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राजा महेंद्र प्रताप ने कोई जमीन एएमयू को दी है, मुझसे कभी जिक्र नहीं किया: प्रो. इरफान हबीब 

Wed, 16 Sep 2020 01:44 AM IST
राजेश सिंह न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़। Published by: राजेश सिंह Updated Wed, 16 Sep 2020 01:44 AM IST
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raja mahedra pratap
एएमयू - फोटो : अलीगढ़/ब्यूरो
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय द्वारा राजा महेंद्र प्रताप के वंशजों को लीज पर ली गई जमीन वापस देने की तैयारियों के बीच ही प्रसिद्ध इतिहासकार प्रोफेसर इरफान हबीब ने इसमें ही दिलचस्प तथ्य और जोड़ दिया है। 90 वर्षीय प्रोफेसर इरफान हबीब ने अमर उजाला से हुई खास बातचीत में कहा है कि राजा महेंद्र प्रताप ने उनसे कभी इस बात का जिक्र नहीं किया कि उन्होंने कोई जमीन अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को दी है।
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उन्होंने कहा कि 1962 में राजा महेंद्र प्रताप को पार्लियामेंट का चुनाव उन्होंने लड़वाया था। राजा साहब के साथ उनके अच्छे संबंध रहे। उनके पिता प्रोफेसर हबीब के भी राजा महेंद्र प्रताप के साथ बहुत अच्छे संबंध थे, लेकिन जहां तक विश्वविद्यालय को कोई जमीन देने का सवाल है कभी भी इस बात का कोई जिक्र उन्होंने नहीं किया। उन्होंने कहा जहां तक जमीन लेने और देने का सवाल है तो लीज के दस्तावेज होते हैं। जिन्होंने दी होगी उनके पास कागज होंगे ।
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यह मामला लेने वाले और देने वालों के बीच का है। प्रोफेसर इरफान हबीब ने कहा कि राजा महेंद्र प्रताप मोहमडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज में छात्र रहे। उसके बाद 1914 में काबुल चले गए और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1946 में आजादी से कुछ दिन पहले वह भारत आ गए थे। इस तरह राजा महेंद्र प्रताप ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा देश से बाहर ही गुजारा। अब इस बीच जमीन देने और लेने की प्रक्रिया कब हुई, इसमें वह कुछ नहीं कह सकते हैं। 
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1928 में शुरू हुआ था सिटी स्कूल   
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के बन्नादेवी स्थित सिटी स्कूल के मैदान की जमीन को राजा महेंद्र प्रताप के वंशजों को वापस करने की तैयारियों के साथ ही कई तरह की सुगबुगाहट भी शुरू हो गई है। तहसील के पीछे की यह करीब साढे़ 5 बीघा जमीन इस समय करोड़ों रुपये की है। विश्वविद्यालय का संपत्ति विभाग इस जमीन के संबंध में हुई लीज के प्रावधानों का गहन अध्ययन करने में जुट गया है। सिटी स्कूल मौजूदा समय में जिस जगह पर है, वहां पर 1928 में स्थापित हुआ था इस तरह कुछ लोग लीज की अवधि 2027 तक आंक रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रकाशन इन सभी का अध्ययन करने में जुटा है। 

नेहरू के सहयोगी एएम ख्वाजा का स्कूल की स्थापना में योगदान  
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के बन्नादेवी स्थित सिटी स्कूल की स्थापना में जवाहरलाल नेहरू के सहयोगी और कैंब्रिज में उनके साथ पढ़ने वाले अलीगढ़ के अब्दुल मजीद ख्वाजा का भी अहम योगदान रहा है। स्कूल 1889 में मौलाना बहादुर अली द्वारा अंजुमन ए इस्लामिया प्राइमरी स्कूल के रूप में शुरू किया गया था। 1919 में इसको मोहमडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की सिटी ब्रांच के रूप में स्थापित किया गया। बन्नादेवी स्थित मौजूदा बिल्डिंग में 1928 में स्कूल को लाया गया। जिस के विषय में कहा जाता है कि यह भूमि राजा महेंद्र प्रताप ने लीज पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को दी थी।  



7 साल पहले ही लीज के स्वामित्व का मुकदमा जीता था  
7 साल पहले ही अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने सिटी स्कूल की साढ़े 5 बीघा जमीन पर अपने लीज पर होने का मुकदमा हाईकोर्ट से जीता था। जिसके बाद लाखों रुपये खर्च करके इस जमीन की बाउंड्रीवॉल कराई थी। इससे पहले नगर निगम ने यहां पर अपना कूड़ा डंपिंग यार्ड बना रखा था। किसी समय यहां पर सिटी स्कूल के बच्चों का फुटबॉल का मैदान था।
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