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स्त्री को बना दिया विज्ञापन की वस्तु: नमिता

Sun, 15 Oct 2017 02:03 AM IST
Updated Sun, 15 Oct 2017 02:03 AM IST
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स्त्री को बना दिया विज्ञापन की वस्तु: नमिता
स्त्री को बना दिया विज्ञापन की वस्तु : नमिता
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।

स्त्रीवाद का अर्थ स्त्रियों के लिए समान अधिकार व उनका कानूनी संरक्षण है। कृषि आधारित सामंती व्यवस्था में स्त्री केवल संतान उत्पत्ति का साधन थी। लगभग दो सौ वर्षों के लंबे संघर्षों के बाद स्त्री को समान लोकतांत्रिक अधिकार मिले और सश्क्तीकरण की दिशा में प्रगति हुई, लेकिन आज उपभोक्तावादी व्यवस्था ने स्त्री को भी उत्पाद के रूप में बदल दिया है और उसे बाजार व विज्ञापन की वस्तु बना दिया है।

ये बातें एएमयू के हिंदी विभाग के शिव कुमार शांडिल्य कुमार कक्ष में साहित्यकार नमिता सिंह ने अपनी नई पुस्तक ‘स्त्री प्रश्न’ के विमोचन के अवसर पर आयोजित गोष्ठी में कहीं। जनवादी लेखक संघ, प्रगतिशील लेखक संघ व जन संस्कृति मंच की ओर से ‘उपभोक्तावादी समाज में स्त्री-संघर्ष’ विषय पर आयोजित गोष्ठी में ‘स्त्री-प्रश्न’ पुस्तक पर प्रो. अजय बिसारिया ने कहा कि नमिता सिंह साहित्यकार होने के साथ पिछले 40 वर्षों से सामाजिक क्षेत्र में भी सक्रिय हैं और विभिन्न संगठनों के माध्यम से हर वर्ग की स्त्रियों के बीच काम करने के अनुभवों को आज के प्रचलित विमर्श से एक अलग रूप दिया है।
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सामान्यतया प्रचलित स्त्री विमर्श मध्य ओर उच्च मध्यवर्ग की समस्याओं पर केंद्रित होता है, लेकिन इस पुस्तक में हाशिये के वंचित समाज की स्त्रियां, उनके स्वास्थ्य, रोजगार, यौनिक हिंसा जैसे विषयों पर चर्चा की गई है। डॉ. जया प्रियदर्शिनी ने कहा कि लेखिका ने पिछली पीढ़ियों की उन अनाम स्त्रियों के जीवन की चर्चा भी की है, जिन्होंने आज की नई पीढ़ी के लिए संघर्ष का रास्ता बनाया।
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शिक्षाविद् प्रो. जकिया सिद्दीकी ने कहा कि अपनी पहचान बनाने का संघर्ष ही स्त्रियों को आगे बढ़ाता है। पिछड़ापन दूर करने के लिए स्त्री-शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता बहुत जरूरी है। हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. अब्दुल अलीम ने स्त्री अधिकारों के प्रति समाज के पढ़े लिखे लोगों को संवेदनशील होने की जरूरत पर बल दिया और कहा कि सबके संयुक्त प्रयासों से ही इसे प्रगति मिल सकती है।


डॉ. दीपशिखा सिंह, प्रो. समी रफीक, पत्रकार देवादित्य (दिल्ली), प्रो. तसनीम सुहेल ने पुस्तक की चर्चा की। इस मौके पर प्रो. कमलानंद झा, प्रो. आसिम सिद्दीकी, प्रो. प्रदीप सक्सेना, प्रो. सगीर अफराहीम, प्रो. एम. शाहुल हमीद, डॉ. सीमा सगीर, प्रो. सिराज अजमली, डॉ. प्रेम कुमार, प्रो. राजीव शुक्ल, प्रो. रेशमा बेगम, डॉ. निर्मला कुमारी, डॉ. मंजू शर्मा, डॉ. रामवीर सिंह, डॉ जावेद आलम, डॉ. शहबाज अली खान, डॉ. फातिमा जेहरा, नीलोफर उस्मानी आदि मौजूद रहीं।
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