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जेल के अस्पताल में बंदी ने फांसी लगाकर दी जान

Sat, 04 Aug 2018 01:14 AM IST
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़। Updated Sat, 04 Aug 2018 01:14 AM IST
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jel ke aspataal mein bandee ne phaansee lagaakar dee jaan
जेल के अस्पताल में बंदी ने फांसी लगाकर दी जान - फोटो : Dig Vishal
एक दिन पहले ही न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार भेजे गए एक बंदी ने जेल के अंदर स्थित अस्पताल के बेड की चादर से फांसी लगाकर शुक्रवार शाम आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि वह चरस का आदी था। नशा न मिलने के कारण उसके तनाव में होने की बात कही जा रही है। इस बंदी को 14 अगस्त को अदालत में प्रस्तुत होना था। इससे जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। मृतक बंदी का पंचनामा भरवा कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
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 वरिष्ठ जेल अधीक्षक आलोक सिंह ने बताया कि जोहराबाग के रहने वाले मो. फुरकान पुत्र इस्लाम खां को थाना क्वार्सी पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत अदालत में प्रस्तुत किया और यहां से उसे गुरुवार को जेल भेज दिया गया। उसे जीवनगढ़ पुलिया के पास राजा नगर से प्रतिबंधित डायजापाम पाउडर सहित गिरफ्तार किया गया था।
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जेल में जब फुरकान को लाया गया तो पाया कि उसके हाथ की एक अंगुली किसी चीज से कट गई थी। इस कारण उसे जेल अस्पताल ले जाया गया। फुरकान की अंगुली की अस्पताल में ड्रेसिंग की गई। तय हुआ कि एक-दो बार और ड्रेसिंग की जाएगी। इसलिए उसे अस्पताल में ही रखा गया। शुक्रवार को शाम करीब 6 बजे फुरकान अस्पताल के पीछे बने रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट की ओर पहुं्चा। वहां प्लांट की रेलिंग में अस्पताल के बेड की चादर को बांध कर खुद को फांसी लगा ली। जब उसे इस तरह लटका देखा तो जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया।
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उसे फंदे से उतारा गया। तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। साथी बंदियों ने बताया कि वह कल से ही चुपचाप था। किसी से भी बात नहीं कर रहा था। तनाव के चलते ही उसने यह आत्मघाती कदम उठाया। इसके अलावा पुलिस जांच में प्रथमदृष्टया यह भी आया है कि फुरकान चरस का आदी था। 22 वर्ष की उम्र में उसका वजन मात्र 40 किलो था। गुरुवार की सुबह वह हवालात में था। शाम को उसे जेल लाया गया। इस दौरान उसे चरस नहीं मिली। शुक्रवार को भी पूरे दिन उसे नशा नहीं मिला। इसी के चलते उसने यह कदम उठा लिया। फुरकान के परिजनों को सूचित कर दिया गया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। 


सन 2012 में भी बंदी ने की थी आत्महत्या
 जिला कारागार में इससे पहले सन 2012 में आत्महत्या करने का मामला प्रकाश में आया था। उस समय समाजवादी पार्टी की सरकार बनी थी। एसपी यादव जेल अधीक्षक थे। गोंडा क्षेत्र का एक बंदी एनडीपीएस में ही बंद हुआ था। वह भी नशे का ही आदी था। उस घटना के बाद यह जेल के अंदर आत्महत्या की दूसरी घटना है। 
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