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नोटिस का जवाब न देने पर कराएंगे देश द्रोह का मुकदमा
Updated Sun, 01 Apr 2018 02:04 AM IST
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क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
डॉ. सदफ फातिमा पत्नी चौ. इफराहीम हुसैन को नोटिस के जवाब में आधी अधूरी जानकारी दी गई है। इस संबंध में शिकायतकर्ता के अधिवक्ता धनवीर सिंह ने एएमयू के कुलपति को 15 दिन में नोटिस का जवाब न दिए जाने पर व्यवहारिया देश द्रोह का मुकदमा दर्ज कराने को मजबूर होंगी।
अधिवक्ता के अनुसार, व्यवहारिया ने एएमयू में नौकरी के लिए डिप्टी रजिस्ट्रार, डिप्टी फाइनेंस आफिसर, ऑडिट ऑफिसर, असिस्टेंट प्रोफेसर आदि पदों पर आवेदन किए थे और आवेदनों के आधार पर एएमयू के वीसी द्वारा निर्देशन 8.7.2013 को एएमयू के चयन समिति द्वारा चुना गया और नियुक्ति के लिए संबंधित अधिकारी डिप्टी रजिस्ट्रार नॉन टीचिंग आरिफुद्दीन अहमद जो मेरी व्यवहारिया के शिकायती प्रार्थना पत्र में आरोपी नंबर 6 बनाया गया है, के पास चयन समिति एएमयू द्वारा इस आशय का पत्र भेजा गया कि मेरी व्यवहारिया को ऑन एडहॉकबेस नियुक्ति दे दें।
लेकिन मेरी व्यवहारिया द्वारा एएमयू में अपात्र व फर्जी शैक्षिक प्रपत्रों के आधार नियुक्तियां करने का विरोध करने की रंजिश में मेरी व्यवहारिया को विश्वविद्यालय में नियुक्ति नहीं दी गई। निबंधक एएमयू द्वारा जानबूझ कर राज्यपाल, लोकसभा अध्यक्ष के आदेशों को न मानकर उन्हेें गुमराह किया जा रहा है। झूठी आख्या प्रस्तुत कर दी गई है।
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डॉ. सदफ फातिमा पत्नी चौ. इफराहीम हुसैन को नोटिस के जवाब में आधी अधूरी जानकारी दी गई है। इस संबंध में शिकायतकर्ता के अधिवक्ता धनवीर सिंह ने एएमयू के कुलपति को 15 दिन में नोटिस का जवाब न दिए जाने पर व्यवहारिया देश द्रोह का मुकदमा दर्ज कराने को मजबूर होंगी।
अधिवक्ता के अनुसार, व्यवहारिया ने एएमयू में नौकरी के लिए डिप्टी रजिस्ट्रार, डिप्टी फाइनेंस आफिसर, ऑडिट ऑफिसर, असिस्टेंट प्रोफेसर आदि पदों पर आवेदन किए थे और आवेदनों के आधार पर एएमयू के वीसी द्वारा निर्देशन 8.7.2013 को एएमयू के चयन समिति द्वारा चुना गया और नियुक्ति के लिए संबंधित अधिकारी डिप्टी रजिस्ट्रार नॉन टीचिंग आरिफुद्दीन अहमद जो मेरी व्यवहारिया के शिकायती प्रार्थना पत्र में आरोपी नंबर 6 बनाया गया है, के पास चयन समिति एएमयू द्वारा इस आशय का पत्र भेजा गया कि मेरी व्यवहारिया को ऑन एडहॉकबेस नियुक्ति दे दें।
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लेकिन मेरी व्यवहारिया द्वारा एएमयू में अपात्र व फर्जी शैक्षिक प्रपत्रों के आधार नियुक्तियां करने का विरोध करने की रंजिश में मेरी व्यवहारिया को विश्वविद्यालय में नियुक्ति नहीं दी गई। निबंधक एएमयू द्वारा जानबूझ कर राज्यपाल, लोकसभा अध्यक्ष के आदेशों को न मानकर उन्हेें गुमराह किया जा रहा है। झूठी आख्या प्रस्तुत कर दी गई है।
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