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बैलेस्टिक रिपोर्ट आ गई..फिर भी क्यों दी गलत रिपोर्ट
Updated Tue, 22 May 2018 01:36 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
गभाना के गांव परतापुर में पूर्व मंत्री व बरौली विधायक ठा.दलवीर सिंह के करीबी हरेंद्र सिंह पर हुए हमले के मुकदमे में देहली गेट पुलिस पर विवेचना में घालमेल का आरोप लग रहा है।
सीधे-सीधे आरोप है कि तथ्यों को छिपाकर विधि विज्ञान प्रयोगशाला की बैलेस्टिक रिपोर्ट को दबाकर हमलावरों को मदद करने के इरादे से पुलिस ने फायरिंग में जख्मी होने की धारा घटा दी।
साथ ही कोर्ट में रिपोर्ट पेश कर दी कि अभी रिपोर्ट आना बाकी है और फायरिंग की पुष्टि नहीं हो रही, जबकि रिपोर्ट आ चुकी थी। जब यह मुद्दा उछला तो पुलिस ने आनन-फानन फायरिंग की धारा बढ़ाकर एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। सोमवार को इस संबंध में एसएसपी की गैरमौजूदगी में पूर्व मंत्री ने एसपी क्राइम से शिकायत की।
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पूर्व मंत्री व विधायक ठा. दलवीर सिंह ने बताया कि परतापुर निवासी हरेंद्र सिंह व उनके भाई पर 16 अक्तूबर 2017 को गांव में हमला हुआ। इस हमले में दोनों के फायरिंग में छर्रे लगे। मेडिकल परीक्षण के बाद बैलेस्टिक परीक्षण के लिए प्रकरण आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया। इसी बीच विवेचना गभाना से देहली गेट स्थानांतरित कर दी गई।
देहली गेट पुलिस ने तथ्यों को छिपाते हुुए 4 मई को एसीजेएम न्यायालय में अपनी रिपोर्ट पेश की कि मुकदमे में फायरिंग की पुष्टि नहीं हुई है। विवेचना जारी है और प्रयोगशाला से बैलेस्टिक जांच रिपोर्ट मिलना शेष है।
ऐसे में एक राय होकर फायरिंग की धारा 452, 307 को छोड़कर अन्य धाराओं में आरोपियों को न्यायिक हिरासत में लिया जाए। पुलिस की इस रिपोर्ट पर 10 आरोपियों को जमानत दे दी गई।
इधर, पीड़ित हरेंद्र सिंह ने शिकायत में कहा है कि 26 अप्रैल को एएसपी/सीओ गभाना ने आगरा से मिली बैलेस्टिक रिपोर्ट देहली गेट थाने भेज दी। आरोप है कि जब यह मुद्दा उछला तो आरोपी दिनेश को आनन-फानन गिरफ्तार कर धारा 307 व 452 बढ़ाकर गिरफ्तार कर लिया।
एसपी क्राइम ने मामले में जांच व कार्रवाई के आदेश दिए हैं। वहीं इंस्पेक्टर देहली गेट सुनील कुमार सिंह कहते हैं कि विवेचना में बेवजह का दबाव न मानने पर इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। जो सही था अब तक साक्ष्यों के आधार पर वही किया गया है।
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गभाना के गांव परतापुर में पूर्व मंत्री व बरौली विधायक ठा.दलवीर सिंह के करीबी हरेंद्र सिंह पर हुए हमले के मुकदमे में देहली गेट पुलिस पर विवेचना में घालमेल का आरोप लग रहा है।
सीधे-सीधे आरोप है कि तथ्यों को छिपाकर विधि विज्ञान प्रयोगशाला की बैलेस्टिक रिपोर्ट को दबाकर हमलावरों को मदद करने के इरादे से पुलिस ने फायरिंग में जख्मी होने की धारा घटा दी।
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साथ ही कोर्ट में रिपोर्ट पेश कर दी कि अभी रिपोर्ट आना बाकी है और फायरिंग की पुष्टि नहीं हो रही, जबकि रिपोर्ट आ चुकी थी। जब यह मुद्दा उछला तो पुलिस ने आनन-फानन फायरिंग की धारा बढ़ाकर एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। सोमवार को इस संबंध में एसएसपी की गैरमौजूदगी में पूर्व मंत्री ने एसपी क्राइम से शिकायत की।
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पूर्व मंत्री व विधायक ठा. दलवीर सिंह ने बताया कि परतापुर निवासी हरेंद्र सिंह व उनके भाई पर 16 अक्तूबर 2017 को गांव में हमला हुआ। इस हमले में दोनों के फायरिंग में छर्रे लगे। मेडिकल परीक्षण के बाद बैलेस्टिक परीक्षण के लिए प्रकरण आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया। इसी बीच विवेचना गभाना से देहली गेट स्थानांतरित कर दी गई।
देहली गेट पुलिस ने तथ्यों को छिपाते हुुए 4 मई को एसीजेएम न्यायालय में अपनी रिपोर्ट पेश की कि मुकदमे में फायरिंग की पुष्टि नहीं हुई है। विवेचना जारी है और प्रयोगशाला से बैलेस्टिक जांच रिपोर्ट मिलना शेष है।
ऐसे में एक राय होकर फायरिंग की धारा 452, 307 को छोड़कर अन्य धाराओं में आरोपियों को न्यायिक हिरासत में लिया जाए। पुलिस की इस रिपोर्ट पर 10 आरोपियों को जमानत दे दी गई।
इधर, पीड़ित हरेंद्र सिंह ने शिकायत में कहा है कि 26 अप्रैल को एएसपी/सीओ गभाना ने आगरा से मिली बैलेस्टिक रिपोर्ट देहली गेट थाने भेज दी। आरोप है कि जब यह मुद्दा उछला तो आरोपी दिनेश को आनन-फानन गिरफ्तार कर धारा 307 व 452 बढ़ाकर गिरफ्तार कर लिया।
एसपी क्राइम ने मामले में जांच व कार्रवाई के आदेश दिए हैं। वहीं इंस्पेक्टर देहली गेट सुनील कुमार सिंह कहते हैं कि विवेचना में बेवजह का दबाव न मानने पर इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। जो सही था अब तक साक्ष्यों के आधार पर वही किया गया है।