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मुख्य सरगना का सचिवालय में था आना-जाना
Updated Tue, 28 Aug 2018 02:08 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
रोडवेज में फर्जी टिकट रैकेट के खुलासा के दौरान पकड़े में आए सरगना देवेंद्र सिंह के हाथ कितने लंबे हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसका सचिवालय में लगातार आना जाना था। एक साल पूर्व जब फर्जी टिकट की शिकायत परिवहन मंत्री एवं परिवहन निगम के एमडी से की गई। इससे पहले वह सचिवालय में गया था। इसके साक्ष्य ‘अमर उजाला’ के पास मौजूद हैं। एसटीएफ के सूत्र भी कहते हैं कि यही कारण है कि अभी तक किसी बड़े अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही नहीं हुई है।
रोडवेज में पिछले 2006 से चल रहे फर्जी टिकट रैकेट का खुलासा भले ही एसटीएफ ने कर दिया हो, लेकिन एसटीएफ भी उन रैकेट से जुड़े बड़े अधिकारियों पर हाथ डालने से कतरा रही है। इस रैकेट में सचिवालय में मौजूद कुछ अधिकारी भी शामिल हैं। जिनके आशीर्वाद से यह रैकेट संचालित हो रहा था। साक्ष्यों के अनुसार 22 नवंबर 2017 को परिवहन मंत्री एवं एमडी से इसकी शिकायत हुई थी।
इससे पूर्व 25 व 27 अगस्त 2017 को देवेंद्र सिंह सचिवालय में अधिकारियों से मिलने के लिए गया था। सचिवालय में मौजूद अधिकारियों के आशीर्वाद के कारण ही इतनी शिकायतों के बाद भी यह रैकेट संचालित था और अभी तक मंडलीय स्तर के अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही नहीं हुई है। हालांकि रैकेट का खुलासा का होने के बाद मंडलीय अधिकारियों के होश फाख्ता है, लेकिन उन्हें यकीन है कि सचिवालय में बैठे उनके आका उन्हें बचा लेंगे।
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साथ ही निगम के कर्मचारियों में चर्चा है कि इस मामले में सचिवालय में मौजूद अधिकारियों का नाम भी सामने आएगा। इसलिए एसटीएफ भी फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। यदि सचिवालय में मौजूद अधिकारियों का नाम सामने आता है तो सरकार की बड़ी किरकिरी होगी। इसलिए कुछेक लोगों की बलि चढ़ाकर इस मामले को शांत करने का प्रयास चल रहा है।
मुख्यालय में तैनात एक जीएम के पुत्र की सेवा में लगा है निगम का चपरासी
महानगर में तैनात दो अधिकारी वर्तमान में परिवहन निगम के मुख्यालय में जीएम पद पर बैठे हुए हैं। बताया जाता है कि दोनों के पास ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। सूत्रों की माने तो दोनों ही अधिकारियों के यहां मुख्य सरगना और उनके गुर्गो का आना-जाना था। सूत्रों को तो यहां तक कहना है कि मुख्यालय में बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारी तो यहां से स्थानांतरण होकर चले गए, लेकिन उनके पुत्र की सेवा में परिवहन निगम की चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी आज भी लगा हुआ है। उक्त कर्मचारी भले ही परिवहन निगम से तनख्वाह लेता हो, लेकिन सेवा उक्त अधिकारी के पुत्र की कर रहा है।
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रोडवेज में फर्जी टिकट रैकेट के खुलासा के दौरान पकड़े में आए सरगना देवेंद्र सिंह के हाथ कितने लंबे हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसका सचिवालय में लगातार आना जाना था। एक साल पूर्व जब फर्जी टिकट की शिकायत परिवहन मंत्री एवं परिवहन निगम के एमडी से की गई। इससे पहले वह सचिवालय में गया था। इसके साक्ष्य ‘अमर उजाला’ के पास मौजूद हैं। एसटीएफ के सूत्र भी कहते हैं कि यही कारण है कि अभी तक किसी बड़े अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही नहीं हुई है।
रोडवेज में पिछले 2006 से चल रहे फर्जी टिकट रैकेट का खुलासा भले ही एसटीएफ ने कर दिया हो, लेकिन एसटीएफ भी उन रैकेट से जुड़े बड़े अधिकारियों पर हाथ डालने से कतरा रही है। इस रैकेट में सचिवालय में मौजूद कुछ अधिकारी भी शामिल हैं। जिनके आशीर्वाद से यह रैकेट संचालित हो रहा था। साक्ष्यों के अनुसार 22 नवंबर 2017 को परिवहन मंत्री एवं एमडी से इसकी शिकायत हुई थी।
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इससे पूर्व 25 व 27 अगस्त 2017 को देवेंद्र सिंह सचिवालय में अधिकारियों से मिलने के लिए गया था। सचिवालय में मौजूद अधिकारियों के आशीर्वाद के कारण ही इतनी शिकायतों के बाद भी यह रैकेट संचालित था और अभी तक मंडलीय स्तर के अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही नहीं हुई है। हालांकि रैकेट का खुलासा का होने के बाद मंडलीय अधिकारियों के होश फाख्ता है, लेकिन उन्हें यकीन है कि सचिवालय में बैठे उनके आका उन्हें बचा लेंगे।
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साथ ही निगम के कर्मचारियों में चर्चा है कि इस मामले में सचिवालय में मौजूद अधिकारियों का नाम भी सामने आएगा। इसलिए एसटीएफ भी फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। यदि सचिवालय में मौजूद अधिकारियों का नाम सामने आता है तो सरकार की बड़ी किरकिरी होगी। इसलिए कुछेक लोगों की बलि चढ़ाकर इस मामले को शांत करने का प्रयास चल रहा है।
मुख्यालय में तैनात एक जीएम के पुत्र की सेवा में लगा है निगम का चपरासी
महानगर में तैनात दो अधिकारी वर्तमान में परिवहन निगम के मुख्यालय में जीएम पद पर बैठे हुए हैं। बताया जाता है कि दोनों के पास ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। सूत्रों की माने तो दोनों ही अधिकारियों के यहां मुख्य सरगना और उनके गुर्गो का आना-जाना था। सूत्रों को तो यहां तक कहना है कि मुख्यालय में बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारी तो यहां से स्थानांतरण होकर चले गए, लेकिन उनके पुत्र की सेवा में परिवहन निगम की चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी आज भी लगा हुआ है। उक्त कर्मचारी भले ही परिवहन निगम से तनख्वाह लेता हो, लेकिन सेवा उक्त अधिकारी के पुत्र की कर रहा है।