मिंटो स्कूल के पूर्व प्रिंसिपल की नृशंस हत्या
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एएमयू के मिंटो सर्किल स्कूल में 2012 से पहले तक प्रिंसिपल के पद पर तैनात रहे शफीक अहमद यहां के बाद कतर में जाकर बस गए थे। वहां किसी स्कूल में ही प्रिंसिपल रहे। सात माह पूर्व वह वापस यहां आकर रहने लगे। इन दिनों वह तैयब कॉलोनी में मकान बनवा रहे थे।
पांच दिन पूर्व उनकी पत्नी नुजहत अहमद अपने साढ़े तीन साल के नवासे के साथ अपने मायके कोटा राजस्थान गईं। तभी से वह अकेले थे, जबकि दोनों बेटे दिल्ली में जॉब करते हैं। विवाहित बेटी आतिया अहमद का बच्चे के जन्म के समय ही इंतकाल हो गया था। तभी से नवासा नाना-नानी के पास ही रह रहा था।
मंगलवार सुबह करीब दस बजे रोजाना की तरह दूध वाला दरवाजे पर पहुंचा और आवाज लगाने पर अंदर से कोई नहीं आया तो उसने दरवाजे को धकेला। अंदर का नजारा उसे कुछ असहज लगा तो उसने पड़ोसी फ्लैट की महिला को बुलाकर अंदर भेजा। वह महिला अंदर का नजारा देख चीख पड़ी।
शफीक अहमद की खून से लथपथ लाश बेडरूम में बेड के सहारे अलमीरा से सटी औंधी पड़ी थी। उनकी गर्दन में एक कपड़े की बेल्ट बंधी थी, जिससे गर्दन को अलमीरा के हैंडल से बांधा गया था। उनकी बेरहमी से गला रेत व नुकीली वस्तु गर्दन में भेदकर हत्या की गई थी।
सूचना पर एसएसपी, एसपी सिटी, सीओ तृतीय, इंस्पेक्टर सिविल लाइंस आदि के अलावा फील्ड यूनिट भी पहुंच गई। घंटों तक जांच पड़ताल चली। बाद में दिल्ली से उनके दोनों बेटे भी आ गए।
इंस्पेक्टर सिविल लाइंस सूर्यकांत द्विवेदी के अनुसार बड़े बेटे अशद ने अपने बहनोई मो.नासिर निवासी कायमगंज फर्रुखाबाद को शक में नामजद करते हुए आरोप लगाया है कि बहन की मौत के बाद से बहन का बेटा अम्मी-अब्बू के पास रह रहा था। उस बेटे को वापस लेने के लिए बहनोई लगातार दबाव बना रहा था। फोन पर पिता को जान से मारने की धमकियां भी देता था। हालांकि वह कहीं विदेश में किसी बैंक में नौकरी करता है। इन दिनों कहां है कुछ पता नहीं है। मगर शक है कि हत्या उसी ने कराई है।