{"_id":"5a56729a4f1c1b00198b45cd","slug":"kashmiri-teacher-has-also-found-allegations","type":"story","status":"publish","title_hn":"कश्मीरी शिक्षक पर भी लग चुके हैं आरोप ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
कश्मीरी शिक्षक पर भी लग चुके हैं आरोप
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Thu, 11 Jan 2018 01:48 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आतंकी संगठन में शामिल हुए शोध छात्र मन्नान बशीर वानी का प्रकरण सामने आने के बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के एक कश्मीरी शिक्षक का मामला एक बार फिर चर्चा में हैं। उन पर आरोप लगा था कि वे कक्षा में छात्रों को सेना के खिलाफ भड़काते हैं और आपसी घृणा को उकसाने वाली बातें करते हैं। वह शिक्षक विषय को पढ़ाने के बजाय केंद्र सरकार एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी कटु आलोचना भी करते हैं। लिखित शिकायत होने के बावजूद उन पर कोई खास कार्रवाई नहीं की गई थी। इतने संवेदनशील मसले पर एएमयू इंतजामिया के नरम रुख पर सवाल भी उठाए गए थे।
मामला एएमयू के इस्लामिक स्टडीज विभाग का है। फरवरी 2016 में बीए चतुर्थ सत्र के छात्रों ने कश्मीर के मूल निवासी एक शिक्षक पर कक्षा में देशविरोधी बातें करने का आरोप लगाया था। छात्रों का कहना था कि उक्त शिक्षक क्लास में मुस्लिम समुदाय के छात्रों की ब्रेनवॉशिंग में ज्यादा दिलचस्पी लेते हैं। वह राष्ट्रविरोधी वाक्य बोलते हैं।
उक्त शिक्षक बाबरी मस्जिद विध्वंस का उल्लेख कर कहते हैं कि आप लोग नाम के मुसलमान हैं, असली मुसलमान तो हम कश्मीरी हैं। वह सेना के खिलाफ छात्रों को भड़काते हैं और घृणा की राजनीति करते हैं। वह शिक्षक क्लास में केंद्र सरकार एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कटु आलोचना भी करते हैं।
विज्ञापन
छात्रों ने इसकी लिखित शिकायत तत्कालीन विभागाध्यक्ष प्रो. एस एहसन से की थी। विभागाध्यक्ष ने अपनी टिप्पणी के साथ शिकायत को डीन व कुलपति के पास अग्रसारित कर दिया था। उसके बाद दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई। करीब एक साल तक शिक्षक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई तो कुछ छात्रों ने मार्च 2017 में आरटीआई के अंतर्गत सूचना मांगकर खलबली मचा दी। बाद में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा सफाई दी गई थी कि कुलपति जमीरउद्दीन शाह ने शिक्षक को अपने कार्यालय में तलब कर भविष्य में क्लास में संवेदनशील मसले नहीं उठाने की हिदायत दी थी।
हालांकि उस समय लोगों ने इंतजामिया के नरम रुख पर सवाल उठाए थे। दबी जुबान में यह भी चर्चा हुई थी कि एक बड़े अधिकारी के प्रभाव के कारण शिक्षक के प्रति नरम रुख अपनाया गया। नाम न छापने की शर्त पर एक शिक्षक ने बताया कि इस मामले की नए सिरे से जांच होनी चाहिए।
विज्ञापन
मामला एएमयू के इस्लामिक स्टडीज विभाग का है। फरवरी 2016 में बीए चतुर्थ सत्र के छात्रों ने कश्मीर के मूल निवासी एक शिक्षक पर कक्षा में देशविरोधी बातें करने का आरोप लगाया था। छात्रों का कहना था कि उक्त शिक्षक क्लास में मुस्लिम समुदाय के छात्रों की ब्रेनवॉशिंग में ज्यादा दिलचस्पी लेते हैं। वह राष्ट्रविरोधी वाक्य बोलते हैं।
विज्ञापन
उक्त शिक्षक बाबरी मस्जिद विध्वंस का उल्लेख कर कहते हैं कि आप लोग नाम के मुसलमान हैं, असली मुसलमान तो हम कश्मीरी हैं। वह सेना के खिलाफ छात्रों को भड़काते हैं और घृणा की राजनीति करते हैं। वह शिक्षक क्लास में केंद्र सरकार एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कटु आलोचना भी करते हैं।
विज्ञापन
छात्रों ने इसकी लिखित शिकायत तत्कालीन विभागाध्यक्ष प्रो. एस एहसन से की थी। विभागाध्यक्ष ने अपनी टिप्पणी के साथ शिकायत को डीन व कुलपति के पास अग्रसारित कर दिया था। उसके बाद दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई। करीब एक साल तक शिक्षक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई तो कुछ छात्रों ने मार्च 2017 में आरटीआई के अंतर्गत सूचना मांगकर खलबली मचा दी। बाद में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा सफाई दी गई थी कि कुलपति जमीरउद्दीन शाह ने शिक्षक को अपने कार्यालय में तलब कर भविष्य में क्लास में संवेदनशील मसले नहीं उठाने की हिदायत दी थी।
हालांकि उस समय लोगों ने इंतजामिया के नरम रुख पर सवाल उठाए थे। दबी जुबान में यह भी चर्चा हुई थी कि एक बड़े अधिकारी के प्रभाव के कारण शिक्षक के प्रति नरम रुख अपनाया गया। नाम न छापने की शर्त पर एक शिक्षक ने बताया कि इस मामले की नए सिरे से जांच होनी चाहिए।