदन और दिलीप थे। दिलीप गौतम वर्ष 2017 में तत्कालीन चेयरमैन पंकज पवार व ईओ गुलशन सूरी के कार्यकाल में नगर पालिका में क्लर्क के रूप में नौकरी में लगे थे। उनके साथ 27 और कर्मचारी भी नौकरी पर रखे गए थे। दिसंबर में चुनाव होने पर संजीव अग्रवाल चेयरमैन बने तो उन्होंने पूर्व में हुई नियुक्तियां में रुपये लिए जाने और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की।
जांच हुई तो अधिशाषी अधिकारी ने 28 कर्मचारियों की नियुक्ति फर्जी व असंवैधानिक बताते हुए सभी को बर्खास्त कर दिया था। इस संबंध में एक जांच एडीएम प्रशासन के स्तर पर विचाराधीन है। उधर प्रभावित कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में वाद दायर किया। कोर्ट ने एडीएम प्रशासन की जा रही जांच पूरी होने तक स्थगन आदेश दिया था। इसके बाद से सभी कर्मचारी बगैर वेतन के पालिका में काम कर रहे थे।
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परिजनों के अनुसार बर्खास्तगी की वजह से दिलीप कई माह से परेशान थे। शुक्रवार की शाम उन्होंने विषाक्त पदार्थ खा लिया। मुंह से झाग निकलता देख परिजन सीएचसी लेकर भागे, जहां से मलखान सिंह जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। अस्पताल पहुंचने से पहले मौत हो गई। दिलीप की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। मृतक के पिता होडल के खटेला सराय स्थित एक बैंक में गार्ड की नौकरी करते हैं।
नौकरी के लिए 11 लाख रुपये दिए थे दिलीप ने
परिजनों के अनुसार दिलीप ने नगर पालिका में नौकरी पाने के लिए 11 लाख रुपये दिए थे। इसके लिए अपने हिस्से में आए सवा तीन बीघे पैतृक खेत बेच दिए थे। बर्खास्त होेने के बाद उन्होंने उस व्यक्ति से रुपये मांगने शुरू कर दिए जिसे नौकरी की एवज में रुपये दिए थे। बताते हैं कि उस व्यक्ति ने 20 दिन पहले दिलीप को 11 लाख रुपये का चेक दिया था जो खाते में रुपया न होने पर बाउंस हो गया था।
तभी से दिलीप अधिक तनाव में थे। शनिवार को दिलीप के अंतिम संस्कार के बाद परिजन व सहयोगी रुपये लेने वाले व्यक्ति की तलाश में जुटे थे। दोपहर में टेटीगांव तिराहे के निकट स्थित एक नर्सिंग होम से उसे पकड़ लिया गया। सूत्रों के अनुसार उसने पांच लाख रुपये परिजनों को वापस कर दिए हैं। छह लाख रुपये तीन-चार दिन में वापस देने की बात तय हुई है। कुछ गणमान्य लोगों ने रुपये दिलवाने की जिम्मेदारी ली है।
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गांव नगौला निवासी अवधेश गौतम पुत्र सुरंजनलाल गौतम के दो पुत्र मदन और दिलीप थे। दिलीप गौतम वर्ष 2017 में तत्कालीन चेयरमैन पंकज पवार व ईओ गुलशन सूरी के कार्यकाल में नगर पालिका में क्लर्क के रूप में नौकरी में लगे थे। उनके साथ 27 और कर्मचारी भी नौकरी पर रखे गए थे। दिसंबर में चुनाव होने पर संजीव अग्रवाल चेयरमैन बने तो उन्होंने पूर्व में हुई नियुक्तियां में रुपये लिए जाने और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की।
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जांच हुई तो अधिशाषी अधिकारी ने 28 कर्मचारियों की नियुक्ति फर्जी व असंवैधानिक बताते हुए सभी को बर्खास्त कर दिया था। इस संबंध में एक जांच एडीएम प्रशासन के स्तर पर विचाराधीन है। उधर प्रभावित कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में वाद दायर किया। कोर्ट ने एडीएम प्रशासन की जा रही जांच पूरी होने तक स्थगन आदेश दिया था। इसके बाद से सभी कर्मचारी बगैर वेतन के पालिका में काम कर रहे थे।
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परिजनों के अनुसार बर्खास्तगी की वजह से दिलीप कई माह से परेशान थे। शुक्रवार की शाम उन्होंने विषाक्त पदार्थ खा लिया। मुंह से झाग निकलता देख परिजन सीएचसी लेकर भागे, जहां से मलखान सिंह जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। अस्पताल पहुंचने से पहले मौत हो गई। दिलीप की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। मृतक के पिता होडल के खटेला सराय स्थित एक बैंक में गार्ड की नौकरी करते हैं।
नौकरी के लिए 11 लाख रुपये दिए थे दिलीप ने
परिजनों के अनुसार दिलीप ने नगर पालिका में नौकरी पाने के लिए 11 लाख रुपये दिए थे। इसके लिए अपने हिस्से में आए सवा तीन बीघे पैतृक खेत बेच दिए थे। बर्खास्त होेने के बाद उन्होंने उस व्यक्ति से रुपये मांगने शुरू कर दिए जिसे नौकरी की एवज में रुपये दिए थे। बताते हैं कि उस व्यक्ति ने 20 दिन पहले दिलीप को 11 लाख रुपये का चेक दिया था जो खाते में रुपया न होने पर बाउंस हो गया था।
तभी से दिलीप अधिक तनाव में थे। शनिवार को दिलीप के अंतिम संस्कार के बाद परिजन व सहयोगी रुपये लेने वाले व्यक्ति की तलाश में जुटे थे। दोपहर में टेटीगांव तिराहे के निकट स्थित एक नर्सिंग होम से उसे पकड़ लिया गया। सूत्रों के अनुसार उसने पांच लाख रुपये परिजनों को वापस कर दिए हैं। छह लाख रुपये तीन-चार दिन में वापस देने की बात तय हुई है। कुछ गणमान्य लोगों ने रुपये दिलवाने की जिम्मेदारी ली है।